जयस ने किया ऐलान: पांच महीने बाद बनेगी ‘आदिवासी सरकार’ | MP NEWS

03 September 2018

सीधी। अबकी बार आदिवासी सरकार के नारे से धार जिले के कुक्षी तहसील का मंडी प्रांगण गूंज उठा। मौका था आदिवासी अधिकार महारैली के समापन कार्यक्रम का। इस ऐतिहासिक आयोजन में लगभग 25 हजार से अधिक लोग शामिल हुए। जयस के आदिवासी अधिकार महारैली समापन कार्यक्रम के माध्यम से आदिवासियों ने संदेश दिया कि आदिवासी अब किसी के बहकावे में नहीं आएंगे। जयस ने भाजपा और कांग्रेस पर आदिवासियों को पिछड़ा बनाए रखने का आरोप लगाया।मंच से प्रदेश की आदिवासी बहुल 80 सीटों पर जयस के समर्थन से चुनाव लड़ने की घोषणा की गई। वहीं अन्य सीटों पर ओबीसी, दलित और अन्य समुदाय के लोगों, गरीबों, किसानों और समाज के आखिरी पंक्ति में  खड़े हर व्यक्ति से संपर्क करने की बात की गई।

ज्ञात हो कि आदिवासियों में राजनितिक-सामाजिक चेतना के विकास एवं नये युवा आदिवासी नेतृत्व पैदा करने के उद्देश्य से निकाली गयी ‘आदिवासी अधिकार महारैली’ का 31 अगस्त, 2018 को जबलपुर में सफलतापूर्वक संपन्न करके एक नया इतिहास रचा. अभी तक के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब आदिवासी बहुल 20 जिलों के गाँव-जंगल होते हुए इतने बड़े भूभाग में कोई महारैली निकाली। महारैली में आत्मसम्मान एवं संबैधानिक अधिकार के मुद्दे पर आदिवासियों को एकजुट होने का आह्वान किया गया.  

जयस के आदिवासी अधिकार महारैली में आदिवासियों की उमड़ी भीड़ से भाजपा-कांग्रेस पहले से ही सहमी हुई थी और आज के कार्यक्रम में भाजपा-कांग्रेस के सारे समीकरण फेल हो चुके हैं। आदिवासी वोट खिसकने से जहां भाजपा बेचैन है, वहीं सरकार बनाने के सपने देखने वाली कांग्रेस को निराशा हाथ लगी। लोगों ने शिवराज सरकार के खिलाफ रोष व्यक्त करते हुए 5 महीने बाद सरकार की विदाई के नारे लगाए वही जयस के संरक्षक डॉ हीरालाल अलावा ने युवाओं से आदिवासियों से वादा कराया कि आने वाले 5 महीने बाद मध्य प्रदेश से भाजपा और कांग्रेस की जमानत जप्त करा देंगे। आज की रैली कई मायनों में ऐतिहासिक रहे क्योंकि पहली बार ऐसा हुआ जब आदिवासी अपने दम पर इतना बड़ा आयोजन किए रैली में आदिवासियों का उत्साह देखने लायक था।

डॉ अलावा ने शिवराज सरकार पर आदिवासियों से धोखा करने और मारने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि शिवराज कंस मामा है, जो अभी तक सो रहा था। अभी तक संविधान की पांचवीं अनुसूची, पेसा कानून और वनाधिकार कानून का पालन न करके आदिवासियों को 70 साल पीछे धकेल दिया। डॉ अलावा ने वादा किया कि हमारी सरकार बनने के बाद 6 महीने के अंदर अंदर इन सभी नियमों का पालन कर आदिवासियों का उद्धार करेंगे। हमारी सरकार आदिवासी ओबीसी दलित और समाज के आखिरी पंक्ति में खड़े हर व्यक्ति के साथ हैं। जयस सभी की आवाज है और यह यह पुरानी तानाशाही राजनीति का खात्मा कर नए युवा नेतृत्व को पैदा करेगा जो प्रदेश का चौमुखी विकास करेंगे।

आनंद मोहन माथुर भूतपूर्व एडवोकेट जनरल ऑफ मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, ने कहा कि अब समय आ गया है कि इस सरकार की विदाई कर दी जाए। यह सरकार ने आदिवासियों के जल जंगल जमीन को लूटा है और तबाह कर दिया है। अब इस सरकार को हमेशा के लिए विदा कर दिया जाए।

