मुस्लिम बहुल राष्‍ट्र की मुद्रा पर भगवान श्रीगणेश का फोटो | INTERNATIONAL NEWS

Sunday, November 19, 2017

नई दिल्‍ली। यदि कोई भारत में यह प्रस्तावित कर दे कि भारतीय मुद्रा नोट पर महात्मा गांधी नहीं बल्कि भगवान राम, कृष्ण, शिव का गणेश का फोटो होना चाहिए तो क्या होगा, लेकिन दुनिया का एक मुस्लिम बहुल देश ऐसा भी है जहां की मुद्रा पर सम्मान के साथ भगवान श्रीगणेश का फोटो छापा जाता है। इंडोनेशिया को हम सभी एक मुस्लिम बहुल राष्‍ट्र के रूप में जानते हैं लेकिन इससे जुड़े कई ऐसे दिलचस्‍प पहलू हैं, जिन्‍हें हम नहीं जानते हैं। ऐसा ही एक पहलू यह भी है कि मुस्लिम बहुल राष्‍ट्र होने के बावजूद यहां की करेंसी पर हिंदुओं के पूजनीय ‘गणपति’ अंकित हैं। 

यहां के चौराहों पर आज भी कृष्ण-अर्जुन संवाद, घटोत्कच, भीम, अर्जुन की प्रतिमाएं मिलती हैं। यह सुनने में भले ही कुछ अटपटा और पहली नजर में विश्‍वास न कर पाने वाला तथ्‍य हो, लेकिन यह सच है। इंडोनेशिया के कई और ऐसे ही बेहद दिलचस्‍प पहलू हैं जो आपको हैरान कर देंगे।

17508 द्वीपों वाला है ये देश
इंडोनेशिया दक्षिण पूर्व एशिया और ओशिनिया में स्थित एक देश है। करीब 17508 द्वीपों वाले इस देश की जनसंख्या लगभग 23 करोड़ है। यह दुनिया का चौथा सबसे अधिक आबादी और दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी बौद्ध आबादी वाला देश है। इसकी जमीनी सीमा पापुआ न्यू गिनी, पूर्वी तिमोर और मलेशिया के साथ मिलती है, जबकि अन्य पड़ोसी देशों में सिंगापुर, फिलीपींस, ऑस्ट्रेलिया और भारत का अंडमान और निकोबार द्वीप समूह क्षेत्र शामिल है।

पुराणों में इसका नाम था दीपांतर
सुमात्रा और बाली, इंडोनेशिया के द्वीप हैं। इस पूरे क्षेत्र में सात शताब्दियों तक (छठी से 13वीं ईसा) श्री विजय साम्राज्य का एकछत्र राज्य रहा। उसका प्रभाव आंध्र के नागपट्टीनम तक था। इंडोनेशिया का तो मूल नाम ही हिंद-एशिया से निकला है। इतना ही नहीं भारत के पुराणों में भी इसका जिक्र ‘दीपांतर’ भारत अर्थात सागर पार भारत के रूप में किया गया है। यहां यह नाम आज भी काफी प्रचलित है। यहां की करेंसी पर गणपति का चित्र अंकित होने के साथ-साथ आपको यह जानकर भी हैरत होगी कि यहां के मुसलमानों के संस्कृत नाम होते हैं। इंडोनेशिया के प्रथम राष्ट्रपति सुकर्ण थे। उनकी बेटी का नाम मेघावती सुकर्णपुत्री था और यह नाम ओडिशा के महानायक बीजू पटनायक ने रखा था।

सबसे पुरानी सभ्‍यता बुनी और मुनी
यहां पर इन सब प्रतिमाओं का होना कोई अनूठी बात नहीं है। दरअसल, ईसा पूर्व चौथी शताब्दी से ही इंडोनेशिया द्वीपसमूह एक महत्वपूर्ण व्यापारिक क्षेत्र रहा है। बुनी अथवा मुनि सभ्यता इंडोनेशिया की सबसे पुरानी सभ्यता है। चौथी शताब्दी ईसा पूर्व तक ये सभ्यता काफी उन्नति कर चुकी थी। ये हिंदू धर्म मानते थे और ऋषि परम्परा का अनुकरण करते थे। यहां के चौराहों पर आज भी कृष्ण-अर्जुन संवाद, घटोत्कच, भीम और अर्जुन की प्रतिमाएं मिलती हैं।

ये थे यहां के राजवंश
यहां के राजवंश इस बात की तसदीक करते हैं। जिसमें श्रीविजय राजवंश, शैलेन्द्र राजवंश, सञ्जय राजवंश, माताराम राजवंश, केदिरि राजवंश, सिंहश्री, मजापहित साम्राज्य का नाम शामिल है। अगले दो हजार साल तक इंडोनेशिया एक हिन्दू और बौद्ध देशों का समूह रहा। श्रीविजय के दौरान चीन और भारत के साथ व्यापारिक संबंध थे। स्थानीय शासकों ने धीरे-धीरे भारतीय सांस्कृतिक, धार्मिक और राजनीतिक प्रारूप को अपनाया और कालांतर में हिंदू और बौद्ध राज्यों का उत्कर्ष हुआ।

दूसरे विश्‍वयुद्ध के बाद हुआ आजाद
इंडोनेशिया का इतिहास विदेशियों से प्रभावित रहा है, जो क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों की वजह से खींचे चले आए। मुस्लिम व्यापारी अपने साथ इस्लाम लाए और यूरोपिय शक्तियां यहां के मसाला व्यापार में एकाधिकार को लेकर एक दूसरे से लड़ीं। साढ़े तीन सौ साल के डच उपनिवेशवाद के बाद द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इस देश को स्वतंत्रता हासिल हुई।

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