शिवराज भैया, आपकी 76 हजार बहनें रेप का शिकार हो गईं और आप मौका मांग रहे हो | KHULA KHAT

24 August 2018

आदरणीय भैया, प्रदेश की मुंहबोली बहनों के नाम पत्र के लिए धन्यवाद। आपके कार्यकाल में 14 बार रक्षाबंधन का त्यौहार निकलने के बाद अच्छा लगा कि ऐन चुनाव के मौके पर ही सही आपको 15 वें रक्षाबंधन पर महसूस तो हुआ कि प्रदेश की महिलाएं भी महत्वपूर्ण हैं, जिसे आप सरकारी धागे से बांधने की कोशिश कर रहे हैं। प्रदेश की जनता द्वारा आपको सौंपी गई राशि में से प्रत्येक लिफाफे पर लगभग 5 रूपये का टिकिट एवं छपाई हेतु निकाली गई करोड़ों की राशि यदि झोपड़ियों में रहने वालीं बहनों पर खर्च की जाती तो संभवतः उनके जीवन में असली संबल की शुरूआत हो जाती। भले ही आप उन्हें कुछ दे न सके हों, पर आपके पत्र से झांकती अपेक्षा आपकी विवशता और 15 सालों की असफलता दर्शाती है। 

सदियों से बहनें रक्षा बंधन के पर्व पर भाइयों से सुरक्षा देने का वादा मांगतीं हैं। यह इतिहास में पहला अवसर है जब आपके जैसा शक्तिशाली भाई अपनी सुरक्षा का वादा बहनों से मांग रहा है। प्रदेश की महिलाओं की एक ही चिंता है कि उनकी बच्चियां जब सड़कों पर निकलें तो आपकी भाषा में नरपिशाचों से बचीं रहें। उनके पति के पास रोजगार हो, उनके बच्चे नशे के आदी न बनें और ऊंची पढाई कर अच्छी नौकरी हासिल कर सकें।

प्रदेश विगत 15 सालों में बहनों को सुरक्षा देने में असफल साबित हुआ है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार आपके राज में 76 हजार बहनें और आपकी भान्जियां बलात्कार का शिकार हुयी हैं। महिला अपराध छेड़छाड़, मानव तस्करी और बाल अपराध में प्रदेश कुख्यात हो गया है। कुपोषण से आपकी बहनों के बच्चे मर रहे हैं। साठ हजार बच्चे प्रतिवर्ष अपने जन्म का 28 वां दिन भी नहीं देख पाते।

काश, आपको अपनी बहनों की याद तब भी आई होती, जब आपके आदेश पर पुलिस मुख्यमंत्री निवास के सामने मेडीकल काॅलेज की बेटियों को बाल पकड़-पकड़ कर घसीट रही थी। जब बहनों को अपनी गुहार आप तक पहुंचाने के लिए सर मुंडवाने पर विवश होना पड़ा था, जब आपने पुलिस भर्ती में लंबाई की छूट मांग रही बहनों को जेल भेजकर उनका प्रेंगनेंसी टेस्ट करवाया, जब आपने कान बंद कर लिये और बहनों को अपनी आवाज सुनाने के लिए ढोल बजाना पड़ा और जब हमारी बहादुर बेटी को रिपोर्ट लिखवाने के लिए तीन दिन तक भोपाल के थानोें के चक्कर लगाने पड़े। ऐसी ही कितनी ही अन्य घटनाऐं हैं, जब हमें हमारा भाई कहीं नहीं दिखा। प्रदेश की महिलाओं ने यह भी देखा कि आप अपनी बहन और भांजियों के साथ खड़े न होकर अपने उदयपुरा के साथी के साथ खड़े रहे और अंततः आपकी भांजी को आज तक न्याय नहीं मिला।

आपने जिन प्रसूति लाभों की योजना का जिक्र अपनी चिट्ठी में किया है, वे मनमोहन सिंह जी की न्च्।  सरकार की ‘‘भोजन के अधिकार योजना’’ का हिस्सा हैं। मातृत्व लाभ की उस योजना में आपने तो छह हजार रूपये के मातृत्व लाभ को भी घटाकर पांच हजार रूपये कर दिया है, वह भी दर्जन भर शर्तों के साथ। महिलाओं को 50 प्रतिशत का आरक्षण भी पूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी की देन है। इसी तरह शासकीय स्कूलों में निःशुल्क पुस्तकें, गणवेश और आर्थिक सहायता पूर्ववर्ती कांगे्रस सरकार की देन है। प्रदेश के 75 लाख से ज्यादा भांजे-भांजियां आपसे आज भी रोजगार की गुहार कर रहे हैं। 

आपके इस पत्र में रक्षाबंधन पर्व की पवित्र सुगंध के स्थान पर राजनीति से प्रेरित वोटों की अपेक्षा किये जाने की बू आ रही है। 
एक सजग महिला होने के नाते मैं और मध्यप्रदेश की सभी बहनंे यह विचार भी कर रही हैं कि हमें रक्षाबंधन के पावन पर्व को स्वार्थ पर्व बनाकर वोट के लिए गिड़गिड़ाने वाला भाई चाहिए या सुरक्षा कवच देने वाला?
सादर
आपकी मुंह बोली बहन
(शोभा ओझा)
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