व्यापम घोटाले का पर्दाफाश करने वाले डॉक्टर आनंद राय ने अबकी बार आदिवासी सरकार का नारा लगाते हुए प्रदेश के सभी आदिवासी ओबीसी दलित और हर गरीब किसान मजदूर को एकजुट होने का आह्वान किया।

झारखंड के जयस प्रभारी संजय पहान ने कहा कि हमारे देश में हमारा शासन चलेगा। अबुआ दिशुम अबुआ राज का नारा देते हुए श्री पहान ने अबकी बार आदिवासी सरकार बनाने का आवाहन किया। श्री पहनने आदिवासियों के पुराने कानून व्यवस्था को विस्तार से समझाया और पांचवी अनुसूची को सख्ती से लागू करने के लिए प्रदेश की शिवराज सरकार को विदा करने का आह्वान किया।

तेलंगाना के जयस प्रभारी नरसिंहाराव कत्राम ने भाजपा और कांग्रेस को आदिवासी विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि पूरे देश में भाजपा और कांग्रेस ने मिलीभगत करके आदिवासियों की जल जंगल जमीन लूट ली और नक्सलवादी के नाम पर मार रहे हैं। यह अब नहीं चलेगा। इन दोनों को पूरे देश से ही खत्म करने की जरूरत है। ये दोनों पार्टी जब तक रहेंगे आदिवासियों के लिए, ओबीसी के लिए, दलित के लिए, गरीबों के लिए किसानों के लिए मजदूरों के लिए समाज के आखिरी पंक्ति में खड़े हर आदमी के लिए खतरा बने रहेंगे। अतः एकजुट होकर इस सरकार को विदा कर दे क्योंकि अबकी बार आदिवासी सरकार बननी चाहिए और पांचवी अनुसूची, पेसा कानून, वनाधिकार कानून एवं संविधान के हर प्रावधानों का सख्ती से पालन होना चाहिए क्योंकि यह सरकार संविधान की धज्जियां उड़ा रही है।

ज्ञात हो कि आदिवासी अधिकार महारैली के प्रथम चरण की शुरुआत 29 जुलाई, 2018 को मध्यप्रदेश के रतलाम जिले के सातरुण्डा से शुरू हुई थी, जो– झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा, देवास होते हुए हरदा तक कुल 10 जिलों में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई थी. दूसरा चरण 16 अगस्त, 2018 को होशंगाबाद से शुरू होकर बैतूल होते हुए रायसेन के अब्दुल्लागंज में 18 अगस्त, 2018 को सफलतापूर्वक संपन्न हुई. इसका तीसरा चरण 28 अगस्त, 2018 को शहडोल जिले से शुरू होकर अनूपपुर, सीधी, उमरिया, डिंडोरी, मंडला होते हुए 31 अगस्त, 2018 को जबलपुर में संपन्न हुई और एक इतिहास रच दिया.

आदिवासी अधिकार महारैली में जयस ने ‘अबकी बार आदिवासी सरकार’ का नया नारा दिया, जो अब गांव-गांव में जन-जन तक इतना व्यापक रूप से फ़ैल चुका है कि बच्चे से लेकर बूढ़े तक गर्व के साथ ‘अबकी बार आदिवासी सरकार’ के नारे लगाने लगे हैं.

आजादी के 70 साल के इतिहास में यह आदिवासियों की पहली यात्रा थी जो किसी आदिवासी युवा के नेतृत्व में आदिवासी झंडे और आदिवासी डंडे के साथ निकली है.

डॉ अलावा ने आदिवासी अधिकार महारैली को सफल बनाने में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से साथ देने वाले संगठनों, जयस युवाओं, लोगों और मीडिया बंधुओं का तहे दिल से धन्यवाद दिया। और कहा कि हमारी सरकार बनने के बाद हम उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने का पूरा प्रयास करेंगे.

उन्होंने कहा कि आदिवासी अधिकार महारैली के माध्यम से हम मध्यप्रदेश के 20 जिलों में आदिवासियो के गांव-गांव में जाकर उनके ज़मीनी मुद्दे– शिक्षा, स्वास्थ्य, कुपोषण, बेरोजगारी, पलायन, बिजली और खराब सड़के जैसे मुलभूत मुद्दों पर भी चर्चा की और करीब से जानने और समझने का मौका मिला. हमारी सरकार बनने पर इन सभी मुलभूत मुद्दों पर ईमानदारी से अमल किया जायेगा, यह जयस का वादा है.

