मतदान से पहले शिवराज ने सिंधिया को दिया झटका, रावत से हुई गुपचुप बातचीत | MP NEWS

Thursday, February 22, 2018

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने राजनीतिक प्रतिस्पर्धी ज्योतिरादित्य सिंधिया को करारा झटका दिया है। शिवपुरी के एक होटल में उन्होंने सिंधिया के प्रमुख सिपहसालार एवं कांग्रेस विधायक दल के सचेतक रामनिवास रावत से गुपचुप बातचीत की। विधायक रावत का कहना है कि यह एक सामान्य शिष्टाचार के तहत हुई भेंट थी परंतु चुनावी माहौल में हुई इस मुलाकात के कई अर्थ निकाले जा रहे हैं। असलियत जो भी हो, परंतु फिलहाल यह सूचना सिंधिया के लिए काफी तनाव देने वाली है। सीएम शिवराज सिंह ने एक मुलाकात करके सिंधिया की शान को दांव पर तो लगा ही दिया है। 

क्या हुआ घटनाक्रम
हुआ यूं कि शिवपुरी के टूरिस्ट विलेज होटल में सीएम शिवराज सिंह ठहरे हुए थे। इसी होटल में सिंधिया के मुख्य सिपहसालार रामनिवास रावत भी ठहरे हुए थे। उनके साथ अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के कुछ पदाधिकारी भी थे। इसी टोटल की लॉबी में विधायक रामनिवास रावत को सीएम शिवराज सिंह से बातचीत करते हुए देखा गया। चर्चा यह भी है कि इसके बाद दोनों के बीच आधे घंटे तक बंद कमरा बैठक भी हुई। 

विधायक रामनिवास रावत ने क्या कहा
विधायक रामनिवास रावत ने इसे एक सामान्य शिष्टाचार के तहत हुई भेंट बताया है। उनका कहना है कि सीएम शिवराज सिंह अचानक उनके सामने आ गए इसलिए उन्होंने शिष्टाचार निभाया। रावत ने इस संदर्भ में शुरू हुईं चर्चाओं को अफवाह करार देते हुए खंडन भी किया। 

चर्चाएं क्या हो रहीं हैं
कोलारस विधानसभा सीट पर उपचुनाव हैं। विधायक रामनिवास रावत कांग्रेस की ओर से चुनाव प्रभारी हैं। सीएम शिवराज सिंह भी चुनाव प्रचार करने ही आए थे। अत: चर्चाएं हो रहीं हैं कि विधायक रामनिवास रावत सिंधिया से नाराज हैं और बेहतर भविष्य के लिए भाजपा ज्वाइन कर सकते हैं। बात बढ़ते बढ़ते यहां तक पहुंच गई है कि विधायक रामनिवास रावत मतदान के ठीक पहले भाजपा ज्वाइन कर सकते हैं। इससे कोलारस के चुनाव पर भी प्रभाव पड़ेगा। 

जब रावत ने खंडन कर दिया तो चर्चाओं का क्या महत्व
हालांकि विधायक रामनिवास रावत ने इस संदर्भ में आ रहीं सभी खबरों का खंडन कर दिया है परंतु इस मुलाकात का काफी महत्व है। इसे नजरअंदाज तो कतई नहीं किया जा सकता क्योंकि: 
एक लम्बी लिस्ट है जिसमें सिंधिया के नजदीकी नेताओं ने बगावत की और सिंधिया के खिलाफ हो गए। कुछ कांग्रेस में हैं, कुछ भाजपा में चले गए। वो सभी ऐसे ही बयान देते थे जैसे रावत दे रहे हैं। 

मुंगावली में कट्टर सिंधिया समर्थक डॉक्टर केपी यादव ने टिकट वितरण के साथ ही भाजपा ज्वाइन कर ली थी। यह एक बड़ा झटका था। मुंगावली में यादव के अलावा कई अन्य नेताओं को भी भाजपा में ज्वाइन कराया गया। वहां भाजपा के रणनीतिकारों ने साबित किया कि सिंधिया के समर्थक ही सिंधिया को छोड़कर भाजपा में आ रहे हैं। कोलारस में ऐसा कोई बड़ा उदाहरण नहीं है। भाजपा के रणनीतिकार ऐसे अवसरों का पूरा लाभ उठाते हैं। 

शिवपुरी का टूरिस्ट विलेज होटल बहुत बड़ा नहीं है। विधायक रामनिवास रावत को निश्चित रूप से मालूम होगा कि इसमें सीएम शिवराज सिंह भी मौजूद हैं। सीएम की अपनी व्यस्तताएं होतीं हैं। चुनावी माहौल में वो टहलने के लिए तो लॉबी में आए नहीं होंगे। विधायक रामनिवास रावत के साथ भी कांग्रेस के कई पदाधिकारी थे परंतु जब मुलाकात हुई दोनों अकेले थे। यह एकांत ही संदेह पैदा करता है। 

रावत की सिंधिया भक्ति पर सवाल क्यों
विधायक रामनिवास रावत वर्षों से सिंधिया परिवार से हुए हैं। उनकी पहचान भी सिंधिया से ही है। सिंधिया ने भी उन्हे काफी महत्व दिया। महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा के बाद अब विधायक रामनिवास रावत ही पॉवर में हैं, लेकिन कोलारस विधानसभा चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने केपी सिंह को प्रभारी बना दिया। इस फैसले ने रावत का कद निश्चित रूप से कम कर दिया। यह फैसला संकेत कर गया कि विधायक रामनिवास रावत में वो बात नहीं है जो सिंधिया को चाहिए। शायद दोनों के बीच कुछ ऐसा हुआ कि सिंधिया ने रावत को संकेत दिया। राजनीति में मनमुटाव कब बड़ा हो जाए कहा नहीं जा सकता और फिर सत्ता का अपना आकर्षण होता है। 

क्या विधायक रामनिवास रावत भाजपा ज्वाइन कर सकते हैं
विधायक रामनिवास रावत का इतिहास देखें तो इस अफवाह में कोई दम नहीं है लेकिन यदि परिस्थितियां देखें तो बात कुछ और नजर आती है। मप्र में कांग्रेस 15 साल से सत्ता में नहीं है। इस बार पूरी उम्मीद थी कि कांग्रेस ज्योतिरादित्य सिंधिया को चेहरा बनाकर पेश करेगी लेकिन जिस तरह से दीपक बावरिया, अजय सिंह और अरुण यादव ने खुलकर बयान दिए। सिंधिया की ताजपोशी खटाई में नजर आती है। श्योपुर में हालात यह हैं कि कलेक्टर और एसपी भी विधायक रामनिवास रावत को खास तवज्जो नहीं देते। उन्हे काफी संघर्ष करना पड़ता है। कांग्रेस के कई नेताओं का मानना है कि यदि कांग्रेस ने चेहरा पेश नहीं किया तो इस बार भी पार्टी चूक सकती है। विधायक रामनिवास रावत अनुभवी नेता हैं। सत्ता के लिए संभावनाएं तलाशना राजनीति में नया नहीं है। 

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