आदिवासियों का फैसला: अपने नोट चलाएंगे, वोट नहीं डालेंगे, स्कूल नहीं जाएंगे | NATIONAL NEWS

Saturday, March 10, 2018

नई दिल्ली। झारखंड राज्य की राजधानी रांची से महज 35 किमी दूर खूंटी में पत्थलगड़ी की वर्षगांठ के अवसर पर आदिवासियों की बड़ी पंचायत का आयोजन किया गया। इसमें कई मुद्दों पर बात हुई और फैसले भी हुए। पंचायत में ऐलान किया गया कि ग्रामसभा अपनी मुद्रा चलाएगी, रिवर्ज बैंक की मुद्रा को मान्यता नहीं देंगे। सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ने नहीं भेजेंगे क्योंकि सरकार का एजुकेशन सिस्टम ही गलत है। इतना ही नहीं आदिवासी चुनावों का पूरी तरह से बहिष्कार करेंगे। खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय का कहना है कि यह एक नया राज्य बनाने की साजिश है। इसे समय रहते रोकना चाहिए। 

जब स्वशासन नहीं है तो आजादी कैसी
डॉ जोसेफ पूर्ति के नेतृत्व में भंडरा मैदान में विशाल सभा का आयोजन किया गया। जोसेफ पूर्ति के मुताबिक, अंग्रेजों से अबतक भारत आजाद नहीं हुआ है, सिर्फ सत्ता का हस्तांतरण हुआ है। आजादी का मतलब स्वतंत्र होता है। स्वतंत्रता स्वशासन हम आदिवासियों को नहीं मिली है। अभी आदिवासी लोग भारत सरकार के नियमों को पत्थरों पर अंकित करने काम कर रहे हैं। ताकि सरकार के लोग यह देखें कि भारत सरकार का नियम क्या हैं? पूरे देश में सरकार की एक इंच जमीन नहीं है। देश का मालिक आदिवासी है। सरकार बनाने के लिए भूमि चाहिए। भारत के पास अपनी कोई भूमि नहीं है, तो सरकार कैसे बन सकती है।

5वीं अनुसूचि के अनुसार सभी सरकारी चुनाव अवैध
जोसेफ पूर्ति ने कहा कि सरकारी स्कूलों में बच्चों को गलत बातें पढ़ाई जाती है। इसलिए आदिवासियों ने सरकारी स्कूलों में अपने बच्चों को भेजना बंद कर दिया है। ग्रामसभा गांव-गांव में अपना स्कूल चलाएगी। जहां रूढ़ीवादी ढंग से पढ़ाई होगी। पांचवीं अनुसूची के मुताबिक क्षेत्र में चुनाव नहीं हो सकता। इसलिए इन क्षेत्रों में लोकसभा, विधानसभा और पंचायत चुनाव अवैध है। ग्रामसभा सांसद और विधायक को असंवैधानिक मानती है। दिकुओं को यहां का नियम-कानून मानना पड़ेगा। आदिवासी तो मालिक हैं, वे नियम का पालन क्यों करेंगे?

1. हमने 99 साल की लीज दी थी
देश का लीज करार भारत सरकार (आदिवासियों) के साथ 1870 में 99 साल के लिए हुई थी। जिसकी अवधि 1969 में समाप्त हो गई। इसके बाद लीज करार बढ़ा नहीं। गैर आदिवासी विदेशियों का कहना है कि आदिवासी वोट के जरिए लीज का नवीनीकरण हर पांच वर्षों में करते आ रहे हैं। ऐसे में वोट न देकर हम अपना यानी आदिवासियों का शासन स्थापित कर सकते हैं।

2. अपनी अलग करंसी चलाएंगे
2 से लेकर 2000 तक के नोट रिजर्व बैँक ऑफ इंडिया जारी करती है। जो केंद्र सरकार से प्रत्याभूत है। 'रुपए' एक करेंसी है। चूंकि पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में केंद्र और राज्य सरकार कानून बनाने का अधिकार समान्यत: नहीं है। इसलिए केंद्र के प्रत्याभूत नोट भी पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में प्रभावी नहीं है। इसलिए ग्राम सभा पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में अपनी करेंसी लाएगी।

3. सबको मिलेंगे 20-20 लाख
अपनी करंसी लाने के बाद सब ग्रामीणों के खातों में 20-20 लाख रुपए डाले जाएंगे। पांचवीं अनुसूची क्षेत्र के संसाधनों पर ग्राम सभा अधिकार हो जाएगा तो ये काम संभव है। जैसे पड़ोसी देश नेपाल में भी इंडिया का नोट चलता है। भारत की जिस तरह की करेंसी और नोट चलती है, उसी तरह पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में भी विनिमय और समन्वय स्थापित की जाएगी।

4. हर सवाल का डीसी ने दिया जवाब
डीसी सूरज कुमार ने कहा कि पत्थलगड़ी करने वाले कहते है कि वे वोटर कार्ड को नहीं मानते, पर अनुच्छेद 12 में साफ लिखित है कि राज्य की परिभाषा क्या है। इसमें संसद और सरकार के अधिकार निहित हैं। अनुच्छेद 13 में कहा गया है कि जिस विधि से किसी के मौलिक अधिकार का हनन हो, वह स्वत- ही शून्य हो जाता है। अनुच्छेद 13(3)क में साफ है कि कानून बनाने का अधिकार सिर्फ राज्य का है। अनुच्छेद 19(5)(6) में कहा गया है कि 5वीं अनुसूची वाले क्षेत्रों में भी राज्य की कार्यकारी शक्तियां निहित हैं।

पत्थलगड़ी राज्य के अंदर एक अलग राज्य का संकेत : सरयू
खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने शुक्रवार को बिष्टुपुर स्थित गोपाल मैदान में स्वदेशी मेला के उद्घाटन समारोह में कहा कि पत्थलगड़ी राज्य के अंदर एक अलग राज्य बनाने का संकेत है, जिसे समय रहते सरकार गंभीरता से नहीं लेगी और रोकेगी नहीं, तो यह घातक होगा। जैसे एक फुंसी जब नासूर बन जाता है, तो वह लाइलाज हो जाता है। पत्थलगड़ी करने वाले सत्ता में बैठी शक्तियों को हटाना चाहती है, जो राज्यहित में नहीं है।

खूंटी के स्कूलों के बारे में शिक्षा मंत्री ने की सीएम से बात
खूंटी के कुछ स्कूलों को जबरन बंद कराने और वहां पर आपत्तिजनक पढ़ाई शुरू कराने के बारे में शिक्षा मंत्री नीरा यादव ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री से बात की। मंत्री ने कहा कि यह गंभीर मसला है। इस बारे में विभागीय सचिव और शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारियों के साथ मंथन किया है। खूंटी के डीसी से भी बात हुई है। विभाग के प्रधान सचिव एपी सिंह ने कहा कि यह मामला पूरी तरह कानून व्यवस्था का है।

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