आदिवासी अधिकार महारैली समापन कार्यक्रम में धार जिला जयस अध्यक्ष अंतिम मुझालदा, जयस के धार महासचिव गेंदालाल रणदा,इंदौर जयस अध्यक्ष रविराज बघेल,मध्यप्रदेश जयस प्रवक्ता राहुल बामनिया,रतलाम जयस संरक्षक डॉ अभय ओहरी,झाबुआ जयस संरक्षक कन्हिया लाल मेडा, बड़वानी जयस संरक्षक रामु दयाल बड़ोले,खरगोन जयस संरक्षक राजेन्द्र पंवार,अलीराजपुर जयस संरक्षक सज्जन सिंह,धार जयस संरक्षक नाहर सिंह अलावा,राहुल डावर, जयन्त मुझालदा, देवास जयस प्रभारी सूरज डावर, सैलाना जयस संरक्षक कमलेश्वर डोडियार,जयस के राष्ट्रीय प्रचारक साहेब सिंह कलेम, झाबुआ जयस प्रभारी बाबूभाई डामोर, मनावर जयस प्रभारी लालसिंह वर्मन, गंधवानी जयस संरक्षक धूमसिंह गणावा, हरदा जयस प्रभारी पुरुषोत्तम कलाम, हरदा जयस संरक्षक ध्रुव चौहान, बैतूल जयस संरक्षक समर सरियाम, अलीराजपुर जयस प्रभारी अरविंद कनेस, मुकेश अजनार, बदनावर जयस संरक्षक जगदीश महावी, पीथमपुर जयस संरक्षक दिनेश जमरे, खरगोन जयस संरक्षक राजेंद्र पवार, डॉ हितेश मुझाल्दा, सेंधवा जयस संरक्षक जितेंद्र मौर्य, गेंदालाल रणदा, अंतिम मुजाल्दे, रमेश मंडलोई, मुकाम सिंह बघेल, बसंत कन्नौज , जयंत मुजाल्दे, .सचिन बामनिया, बाबा तढ़वाल, दिलीप जामोद, सुनील किराडे, जीतू मोरी, हरिओम बघेल ,शिवपाल ,कमल बामनिया ,अर्जुन बामनिया, शुभम सोलंकी , शेरू मंडलोई रविंद्र मंडलोई, प्रणव भारद्वाज समेत हजारों जयस युवाओं ने इस आयोजन को सफल बनाने में सराहनीय प्रयास किये।

जयस की प्रमुख मांगे जो वर्तमान की शिवराज सरकार से की गई थी, जिसपर कोई अमल नहीं किया गया. आगामी विधानसभा चुनाव में यहीं मांगे जयस के चुनावी मुद्दे होंगे जो निम्न है–

1 - धार जिले के पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र मनावर, गंधवानी तहसली के 32 गांवों के प्रस्तावित विस्थापन प्रक्रिया,बड़वानी खरगोन और खंडवा के 244 गांवो को वाइल्ड लाइफ प्रोजेक्ट सेंचुरी,होशंगाबाद जिले के तिलक सिंदूर इलाके के 27 आदिवासी गांवो को टाइगर रिजर्व के नाम पर प्रस्तावित विस्तान प्रक्रिया को रद्द करना व धामनोद के 12 गांव का विस्थापन रद्द कर उचित कार्यवाही करना 
2 - धार जिले के पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र में सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित सभी किसानों, आदिवासियों, मछुआरों, पीड़ितों एवं गंधवानी तहसील के बैल बाबा डेम से प्रभावित 12 आदिवासी गांवों के किसानों को स्थायी पट्टा देकर उनको पर्याप्त पुनर्वास एवं उचित मुआवजा की व्यवस्था करना. 
3 - संविधान की पांचवीं अनुसूची, पेसा कानून, वन अधिकार कानून 2006 के सभी प्रावधानों को सख्ती से अविलम्ब धरातल पर लागू करना. 
4 - प्रदेश में रिक्त सभी विभागों के बेकलॉग पदों पर चुनावी आचार संहिता से पहले अतिशीघ्र भर्ती हो. 
5 - संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत जनजातीय सलाहकार परिषद (TAC) का मुखिया/अध्यक्ष और राज्य के राज्यपाल पद पर आदिवासी समुदाय के व्यक्ति की ही नियुक्ति हो। जनजातीय सलाहकार परिषद के सभी सदस्य आदिवासी समुदाय से हो. 

