मप्र कैबिनेट मीटिंग का आधिकारिक प्रतिवेदन | MP Cabinet Meeting Official report

Tuesday, May 29, 2018

राजेश दाहिमा/दुर्गेश रायकवार/भोपाल। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में मंत्रि परिषद की बैठक में आज कर्मचारी बीमा-सह-बचत योजना 2003 को पुनरीक्षित कर अंशदान एवं बीमा मूल्य को दोगुना करते हुए योजना में अंशदान का 60 प्रतिशत अंश बचत निधि में और 40 प्रतिशत अंश बीमा प्रीमियम के रूप में नियत करने का निर्णय लिया गया। यह व्यवस्था कर्मचारी बीमा-सह-बचत योजना 2018 के रूप में 1 जुलाई 2018 से प्रभावशील की जाएगी। इससे प्रदेश के लगभग 4.50 लाख कर्मचारी लाभांवित होगें।

लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण

मंत्रि-परिषद ने राज्य बीमारी सहायता निधि योजना में 5 संवर्गो के लगभग 50 लाख अतिरिक्त परिवारों को शामिल करने का निर्णय लिया। पाँच संवर्गो में शिल्पकार एवं हस्तशिल्प कारीगर, सामाजिक सुरक्षा योजना के पेंशनर, वनाधिकार प्राप्त पट्टाधारी, बीड़ी बनाने वाले मजदूर और मुख्यमंत्री जन-कल्याण योजना के असंगठित श्रमिक संवर्ग शामिल है। इन संवर्गो को शामिल करने के बाद अब लगभग 1 करोड़ 50 लाख परिवारों को राज्य बीमारी सहायता निधि योजना में चिन्हित बीमारियों के उपचार के लिए अधिकतम 2 लाख रूपये तक की राशि की पात्रता होगी।

उच्च शिक्षा

मंत्रि-परिषद ने महाविद्यालयों में प्राध्यापक/सहायक प्राध्यापक/ग्रंथपाल एवं क्रीड़ा अधिकारी  के स्वीकृत रिक्त पद पर निर्धारित योग्यता रखने वाले आवेदकों/अतिथि विद्वानों के लिए एक बार में शैक्षणिक सत्र के सभी 12 माहों या शेष बचे माहों की कालावधि के लिए प्रति दिवस 1500 रूपये, प्रतिमाह न्यूनतम 30000 रूपये के निश्चित मानदेय देते हुए आमंत्रण प्रक्रिया अपनाई जाने का निर्णय लिया। अतिथि विद्वानों को 6 दिन का आकस्मिक अवकाश और 90 दिनों के न्यूनतम मानदेय सहित प्रसूति अवकाश की पात्रता होगी। प्रदेश में उच्च शिक्षा विभाग के 469 महाविद्यालय संचालित है।

मंत्रि-परिषद ने 2 शासकीय महाविद्यालय बैहर (बालाघाट) और सौंसर (छिंदवाड़ा)में स्नातकोत्तर स्तर पर 5 विषयों में नई कक्षाएँ और 3 शासकीय महाविद्यालय आठनेर (बैतूल), निवास (मण्डला) एवं भीकनगांव (खरगोन) में 3 नवीन संकाय शुरू करने के लिए 20 शैक्षणिक तथा 24 अशैक्षणिक कुल 44 पद और आवर्ती व्यय भार 1 करोड़ 45 लाख 80 हजार रूपये प्रतिवर्ष एवं अनावर्ती व्यय भार 1 करोड़ 73 लाख रूपये तथा राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत झाबुआ, डिण्डौरी में नवीन आदर्श महाविद्यालय स्थापित करने पर होने वाले आवर्ती व्यय भार 6 करोड़ 69 लाख 98 हजार रूपये प्रतिवर्ष एवं अनावर्ती व्यय भार 24 करोड़ रूपये (केन्द्रांश 14 करोड़ 40 लाख रूपये एवं राज्यांश 9 करोड़ 60 लाख) तथा 96 शैक्षणिक, 50 अशैक्षणिक कुल 146 पदों का सृजन तथा राज्य के वित्तीय संसाधनों से शहपुरा, जिला डिण्डौरी में एक नवीन आदर्श महाविद्यालय शुरू करने पर आवर्ती व्यय भार 3 करोड़ 34 लाख 99 हजार रूपये प्रतिवर्ष एवं अनावर्ती व्यय भार 12 करोड़ रूपये तथा शैक्षणिक 48, अशैक्षणिक 25 कुल 73 पद इस तरह 3 नए आदर्श महाविद्यालयों के लिए कुल 144 शैक्षणिक एवं 75 अशैक्षणिक कुल 219 पदों का सृजन करने की मंजूरी दी।

