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न्यायालय के आदेश की व्याख्या का अधिकार, किसी सरकारी अधिकारी को नही: HIGH COURT

जबलपुर। कोषालय में कार्यरत श्री संजय शिवहरे, कृपा शंकर तिवारी, जय कुमार बोहट, हेमंत श्रीवास्तव, रजनीश कुमार द्रोणावत, मीना रैकवार, रविन्द्र श्रीवास्तव, विभा भाटिया एवम सहायक पेंशन अधिकारी श्री चैतन्य शराफ को हिंदी टाइपिंग परीक्षा पास करने की दिनाँक से एक वर्ष पश्चात से नियमित वेतन वृद्धियों का लाभ प्रदान किया गया था। यद्यपि, उपरोक्त संबंध में माननीय उच्च न्यायालय, जबलपुर की फुल में प्रतिपादित विधि स्पष्ट है कि मुद्रलेखन परीक्षा पास की दिनाँक से नियमित इंकरेमेंट्स देय होंगे न कि एक वर्ष पश्चात। 

याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी करने वाले उच्च न्यायालय, जबलपुर के अधिवक्ता श्री अमित चतुर्वेदी द्वारा बताया गया है कि, कर्मचारियों के दावे पर विचार न किये जाने के परिणामस्वरूप उन्होंने, माननीय उच्च न्यायालय की शरण ली थी। माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर विभाग के रवैये पर आपत्ति व्यक्त करते हुए तल्ख टिप्पणी करते हए कहा कि न्यायिक संस्था द्वारा पारित आदेश की व्याख्या का अधिकार, किसी सरकारी अधिकारी को नही है। 

उक्त क्रम में, प्रधान सचिव वित्त विभाग, आयुक्त पर्यावास भवन, संयुक्त संचालक, कोष लेखा, जबलपुर संभाग, जिला कोषालय अधिकारी, संभागीय पेंशन अधिकारी को, आदेश में निर्देश जारी किए गए हैं कि याचिकाकर्ता को निश्चित समयावधि के भीतर, हिंदी टाइपिंग परीक्षा पास करने की दिनाँक से नियमित वेतन वेतन वृद्धियां एवम अन्य पारिणामिक बकाया राशी इत्यादि लाभ दिए जाएं।
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