सपाक्स के प्रांतीय सम्मेलन में बनेगी नई रणनीति | MP NEWS

Friday, January 5, 2018

भोपाल। दिनांक 7 जनवरी 2018 को सपाक्स संस्था का राज्य स्तरीय सम्मेलन सुबह 11.00 बजे से नार्मदेय मंदिर भवन, भोपाल में आयोजित है। सम्मेलन में सभी जिलों के संस्था पदाधिकारियों के साथ-साथ प्रत्येक ज़िले के प्रतिष्ठित सामाजिक प्रतिनिधि भी भाग लेंगे।पदोन्नति में आरक्षण की लड़ाई संस्था विगत मई 16 से सर्वोच्च न्यायालय में लड़ रही है। मप्र सरकार की ज़िद तथा पक्षपातपूर्ण रवैये के कारण प्रदेश के शासकीय तंत्र में अराजकता की स्थिति निर्मित हो चुकी है। 

जहाँ एक ओर हज़ारों अधिकारी/ कर्मचारी बिना पदोन्नति के लाभ के सेवा निवृत हो चुके हैं वहीं ख़ाली हो रहे पदों पर सरकार अनुसूचित जाति/ जनजाति के उन्हीं सेवकों को प्रभार दे रही है, जिन्हें वर्ष 2002 के असंवैधानिक नियमों से पदोन्नत किया गया एवं जिन्हें मान उच्च न्यायालय के निर्णय अनुसार पदावनत किया जाना है। यह मान न्यायालय के निर्णय की खुली अवहेलना है। अपनी न्यायिक जीत के बावजूद सपाक्स वर्ग के शासकीय सेवक अपने वाजिब अधिकारों से सरकार द्वारा वंचित किये जा रहे हैं।

संस्था द्वारा मान मुख्यमंत्री, मान मंत्रीगणों, मान मुख्य सचिव व अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष वास्तविकताओं को बारम्बार रखे जाने के बावजूद शासन द्वारा समानता के सारे दरवाज़े बंद रख सपाक्स वर्ग से लगातार भेदभाव और अन्याय जारी रखा गया है। स्वयं शासन द्वारा मान सर्वोच्च न्यायालय में अपील के बावजूद शासन ने प्रकरण का निर्णय जल्दी करवाने की कोशिशों की बजाय सदा निर्णय में विलम्ब मात्र की कोशिश की है।

मात्र पदोन्नति में आरक्षण ही नहीं अन्य सभी नीतियों को बनाने में भी शासन मात्र और मात्र अनुसूचित जाति/ जनजाति के हितों को ही देखता है। नीतियाँ चाहे युवाओं से सम्बंधित हों या अन्य सामाजिक मुद्दों को लेकर। प्रदेश में बेरोज़गारी चरम पर है। संविदा और ठेका प्रथा पर शासकीय कार्य की व्यवस्था पढ़े लिखे युवाओं का शोषण है जो अकुशल मज़दूर से भी कम दैनिक आय पर कार्य करने को मजबूर हैं, बावजूद इसके कि शासन के लगभग 2.75 लाख स्वीकृत पद ख़ाली पड़े हैं। सरकार इन ख़ाली पदों में से सिर्फ़ अनुसूचित जाति/ जनजाति पदों को बैक्लॉग बताकर भरने को प्राथमिकता दे रही है, जो अन्य समाजों के साथ अन्याय है।

प्रदेश के शासकीय तंत्र का हर हिस्सा शोषण से त्रस्त है। चाहे विकलांग हो, संविदा शिक्षक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, स्वास्थ्यकर्मी अथवा उच्च शिक्षा में संलग्न अतिथि शिक्षक। सम्मेलन में संस्था अपने उद्देश्यों में विस्तार देते हुए सर्वहित के उन सामाजिक मुद्दों को भी चिंहांकित करेगी जिन पर समाज और युवा अन्याय के शिकार हैं।

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