HEALTH INSURANCE: भाजपा के सीएम ही पीएम मोदी के साथ नहीं | NATIONAL NEWS

27 February 2018

नई दिल्ली। केंद्र सरकार की नई महत्त्वाकांक्षी स्वास्थ्य बीमा योजना के क्रियान्वयन की राह आसान नहीं दिखाई दे रही है। गैर-भाजपा शासित राज्यों साहित कई दूसरे राज्य इस योजना के लिए अपनी मौजूदा स्वास्थ्य योजनाएं बंद नहीं करना चाहते हैं। मोदी के अपने गृहराज्य गुजरात में भी इसे लेकर कोई अच्छे संकेत नजर नहीं आ रहे हैं। दरअसल, कई राज्यों में पहले से ही स्वास्थ्य बीमा योजनाएं चल रहीं हैं। राज्य सरकारों को मोदी की योजना में 40 प्रतिशत खर्चा करना है। राज्य नहीं चाहते कि वो अपनी योजनाएं बंद करके मोदी की योजना लागू करें। 

1 फरवरी को पेश बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 50 करोड़ लोगों के लिए स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू करने की घोषणा की थी, जिसे उन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना का नाम दिया और बाद में इसे 'मोदीकेयर' (ओबामाकेयर की तर्ज पर) कहा जाने लगा। इस योजना के तहत आर्थिक रूप से पिछड़े 10 करोड़ परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये का बीमा दिया जाएगा। राज्यों को उनकी अपनी योजनाओं के साथ इसे चलाने या दोनों का विलय करने या केवल 'मोदीकेयर' चलाने के विकल्प दिए गए हैं। हालांकि इसके बाद भी राज्य तैयार नहीं हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृह राज्य गुजरात भी 'मोदीकेयर' को लेकर अधिक उत्साह नहीं दिखा रहा है। गुजरात के उप मुख्यमंत्री नितिन भाई पटेल कहते हैं, 'राज्य सरकार की मौजूदा योजना के तहत दिए जा रहे लाभ वापस लेने या इनमें कटौती करने की कोई योजना नहीं है।' राज्यों को मोदीकेयर पर आने वाली कुल लागत में 40 प्रतिशत हिस्से का वहन करना है, लेकिन वे दोनों योजनाएं चलाने के लिए हामी भरते नहीं दिख रहे हैं। राज्यों का कहना है कि इससे लाभार्थियों को दोहरा लाभ मिलेगा और उन्हें दोनों योजनाओं के खर्च का वहन करना होगा। राज्य योजनाओं के लाभार्थी 'मोदीकेयर' में अधिक बीमित रकम को देखते हुए इसमें संभवत: शामिल होंगे। ज्यादातर राज्य प्रति परिवार सालाना 3 लाख रुपये तक बीमा दे रहे हैं। 

राज्य अपनी योजनाओं का 'मोदीकेयर' में विलय करने के लिए भी तैयार नहीं है। इसकी वजह यह है कि 'मोदीकेयर' में उन कई श्रेणियों का जिक्र नहीं है, जो 24 राज्य सरकारों की बीमा योजनाओं में शामिल हैं। उदाहरण के लिए केंद्र की नई योजना 2011 की सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना के तहत चिह्निïत गरीब लोगों के लिए ही है। हालांकि गुजरात अपनी मुख्यमंत्री अमृतम योजना के तहत सालाना 2,50,000 रुपये से कम आय वाले सभी लोगों को बीमा लाभ देता है। 2012 में शुरू हुई इस योजना में पत्रकारों के अलावा द्वितीय और तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों को भी लाभ दिए जा रहे हैं। 

महाराष्ट्र सरकार किसान सहित अपनी 85 प्रतिशत आबादी को स्वास्थ्य बीमा लाभ दे रही है, वहीं राजस्थान की भामाशाह स्वास्थ्य योजना में स्वास्थ्यकर्मियों और दूसरे लोगों सहित गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर करने वाले लोगों को बीमा सुविधा मिल रही है। पश्चिम बंगाल पहले ही 'मोदीकेयर' से किनारा करने का ऐलान कर चुका है। राज्य सरकार कर्मियों, स्वयं सहायता समूहों, पुलिस, ग्राम पंचायतों, आपदा प्रबंधन टीमों आदि को स्वास्थ बीमा देती है। ऐसे समय में जब बीमा दावा का अनुपात अधिक है, इन श्रेणियों को अलग रखना राज्य सरकारों के लिए मुनासिब नहीं होगा।  यही वजह है कि कांग्रेस के आखिरी बचे गढ़ कर्नाटक में राज्य सरकार ने राज्य के सभी 1.43 परिवारों को स्वास्थ बीमा लाभ देने की घोषणा की है। 

राज्य में इसी साल चुनाव होने वाले हैं। कर्नाटक के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री के आर रमेश कुमार ने कहा, 'हमारा मॉडल आश्वासन आधारित है, जबकि उनका मॉडल (मोदीकेयर) बीमा है। आश्वासन के तहत हम निष्ठïापूर्वक वादे निभाते हैं। इसी वजह से हमने मेडिकल इस्टैब्लिशमेंट ऐक्ट में संशोधन किए हैं।' योजना की एकरूपता भी 'मोदीकेयर' की राह में एक बाधा साबित हो सकती है। इस समय राज्य तीन मॉडलों-लाभार्थियों को सीधे भुगतान, ट्रस्ट, जहां संबंधित सरकार स्वास्थ्य बीमा देने के लिए एक राष्ट्रीय स्वास्थ कंपनी गठित करती है, और सबसे कम बोली देने वाले को अनुबंध का आवंटन- में एक का पालन करते हैं। गुजरात लाभार्थियों को सीधे भुगतान करता है और राज्य का कहना है कि इसने अब तक आए सभी दावे निपटाए हैं। राजस्थान और महाराष्ट्र ने राज्य बीमा कंपनियों का गठन किया है। 

'मोदीकेयर' राज्यों को पसंद के आधार पर कोई भी मॉडल चुनने का विकल्प देता है, लेकिन उन्हें एक बीमा कंपनी चुनने की प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी होगी। हालांकि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस का मानना है कि 'मोदीकेयर' से राज्यों का खर्च कम हो जाएगा। फड़णवीस ने कहा, 'केंद्र की इस योजना से हमें बीमित रकम बढ़ाने और खर्च कम करने में मदद मिलेगी। हम दोनों योजनाएं एक दूसरे की पूरक बनाएंगे। हमारे खर्च के एक हिस्से का वहन केंद्र की यह योजना करेगी।'

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