कोलारस उपचुनाव: अपने नाराज, कोई लहर नहीं, ना सिंधिया - ना शिवराज | MP NEWS

Tuesday, February 13, 2018

भोपाल। मप्र की 2 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं। पहली बार सीएम शिवराज सिंह ने चुनावी रणनीति बदली और दोनों सीटों पर भाजपा फ्रंट लाइन में आ गई है। इधर कांग्रेस की तरफ से ज्योतिरादित्य सिंधिया मोर्चा संभाले हुए हैं और कांग्रेसी दिग्गजों का बैकअप भी मिल रहा है परंतु कोलारस में ये सारी कवायद बेकार नजर आ रही है। यहां चुनाव ना तो सिंधिया और शिवराज के बीच दिखाई दे रहा है और ना ही भाजपा और कांग्रेस के बीच। यहां मतदाता दोनों प्रत्याशियों को देख रहा है। हालात यह हैं कि कांग्रेस प्रत्याशी महेन्द्र यादव के साथ उनका यादव कुनबा नहीं है जबकि भाजपा प्रत्याशी देवेन्द्र जैन से भाजपा का पारंपरिक वोट बैंक वैश्य और ब्राह्मण नाराज है। 

महेन्द्र यादव का विरोध, समाज नेता मानने को तैयार नहीं
कोलारस से विधायक तो रामसिंह यादव थे परंतु विधायकी उनके बेटे महेन्द्र सिंह यादव ने की। कहा जा रहा है कि वो जरूरतमंद किसानों की मजबूरी का फायदा भी उठाया करते थे। यादव समाज में यहां रामसिंह यादव के अलावा बैजनाथ यादव और लाल सिंह यादव नेता हुआ करते थे। तीनों के बीच चुनावी समय में एकजुटता दिखाई दे जाती थी परंतु इस बार ऐसा नहीं हो रहा है। यहां यादवों की दूसरी पीढ़ी सक्रिय हो गई है और यादव समाज महेन्द्र यादव को अपना नेता मानने के लिए तैयार नहीं है। जो किसान महेन्द्र यादव से पीड़ित हैं, वो नाराज भी हैं। उनके पास अच्छा मौका है। सरकारी कर्मचारी वैसे तो भाजपा से नाराज है, परंतु महेन्द्र यादव से भी खुश नहीं है। यह कहना मुश्किल होगा कि इस बार महेन्द्र यादव को यादवों का थोकबंद वोट मिलेगा। बसपा प्रत्याशी मैदान में नहीं है, फायदा कांग्रेस को होना चाहिए परंतु फिलहाल ऐसी कोई लहर दिखाई नहीं दे रही है। 

देवेन्द्र जैन ने 3 साल शोक मनाया, अब जनता चुप हो गई
भाजपा ने यहां से देवेन्द्र जैन को प्रत्याशी बनाया है। देवेन्द्र जैन पहले भी कोलारस से विधायक रह चुके हैं। उनका कार्यकाल लोग भूले नहीं है। गांव गलियों में किस्से सुनाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि शाम के बाद विधायक देवेन्द्र जैन नए अवतार में आ जाते थे। भाजपा प्रत्याशी की व्यक्तिगत रुचि और उनके छोटे भाई जितेन्द्र जैन गोटू की 2 टूक बयानबाजियां लोगों का अच्छे से याद हैं। 2013 में जब देवेन्द्र जैन चुनाव हारे तो 3 साल तक उन्होंने कोलारस की जनता से बात तक नहीं की। लोगों के दुखदर्द नहीं सुने। शायद यही कारण है कि अब कोलारस की जनता चुप है। कोलारस शहर की बात करें तो यहां का वैश्य मतदाता काफी नाराज है। वो भाजपा का पारंपरिक वोट है परंतु इस बार पाला बदल सकता है। कोलारस का ब्राह्मण समाज भी देवेन्द्र जैन से नाराज है। कहा जाता है कि नगरपालिका के चुनाव में भाजपा के ब्राह्मण प्रत्याशी को हराने में देवेन्द्र जैन की भी भूमिका थी। उन्होंने कोलारस में किसी भी चुनाव में भाजपा प्रत्याशी का साथ नहीं दिया। 

दोनों को क्रॉस वोटिंग और भितरघात का खतरा
यदि आज वोटिंग होती है तो भाजपा और कांग्रेस दोनों प्रत्याशियों को क्रॉस वोटिंग और भितरघात का खतरा है। कोलारस में सामान्यत: प्रत्याशी घोषित होते ही उसके वोट भी गिन लिए जाते थे परंतु इस बार ऐसा नहीं है। नाराजगी दोनों के प्रति है। क्रॉस वोटिंग होगी, इसमें कोई दो राय नहीं है। भितरघात भी होगा ही। भाजपा इसे रोकने की काफी कोशिश कर रही है। ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी भितरघात रोकने का अच्छा अनुभव है पंरतु इस बार दोनों सफल होंगे कहना मुश्किल है। जिस हाथ में भाजपा का झंडा है, वही देवेन्द्र जैन को नुक्सान पहुंचा सकता है और जिसके घर पर सबसे ऊंचा कांग्रेस का झंडा लगा है, वही महेन्द्र को नेता मानने तैयार नहीं है। कुल मिलाकर जो डैमेज कंट्रोल कर लेगा, वही जीत जाएगा। जीत का अंतर काफी कम होगा। 

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