अब NEEMUCH में दलितों ने BJP विधायक को खदेड़ा, पीछा करके सुनाई खरी-खोटी | MP NEWS

04 July 2018

नीमच। मध्यप्रदेश में इन दिनों हिसाब-किताब का दौर चल रहा है। 14 सालों से सत्तारुढ़ दल भाजपा के विधायक पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम शिवराज सिंह की योजनाओं के नाम पर जनता के बीच जा रहे हैं तो जनता उनसे उनके व्यक्तिगत प्रयासों द्वारा कराए गए विकास कार्यों का हिसाब मांग रही है। भाजपा के दिग्गज नेता एवं राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय तक इसका शिकार हो चुके हैं। इस लिस्ट में ताजा नाम जुड़ा है जावद विधायक ओमप्रकाश सकलेचा का। सकलेचा को दलितों ने चारों तरफ से घेर लिया और हिसाब-किताब पूछा। दलित महिलाओं ने विधायक पर खुले आरोप लगाए। माहौल गर्म होते देख विधायक जी चुपके से खिसकने लगे तो दलितों ने उनका पीछा किया और फिर खरी-खोटी सुनाईं। विधायक ने कहा कि विरोध करने वालों को बहकाया गया है। 

घटना 2 जुलाई की बताई जाती है। विरोध का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। सिंगोली क्षेत्र के ग्राम बाणदा में वन विभाग ने चरण पादुका वितरण कार्यक्रम आयोजित किया था। मुख्य अतिथि के रूप में जावद विधायक ओमप्रकाश सकलेचा सहित अन्य पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान ही महिलाओं ने विधायक को खरी-खोटी सुनाते हुऐ कहा कि सकलेचा सिर्फ वोट लेने की खातिर ही आते हैं। उन्हें जनता की तकलीफों से कोई लेना-देना नहीं है। प्रधानमंत्री आवास सहित अन्य योजनाओं का लाभ नहीं मिलने से महिलाएं आक्रोशित थीं। आक्रोश को देखते हुए विधायक ने वहां से रवानगी लेना ही बेहतर समझा। समारोह स्थल से कुछ दूर तक विधायक पैदल चले और इसके बाद जीप में बैठकर रवाना हो गए। इस दौरान महिलाओं व ग्रामीणों ने विधायक का पीछा किया और खरी-खोटी बातें सुनाती रहीं। 

इसलिए भड़क रहे हैं दलित ग्रामीण
ग्राम बाणदा की आबादी 1676 है। इनमें से 80 फीसदी से अधिक अनुसूचित जनजाति के सदस्य हैं। गांव में मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। ग्रामीणों को करीब आधा किमी दूर से पानी लाना पड़ता है। साथ ही विधायक ने गत वर्ष ग्राम उदय से भारत उदय अभियान के दौरान बड़ी-बड़ी घोषणाएं की थीं, लेकिन इनमें से एक पूरी नहीं हुई।

उन्हे भड़काया गया है
बाणदा गांव में पूरे 3 घंटे कार्यक्रम चला। ग्रामीणों में कोई आक्रोश नहीं था। बाद में कुछ लोगों के बहकावे में विरोध किया, लेकिन यह चुनाव समय की शुरुआत है। इसमें ऐसे घटनाक्रम आए दिन होंगे। नाराजगी जैसा कुछ नहीं है। प्रधानमंत्री आवास देने का काम ग्राम पंचायत का है, मेरा नहीं। काम तो पंचायत को ही करना है।
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