अध्यापकों की नियुक्ति के मामले में हाईकोर्ट ने 4 सप्ताह के अंदर जवाब देने को कहा | ADHYAPAK SAMACHAR

01 September 2018

मण्डला। जिले के अध्यापकों द्वारा जनजातीय कार्य विभाग द्वारा राजपत्र में प्रकाशित म प्र जनजातीय एवं अनुसूचित जाति शिक्षण संवर्ग नियम 2018 के नियमों को चुनौती दी गई है । जबलपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस माननीय श्री हेमन्त गुप्ता और माननीय श्री विजय शुक्ला की डिविजनल बेंच में 29 अगस्त को सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता के सी घिल्डियाल ने पैरवी करते हुये कहा कि शासन नियुक्ति के नियमों में जहां एक ओर अध्यापकों से विकल्प ले रही है कि इस नये केडर में जाना है या फिर अध्यापक संवर्ग में ही बनें रहना है वही शासन इस नये केडर में नियमों का विशेषकर पूर्व की सेवा लाभ को लेकर खुलासा नहीं किया है। 

ऐसें में याचिकाकर्ताओं को विकल्प भरकर देने में दुविधा हो रही है और वह असमंजस में है। नये केडर के भर्ती नियमों में यह भी उल्लेखित है कि इस नियम के प्रभावशील होने के  पूर्व की अवधि के वेतनमान,  भत्ते, योजना आदि को इस सेवा के संदर्भ में प्राप्त करने के हकदार नहीं होंगे यह नियम असंवेधानिक है। जिसके कारण वेतन नियम में उल्लेखित वेतनमान के न्यूनतम पर निर्धारित होगा। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने यह भी दलील दी कि वरिष्ठता सूची अध्यापक संवर्ग में नियुक्ति दिनांक से चयन क्रम के आधार पर बनाने का नियम गलत है क्योंकि अध्यापक संवर्ग में सविलयन और नियुक्ति के समय चयन प्रक्रिया नहीं हुई थी। 

वरिष्ठता सूची प्रथम नियुक्ति दिनांक से ही तैयार की जा सकती है। नये केडर के नियमों में संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन कर हाईस्कूल प्राचार्य का पद सृजित नहीं किया गया है और न ही सातवें वेतनमान का लाभ देने का उल्लेख है जबकि राज्य स्कूल शिक्षा सेवा के भर्ती नियमों में ये दोनों प्रावधान हैं। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने कहा कि मामला तत्काल निराकृत करने का है क्योंकि अध्यापकों के ऊपर विकल्प भरने का दबाव है। माननीय न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता के तर्क से सहमत होकर सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगने की लंबी प्रक्रिया को न अपनाते हुये सीधे सरकारी वकील को 4 सप्ताह के अंदर जवाब पेश करने का ऑर्डर किया है। 

राज्य अध्यापक संघ के जिला शाखा अध्यक्ष डी के सिंगौर ने विज्ञप्ति जारी कर बताया की अगली सुनवाई 27 सितम्बर को है और इसके पहले सरकार की मंशा स्पष्ट हो जायेगी । याचिका दायर हो जाने से सरकार की विकल्प भराकर शोषण करने की मंशा फेल हो गई है । जिला शाखा अध्यक्ष डी के सिंगौर ने बताया कि आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय ने सरकारी विज्ञप्ति में पदोन्नति क्रमोन्न्ति के लिये सेवा की गणना अध्यापक संवर्ग से करने की बात कही है इससे अध्यापकों की सेवा अवधि का नुकसान होगा अतः इस बाबद आदेश जारी हो जाने के बाद याचिका में संशोधन कर इसे भी चुनौती दी जायेगी। 

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