पढ़िए मप्र कांग्रेस में सीएम कैंडिडेट का मुद्दा क्यों अटक गया | MP POLITICAL NEWS

Tuesday, January 23, 2018

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव का वक्त आने को ही है। तैयारियां शुरू हो गईं हैं। BJP का हर कार्यक्रम अब चुनाव को ध्यान में रखकर आयोजित किया जा रहा है। इसके इतर CONGRESS अब तक CM CANDIDATE का नाम फाइनल करना तो दूर, यह तक तय नहीं कर पाई है कि वो अगला चुनाव चेहरा घोषित करके लड़ेगी या बिना चेहरे के। दावेदार 2 ही हैं, KAMAL NATH और JYOTIRADITYA SCINDIA। बाकी 2 सिर्फ सपने देख रहे हैं। सोनिया गांधी चाहतीं हैं कि कमलनाथ को अवसर दिया जाना चाहिए, जबकि राहुल गांधी ज्योतिरादित्य सिंधिया के पक्ष में हैं। जब मामला गांधी परिवार में अटक गया तो एक नई जुगत लगाई गई और इसी ने नए मुद्दे को जन्म दे दिया। 

दीपक बावरिया ने की रायशुमारी 
राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश राज्य के प्रभारी महासचिव मोहन प्रकाश को हटाकर DEEPAK BAWARIA को नियुक्त किया। राहुल ने बावरिया को भेजा था कि वो राज्य के सभी प्रभावशाली नेताओं से रायशुमारी करके बताएं कि क्या उचित होगा। रायशुमारी में प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव, अर्जुन सिंह के बेटे एवं नेताप्रतिपक्ष अजय सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद कांतिलाल भूरिया और राहुल की करीबी मीनाक्षी नटराजन का कहना है कि मप्र में कांग्रेस को बिना चेहरे के चुनाव लड़ना चाहिए। कहा जा रहा है कि दिग्विजय सिंह भी यही चाहते हैं। 

कमलनाथ अकेले पड़े, विधायकों ने सिंधिया का नाम लिया
इस ओपिनियन पोल के बाद कमलनाथ अकेले पड़ गए। सिर्फ सत्यव्रत चतुर्वेदी अकेले ऐसे नेता रहे जिन्होंने ज्योतिरादित्य सिंधिया को सीएम कैंडिडेट घोषित करने की वकालत की। सोनिया के करीबी सुरेश पचौरी ने खुद को विवाद से अलग रखते हुए सब कुछ आलाकमान पर छोड़ दिया। अब बात करते हैं मप्र कांग्रेस के तीसरे कैडर के नेताओं की। इसमें कांग्रेस के सभी विधायक और उनके समकक्ष नेता आते हैं। विधायकों और छोटे नेताओं ने सिंधिया के नाम पर सहमति जताई लेकिन क्षेत्रीय क्षत्रपों ने तत्काल लामबंदी की और तीसरे कैडर के ज्यादातर नेताओं ने बयान बदल दिए। 

कांग्रेस के भीतर DIGVIJAY SINGH एक्टिव हैं
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दिग्विजय सिंह अपनी नर्मदा यात्रा पर जरूर हैं परंतु कांग्रेस पार्टी की अंदरूनी सियासत में वो पूरी तरह शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस मुद्दे पर चर्चा के लिए वरिष्ठ वकील और सांसद विवेक तनखा ने आलाकमान और दिग्विजय के बीच पुल का काम किया। उन्होंने दिग्विजय से उनकी यात्रा के दौरान 14 बार जाकर मुलाकात की। 

सत्यव्रत के बयान ने राहुल गांधी को रोक दिया
प्रभारी महासचिव दीपक बावरिया की रिपोर्ट के आधार पर राहुल ने मन बना लिया था कि ओपिनियन पोल के साथ ही आगे बढ़ेंगे और चेहरा घोषित नहीं करेंगे। तभी सिंधिया खेमे के SATYAVRAT CHATURVEDI ने बड़ा बयान देकर एक बार फिर मसले को हवा दे दी। सत्यव्रत का दो टूक कहना है कि दिग्विजय कुछ भी कहें, लेकिन पार्टी को जल्दी से जल्दी सिंधिया को सीएम का उम्मीदवार घोषित करना चाहिए और कमलनाथ या उनकी पसंद के किसी नेता को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त करके चुनाव में उतरना चाहिए। यही सफलता का मन्त्र है। सत्यव्रत कहते हैं कि पिछले चुनाव की गलती पार्टी ना दोहराए। जब अनमने ढंग से चुनाव से एक महीने पहले सिंधिया को कैंपेन कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया गया और ये सन्देश देने की कोशिश की गई कि वो सीएम उम्मीदवार हैं, लेकिन वो सन्देश जनता तक पहुंचा ही नहीं।

कमलनाथ और सिंधिया को कोई आपत्ति नहीं
इधर सीएम कैंडिडेट के दावेदार कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया को एक दूसरे से कोई आपत्ति नहीं है। वो केवल यह चाहते हैं कि चेहरा घोषित कर दिया जाए ताकि जनता के सामने स्थिति स्पष्ट हो। कमलनाथ बयान दे चुके हैं कि उन्हे किसी नाम से कोई आपत्ति नहीं है जबकि सिंधिया भी कह चुके हैं कि वो राहुल गांधी के हर फैसले के साथ हैं। दोनों ने एक दूसरे के प्रति कभी कुछ ऐसा नहीं किया जिसे दोनों के रिश्तों में कड़वाहट का नाम दिया जा सके। 

हाईकमान कंफ्यूज
कुल मिलाकर मध्य प्रदेश में 15 सालों से सत्ता से बाहर कांग्रेस अभी तक खुद फैसला नहीं कर पा रही है। खास बात तो यह है कि कांग्रेस के तमाम नेता यह भी कहते हैं कि मप्र में कांग्रेस तभी जीत सकती है जब फैसले समय रहते हो जाएं। अब राहुल गांधी पर भारी दवाब है। एक तरफ फैसला समय रहते करना है और दूसरी तरफ कोई गलत फैसला भी नहीं करना है, कि बाद में पछताना पड़े। 

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