INDORE के संभ्रांत परिवार का बेटा ठग निकला, गिरफ्तार | CRIME NEWS

Saturday, February 24, 2018

इंदौर। विदेश में नौकरी का झांसा देकर युवक-युवतियों को ठगने वाला आरोपी एमबीए कर चुका है, लेकिन नौकरी नहीं मिलने से वह जालसाज बन गया। उसके पिता रिटायर्ड अधिकारी है। मां अधिकारी, जबकि पत्नी बैंक मैनेजर है। तुकोगंज पुलिस ने गुरुवार दोपहर आरोपी सुबोध पंत को साउथ तुकोगंज स्थित होटल से गिरफ्तार किया था। वह अन्य युवकों को ठगने की फिराक में मीटिंग कर रहा था।

आरोपी के खिलाफ जयदीप नामदेव निवासी जीवनदीप कॉलोनी, रविशंकर श्रीवास्तव, तरुणकुमार पटेल, प्रवीणकुमार,अवशीष सिंह, अजीतकुमार पांडे, फराज खान, प्रशांत शर्मा, एहतेशाम, शुभम श्रीवास्तव ने धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई है। पीड़ितों ने पुलिस को बताया कि 12 जुलाई 2017 को आरोपी ने कॉल कर कहा कि वह सिडनी, दुबई, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, कनाड़ा सहित अन्य देशों में वोडाफोन व अन्य मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी दिलवा सकता है। आरोपी ने सभी से लाखों रुपए लिए और फरार हो गया।

25 लोगों से 40 लाख से अधिक की धोखाधड़ी
टीआई राजकुमार यादव के मुताबिक आरोपी ने बताया वह करीब छह महीने से ठगी कर रहा है। करीब 25 लोगों से 40 लाख से अधिक की धोखाधड़ी कर चुका है। उसका एसबीआई में खाता है। पुलिस स्टेटमेंट निकाल रही है। उसके पिता रमेशचंद्र पंत पोस्ट ऑफिस से रिटायर हुए हैं। जबकि मां उषा राज्य सूचना आयोग में अधिकारी हैं।

पत्नी श्रुति परदेशीपुरा स्थित एक्सिस बैंक में मैनेजर है। हालांकि उसकी हरकतों से पत्नी भी परेशान है। उसने तलाक का केस दायर कर रखा है। टीआई के मुताबिक आरोपी को रिमांड पर लिया है। उसने कई युवकों के फर्जी नियुक्ति पत्र और अन्य दस्तावेज बनाकर दिए थे। उसका लैपटॉप और दस्तावेज जब्त किए जाना हैं।

खुद ही जारी कर दिया आस्ट्रेलिया सहित कई देशों का फर्जी वीजा 
विदेश में नौकरी पर जाने के लिए वहां का वीजा अनिवार्य होता है। इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया होती है। इसके बाद ही संबंधित देश की हाई कमीशन वीजा ग्रांट जारी करती है। सुबोध ने लोगों से रुपए लेकर उन्हें खुद ही वीजा जारी कर दिए। इंदौर के 12 लोगों को जो वीजा दिए गए हैं उनमें सिर्फ लोगों की व्यक्तिगत जानकारी अलग है। वीजा से जुड़ी बाकी की तमाम जानकारियां एक जैसी हैं।आस्ट्रेलियन हाई कमीशन और भारत सरकार के विदेश मंत्रालय को ईमेल भेजकर पीड़ितों ने इसकी सत्यता जांची तो पता चला कि यह भी फर्जी है। एक ही एप्लीकेशन आईडी और वीजा ग्रांट नंबर से कई लोगों को फर्जी वीजा जारी किए हैं। 

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