चिकित्सा शिक्षा

मंत्रि-परिषद ने चिकित्सा महाविद्यालय रीवा के आवासीय भवन और परिसर निर्माण पूरा करने के लिए 4 करोड़ 59 लाख रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति दी।

मंत्रि-परिषद ने चिकित्सा महाविद्यालय विदिशा के भवन एवं परिसर निर्माण की स्वीकृत राशि 265 करोड़ 19 लाख को बढा़ते हुये 355 करोड़ 95 लाख की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति दी।

पशुपालन

मंत्रि-परिषद ने पशुपालन विभाग के तहत 12 वीं पंचवर्षीय योजना में प्रचलित राजस्व व्यय से संबंधित गोकुल महोत्सव योजना को 1 अप्रैल 2017 से आगामी 3 वर्ष तक निरन्तर रखने की मंजूरी दी।

किसान-कल्याण एवं कृषि विकास

मंत्रि-परिषद ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के वर्ष 2017-18 से वर्ष 2019-20 तक निरंतर संचालन तथा वित्तीय आकार केन्द्रांश 750 करोड़ एवं राज्यांश 500 करोड़ रूपये कुल 1250 करोड़ का अनुमोदन देने का निर्णय लिया।

मंत्रि-परिषद ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना का वर्ष 2017-18 से 2019-20 तक निरंतर संचालन तथा वित्तीय आकार केन्द्रांश 703 करोड़ 61 लाख 34 हजार और राज्यांश 469 करोड़ 7 लाख 56 हजार कुल 1172 करोड़ 68 लाख 90 हजार रूपये का अनुमोदन देने का निर्णय लिया।

मंत्रि-परिषद ने नेशनल मिशन फार सस्टेनेबल एग्रीकल्चर के तहत स्वाइल हेल्थ कार्ड योजना के वर्ष 2017-18 से 2019-20 तक निरंतर संचालन तथा वित्तीय आकार केन्द्रांश 67 करोड़ 92 लाख 55 हजार और राज्यांश 45 करोड़ 28 लाख 37 हजार कुल 113 करोड़ 20 लाख 92 हजार रूपये का अनुमोदन देने का निर्णय लिया।

सहकारिता

मंत्रि-परिषद ने प्राकृतिक आपदा से प्रभावित कृषकों को राहत देने के लिए अल्पकालीन ऋणों को मध्यकालीन ऋणों में परिवर्तन करने के लिए राज्य शासन के अंशदान की योजना को आगामी वर्षों में निरंतर रखने तथा इसके लिए आवश्यकतानुसार प्रावधान सहकारिता विभाग के बजट में करने संबंधी स्वीकृति दी।

राज्य वेतन आयोग की अनुशंसा

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में मंत्रि परिषद की बैठक में राज्य वेतन आयोग की अनुशंसाओं पर निर्णय लिया गया। इसमें प्रमुख रूप से उप यंत्री का ग्रेड वेतन 3200 से 3600 रूपये, वाणि‍ज्यिक कर निरीक्षक एवं कराधान सहायक का ग्रेड वेतन 2800 से 3600 रूपये, राजस्व निरीक्षक का ग्रेड वेतन 2400 से बढ़ाकर 2800 रूपये, स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित विभागों के कम्पाउण्डर का ग्रेड वेतन 1900 से बढ़ाकर 2400 रूपये, मंत्रालय के अनुभाग अधिकारी और निज सचिव का ग्रेड वेतन 4200 से बढ़ाकर 4800 रूपये, सहायक जिला अभियोजन अधिकारी का ग्रेड वेतन 3600 से 4200 रूपये और उप जेलर का ग्रेड वेतन 2800 से 3600 रूपये किया गया।

उपर्युक्त निर्णय 1 जनवरी 2016 से लागू होगा। एक जनवरी 2016 से 30 जून 2018 तक का देय लाभ काल्पनिक होगा। वास्तविक लाभ 1 जुलाई 2018 (अगस्त 2018 में देय) से देय होगा। इससे लगभग 50 हजार शासकीय सेवक लाभांवित होंगें और लगभग 57 करोड़ का अतिरिक्त वार्षिक व्यय भार होगा।

अभियांत्रिकी सेवा, वरिष्ठ प्रबंधकीय सेवा और अन्य ऐसे सेवा संवर्ग जिनके वेतनमान संबंधी शेष मांगों पर विचार के लिए अपर मुख्य सचिव वित्त की अध्यक्षता में समिति का गठन कर ऐसे विषय समिति को संदर्भित किये जायेंगें।

