AMAZON पर 55 रुपए वाली किताब 275 रुपए में | BUSINESS NEWS

14 April 2018

भोपाल। 'अपनी दुकान' टैग लाइन के साथ देश भर में सबसे ज्यादा आॅनलाइन कारोबार करने वाली कंपनी AMAZON भारत में उपभोक्ताओं को किस कदर ठग रही है। इसका एक प्रमाण गुना, मध्यप्रदेश में सामने आया है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान व प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की किताबें यहां मनमाने दामों पर बिक रहीं हैं। 55 रुपए अधिकतम मूल्य वाली एक किताब 275 रुपए में बेची गई। उस पर भी 95 रुपए पार्लस डिलेवरी चार्ज ले गया। इस तरह किताब कुल 390 रुपए की पड़ी। ग्राहक ने जागरुकता दिखाई तो AMAZON.IN ने बकाया रकम उनके वॉलेट में बतौर गिफ्ट कूपन वापस कर दी। बता दें कि AMAZON कंपनी किताबें बेच बेचकर ही दुनिया की सबसे बड़ी आॅनलाइन सेलिंग कंपनी बनी है। 

यह है मामला
मामला कक्षा 8 की एनसीईआरटी की गणित की किताब का है, जिसका प्रिंट रेट 55 रुपए है। सब इंस्पेक्टर अरुण तोमर ने यह किताब AMAZON.IN से ऑनलाइन मंगाई थी, जो उन्हें 370 रुपए की पड़ी। इसमें किताब की कीमत 275 रुपए थी और डिलेवरी चार्ज 95 रुपए लिया गया। तोमर ने बताया कि यह किताब कहीं नहीं मिल रही थी। पुस्तक विक्रेताओं का भी कहना था कि 8वीं ही नहीं बल्कि 6 व 7वीं के गणित की किताब भी पूरे मप्र में कहीं भी उपलब्ध नहीं है। इसलिए उन्होंने अमेजन पर सर्च किया तो उसमें उन्हें यह किताब मिल गई। वेबसाइट पर तीन विक्रेताओं के ऑप्शन दिए गए थे और यह किताब 275 से 990 रुपए तक की कीमत पर उपलब्ध थी।

दूसरी किताब पर प्रिंट रेट देखा तो पकड़ में आई पूरी गड़बड़ी

तोमर का कहना था कि उन्हें किताब की सही कीमत पता नहीं थी, इसलिए उन्होंने 275 रुपए में उसे बुक कर दिया और दो-तीन में डिलेवरी भी हो गई। बाद में उन्होंने अपनी बेटी की सहेली के पास जब यह किताब देखी तो उस पर 55 रुपए प्रिंट थे। ऐसा भी नहीं था कि यह किताब पुरानी हो, उसे इसी साल खरीदा गया था। इसके बाद उन्होंने अपनी बेटी की किताब देखी तो पता चला कि उस पर 275 रुपए कीमत का स्टीकर चिपका हुआ है। उन्होंने स्टीकर उखाड़ा तो नीचे सही प्रिंट रेट को काले पेन से मिटा दिया गया था।

माफी मांगी, रुपए लौटाए और कार्रवाई का दिया भरोसा
इस मुद्दे को लेकर श्री तोमर ने AMAZON.IN पर संपर्क किया तो कंपनी के प्रतिनिधियों द्वारा उनसे माफी मांगी गई और अतिरिक्त राशि गिफ्ट कार्ड के रूप में वापस लौटाई गई। यही नहीं कंपनी की ओर से यह वादा किया गया कि अधिक कीमत वसूलने वाले विक्रेताओं पर वह कार्रवाई भी कराएगी। वहीं इस घटना का असर यह हुआ कि शुक्रवार को कंपनी के एप पर एनसीईआरटी की किताबों की कीमतों में सुधार देखा गया।

जो किताब कहीं नहीं मिल रही, वह डीलरों के पास कैसे पहुंची
स्थानीय पुस्तक विक्रेताओं का कहना है कि उन्होंने कक्षा 6 से 8वीं तक की गणित की किताब को लेकर एनसीईआरटी के तमाम डिपो पर संपर्क किया। एक पुस्तक विक्रेता रमेश जैन ने बताया कि कई दिनों से लगातार उन्हें यह जवाब मिल रहा है कि यह उपलब्ध नहीं है। उनका कहना है कि यह किताब कुछ खास डीलरों के पास कैसे पहुंच गई? जबकि इसकी बिक्री व सप्लाई का जिम्मा एक सरकारी एजेंसी के पास है। उन्होंने कहा कि यह मामला मिलीभगत का लग रहा है।

और अधिक समाचारों के लिए अगले पेज पर जाएं, दोस्तों के साथ साझा करने नीचे क्लिक करें

-----------

अपनी पसंदीदा श्रेणी के समाचार पढ़ने कृपया नीचे दिए गए श्रेणी के ​बटन पर क्लिक करें

mgid

Loading...

Popular News This Week

Revcontent

Popular Posts