6 - प्रदेश के सभी 89 ट्राइबल ब्लाकों में बनकर तैयार किंतु बंद पड़े छात्रावासों को शीघ्र चालू करवाना. ब्लाक स्तर पर 200 छात्र-छात्राओं, तहसील स्तर पर 400 छात्र-छात्राओं, जिला स्तर पर 1000 छात्र-छात्राओं एवं संभाग स्तर पर 2000 छात्र-छात्राओं के लिए नये छात्रावास बनवाना जिसमें लाइब्रेरी, मेस, वाइफाई की सुविधा हो। मेधावी एवं असंगठित श्रमिक कर्मकार लाभ आरक्षित वर्ग के विद्यार्थियों को भी आवास योजना व छात्रवृत्ति के साथ दिया जाए।
7 - संविधान की पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र धार, झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, बैतूल, जबलपुर, मंडला, रायसेन, उमरिया, सीधी, खंडवा, शहडोल और होशंगाबाद में मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, एग्रीकल्चर कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज, आईटीआई कॉलेज खोलना तथा सरकार द्वारा सीबीएससी स्तर के आवासीय स्कूल खोलना।
8 - प्रदेश के सभी एसटी-एससी कर्मचारी अधिकारियों के प्रमोशन में आरक्षण का लाभ देने के लिए नई नियमावली जल्द से जल्द बनाकर प्रदेश के सभी विभागों में पदस्थ कर्मचारी अधिकारियों का प्रमोशन में आरक्षण का लाभ दिया जाना।
9 - प्रदेश के आदिवासियों की संस्कृति, भाषा, रीति-रिवाजों, परंपराओं को संरक्षित करने के लिए सभी 89 ट्राइबल ब्लाकों में आदिवासी संग्रहालय खोलना एवं आदिवासी हाट लगाये जाना।
10 - प्रदेश की शिक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए संविदा शिक्षकों के स्थान पर स्थायी/नियमित शिक्षकों की भर्ती कर एसटी, एससी के छात्र-छात्राओं की भर्ती प्रक्रिया के दौरान बीएड, डीएड में छूट देना एवं अनुसूचित क्षेत्र में प्रोफेसर के रिक्त पड़े पदों की भर्ती करना. 

11 - प्रदेश के पांच एकड़ तक के सभी भूमिस्वामी किसानों का पूर्ण कर्जा माफ कर खेती के लिए 24 घंटे नि:शुल्क बिजली एवं फसलों के उचित दाम सुनिश्चित करने के साथ-साथ स्वेच्छिक बीमा किया जाना।
12 - प्रदेश में होने वाली समस्त ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली को बंद कर पुरानी एक दिवसीय एक प्रश्न पत्र परीक्षा प्रणाली को लागू करना।
13 - प्रदेश के सभी 89 ट्राइबल ब्लाकों में आधुनिक स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स खोलने के साथ-साथ आधुनिक तीरंदाजी प्रशिक्षण केंद्र एवं जीमखाना खोलना।
14 - प्रदेश के सभी ट्राइबल ब्लाकों के प्रत्येक ग्रामों में 10 नवीन तालाबों का निर्माण कर पानी संग्रहण को बढ़ावा देकर मछली पालन के लिए सरकार द्वारा विशेष फंड दिया जाना तथा साथ ही पुराने तालाबों का गहरीकरण एवं मरम्मत की प्रक्रिया को जल्द से जल्द आदेश जारी करना।
15 - प्रदेश के सभी बेरोजगार आदिवासी युवाओं को शिक्षा एवं रोजगार के लिए ऋण देने की प्रक्रिया का सरलीकरण कर सभी बेरोजगारों के लोन की बैंक गारंटी सरकार लेवे।