संविदा पर नियुक्त शासकीय सेवक

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में संविदा पर नियुक्त शासकीय सेवकों को नियमित पदों पर नियुक्ति के अवसर देने के लिए विभिन्न निर्णय लिए गए। यह नीति राज्य शासन के सभी विभागों तथा राष्ट्रीय कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के लिए गठित स्पेशल पर्पज व्हीकल्स मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद, राज्य/जिला स्वास्थ्य समिति, मध्यप्रदेश सर्व शिक्षा अभियान मिशन के तहत कार्यरत/पूर्व में कार्यरत संविदा कर्मचारियों के लिए लागू होगी।

सभी विभागों के अनुमोदित प्रशासनिक सेटअप में संविदा पर नियुक्ति के लिए जो पद चिन्हित है, उन्हें चरणबद्ध तरीके से नियमित पदों में परिवर्तित किया जाएगा। प्रत्येक विभाग के भर्ती करने वाले पदों में आगामी 3 वर्ष तक 20 प्रतिशत पद संविदा पर नियुक्त शासकीय सेवकों के लिए आरक्षित रहेंगे।

इस आरक्षण का लाभ प्राप्त करने के लिए वही संविदा सेवक पात्र होंगें, जो सीधी भर्ती का रिक्त पद जिस श्रेणी का है उसी श्रेणी में न्यूनतम 5 वर्ष तक संविदा पर नियुक्त रहे हो। पाँच वर्ष की यह अवधि रिक्त पद पर आवेदन करने की दिनांक को पूरी होनी चाहिए। यदि किसी संविदा सेवक ने विभिन्न पदों पर कार्य किया है तो उसकी कुल संविदा सेवा पाँच वर्ष की होना चाहिए। अगर उसने विभिन्न श्रेणी के पदों पर संविदा पर कार्य किया है तो पाँच वर्ष की उपरोक्त अवधि की गणना पूरी होने पर वह उस श्रेणी के पद पर नियुक्ति के लिए आवेदन कर सकेगा, जो इस पाँच वर्ष में निम्नतम श्रेणी का था।

संविदा सेवक एक अथवा उससे अधिक श्रेणी के संविदा पदों पर नियुक्त रहा हो, ऐसी स्थिति में जिस श्रेणी के नियमित पद पर वह नियुक्ति का आवेदन करता है उसके समकक्ष एवं उच्चतर श्रेणी के संविदा पद पर वह जितने वर्ष कार्यरत रहा उतने वर्ष की छूट उसे निर्धारित अधिकतम आयु सीमा में मिलेगी। यह छूट सहित अधिकतम आयु आवेदन दिनांक अथवा पद की भर्ती के लिए जारी विज्ञप्ति में निर्धारित दिनांक को 55 वर्ष से अधिक नहीं होगी।

नियुक्ति की प्रक्रिया में अनुसूचित जाति/जनजाति/पिछड़ा वर्ग के आरक्षण नियमों का पालन होगा। संविदा पर कार्यरत शासकीय सेवक की सेवा मेकेनिकल रूप से समाप्त नहीं की जाएगी। विधिवत जाँच पूरी करने के बाद ही सेवा समाप्त की जा सकेगी। संविदा कर्मचारियों का मासिक पारिश्रमिक,समकक्ष नियमित पदों के वेतनमान के न्यूनतम का 90 प्रतिशत, निर्धारित करने का प्रावधान किया जायेगा।

संविदा पर नियुक्त शासकीय सेवकों को प्रत्येक वर्ष के जनवरी माह में वार्षिक वेतन वृ‍द्धि, अलोच्य अवधि में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में वृद्धि के आधार पर देय होगी। यह राशि निकटतम 100 रूपये के गुणांक तक पूर्णांकित की जाएगी। इस अनुसार वार्षिक वेतन वृद्धि देने के लिए यह आवश्यक होगा कि संबंधित संविदा सेवक ने कम से कम 6 माह की सेवा अवधि उस वेतन में पूरी कर ली हो। जिन संविदा कर्मचारियों को पूर्व से ई.पी.एफ/राष्ट्रीय पेंशन योजना का लाभ प्राप्त नहीं हो रहा हो, उन्हें राष्ट्रीय पेंशन योजना का लाभ दिया जायेगा।

संविदा पर कार्यरतों को एक कैलेण्डर वर्ष में 13 दिन के आकस्मिक अवकाश, 15 दिन के अर्जित अवकाश तथा 10 दिन के लघुकृत अवकाश की पात्रता होगी। कैलेण्डर वर्ष की समाप्ति पर शेष अवकाश स्वत: व्यपगत हो जायेंगे। संविदा पर नियुक्त महिला कर्मचारियों को 90 दिन के प्रसूति अवकाश की पात्रता उन प्रतिबंधों के साथ रहेगी जो महिला शासकीय सेवक के लिए अवकाश नियमों में निर्धारित है।
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