नई दिल्ली। मोदी सरकार अगली जनगणना में अलग से ओबीसी डेटा जुटाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। 2021 में होने वाली अगली जनगणना में अन्य पिछड़े वर्ग की आबादी के आकड़े जारी करने की मांग पिछड़े नेताओं की ओर से लंबे समय से की जा रही है। अब इस दिशा में मोदी सरकार का यह फैसला एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

जानकारों का कहना है कि इस फैसले के जरिए मोदी सरकार 2019 में होने वाले चुनावों में ओबीसी वोटर्स को लुभाने का प्रयास कर रही है। मिली जानकारी के अनुसार मोदी सरकार ने जनसंख्या के आंकड़ों को पूरी तरह जारी करने का समय भी 5 साल से घटा कर 3 साल कर दिया है। इससे पहले अलग से कभी भी जनगणना में ओबीसी डेटा नहीं इक्कठा हुआ था।

रखा गया है जियो टैगिंग का प्रस्ताव  
बता दे, लालू प्रसाद यादव समेत तमाम ओबीसी नेता इसकी मांग लंबे समय से कर रहे थे। थोड़े-थोड़े अंतराल पर ऐसा मांगे होती रही हैं। इसके अनुसार तीन साल में ही पूरा डेटा सामने आ जाएगा। यही नहीं 2021 की जनगणना में घरों की जियो टैगिंग का भी प्रस्ताव रखा गया है।

मौके पर मौजूद थे ये लोग
गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को सेंसस कमिश्नर और ऑफिस ऑफ रजिस्ट्रार जनरल के काम की भी समीक्षा की। इस दौरान केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू, होम सेक्रटरी राजीव गाबा और मंत्रालय के अन्य सीनियर अधिकारी भी इस दौरान मौजूद रहे।
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