16 - अनुसूचित क्षेत्रों से निकलने वाली खनिज संपदा से अर्जित आय/राजस्व का 30 प्रतिशत हिस्सा क्षेत्रीय ग्रामसभा को गांव के विकास व मूलभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए दिया जाना।
17 - आदिवासी विकास के लिए आर्टिकल 275 के अंतर्गत ट्राइबल सब प्लान का पैसा आदिवासियों के शिक्षा, स्वास्थ्य, बेरोजगारी, कुपोषण जैसी मूलभूत समस्याओं को दूर करने के लिए ही इस्तेमाल किया जाना।
18 - विश्व आदिवासी दिवस 9 अगस्त पर पूरे प्रदेश में सरकारी अवकाश घोषित कर आदिवासियों के क्रांतिकारी योद्धाओं बिरसामुंडा, टंट्या मामा, जयपाल सिंह मुंडा, भीमानायक, वीर गुंडाधुर, ख्वाजा नाइक की प्रतिमा सभी ट्राइबल ब्लाकों में स्थापित किया जाना एवं सभी क्रांतिकारियों के इतिहास को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना।
19 - धार जिले की कुक्षी तहसील को चुनावी आचार संहिता से पहले जिला घोषित किया जाना। 
20 - आदिवासी क्षेत्रों में फ्लोराइड युक्त जोन में फ्लोराइड फ्री पानी उपलब्ध कराने के लिए विशेष फिल्टर प्लांट लगाना एवं सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित ट्राइबल ब्लाकों में आधुनिक ब्लड बैंक एवं सिकल सेल स्क्रीनींग सेंटर खोलना एवं इलाज की व्यस्था करना।

21 - प्रदेश के सभी पांचवीं अनुसूचित क्षेत्रों में अवैध साहूकारिता को जल्द से जल्द प्रतिबंधित कर एवं सभी ट्राइबल ब्लाकों में शराब (देशी-विदेशी) पर पूर्णत: प्रतिबंधित किया जाना।
22 - प्रदेश की राजधानी भोपाल में आदिवासियों के लिए अलग से विश्राम गृह बनाया जाना एवं संभागीय स्तर पर एवं सभी6 ट्राइबल ब्लाकों के विकास संबंधी समीक्षा बैठक प्रतिमाह कमिश्नर कार्यालय पर रखा जाना।
23 - मध्य प्रदेश में ऐसे क्षेत्र जो आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र हैं लेकिन अनुसूचित क्षेत्र में शामिल नहीं है, उनकी समीक्षा कर उन्हें भी अनुसूचित क्षेत्र में शामिल किया जाये जैसे धार जिले की बदनावर तहसील एवं जबलपुर की कुन्डम तहसील, इत्यादि।
24 - छठवीं अनुसूचित क्षेत्रों की भांति प्रदेश के सभी पांचवीं अनुसूचित क्षेत्रों में भी स्वशासी जिला, स्वशासी तहसील, स्वशासी ब्लाकों को मान्यता देकर सभी जिला स्तर पर आदिवासी वित्त कोष बनाकर आदिवासी समिति की निगरानी में उस कोष को आदिवासी विकास में इस्तेमाल के लिए अधिकार दिया जाना।
25 - सभी ट्राइबल ब्लाक स्तर, तहसील स्तर, जिला स्तर एवं संभाग स्तर पर आदिवासी सामूहिक भवन का निर्माण करना एवं आदिवासी संगठनों द्वारा संचालित की जा रही सभी नि:शुल्क कोचिंग के लिए सरकार द्वारा फंड उपलब्ध कराना एवं सभी ट्राइबल ब्लाकों में गिट्टी मशीन, पेट्रोल पंप और परिवहन के लिए आदिवासियों को ही लाइसेंस दिया जाना।

26 - जबलपुर ज़िले के सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी रानीदुर्गावती विश्वविद्यालय के परिसर में रानी दुर्गावती की मूर्ति लगाना. कालेज में ही आदिवासी छात्र-छात्राओं के लिए आवासीय हास्टल बनवाना.
27 - मध्यप्रदेश में तेंदू पत्ता संग्राहकों को घातक केमिकल AJDO मिलाकर जिन जिन आदिवासियों को जूते चप्पल बाटे गए संबंधित अधिकारियों के ऊपर FIR कर क़ानूनी कार्यवाही की जाए और केमिकल के प्रभाव से पीड़ित मजदूरों के उचित स्वास्थ्य के इंतजाम किया जाए
28 - मध्यप्रदेश के रतलाम7 झाबुआ में नेशनल एक्सप्रेस वे के नाम पर  आदिवासी गांवो के विस्थापन नही किया जाए 
29 - मध्यप्रदेश के 70 हजार आथिति शिक्षको को स्थायी कर उन्हें रोजगार दिया जाए 
30 - मध्यप्रदेश के अनुसूचित क्षेत्रों/सामान्य क्षेत्रो में सेवाएं दे रहे ST/SC शिक्षको के मेचुअल ट्रांसफर प्रक्रिया पर लगी रोक तुंरन्त हटाकर उन्हें अपने अपने क्षेत्रों में सेवाएं देने में प्राथमिकता दी जाए
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