गुजरात कांग्रेस में खुली बगावत, फायर फाइटिंग टीम भेजी: AICC

Friday, November 24, 2017

नई दिल्ली। खबर गुजरात से आ रही है। विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण से नाराज कई दिग्गज कांग्रेसी नेता पार्टी छोड़कर जा रहे हैं। सूरत में हालात सबसे चिंताजनक बन गए हैं। आसानी से जीत तक पहुंच चुकी कांग्रेस अब यहां संकट में है। एक साथ 3 बड़े नेताओं ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। हालात यह हैं कि ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी यानी AICC ने 3 रूठे नेताओं को मनाने के लिए 4 बड़े नेताओं की टीम भेजी है जिसे 'फायर फाइटिंग टीम' नाम दिया गया है। सूरत भाजपा और कांग्रेस के लिए प्रति​ष्ठा का प्रश्न बन चुका है। अमित शाह यहां 2 दिन रुके थे और कई मोहरे फिट करके गए हैं। 

सूरत में कांग्रेस गंभीर दिक्कत में 
न्यूज एजेंसी से बातचीत में कांग्रेस के एक सीनियर लीडर ने गुजरात कांग्रेस में टिकट बंटवारे को लेकर पार्टी नेताओं में नाराजगी की बात मानी। उन्होंने कहा- हमारे लिए हर कार्यकर्ता अहम है। कांग्रेस के लिए कारोबारियों का गढ़ सूरत सबसे खास है और अब यहीं उसे गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दिक्कत किसी एक नेता को लेकर होती तो भी ठीक था लेकिन यहां तीन नेताओं ने पार्टी छोड़ दी। सूरत में हालात बेकाबू ना हो जाएं इसलिए, कांग्रेस हाईकमान ने यहां बड़े नेताओं की एक टीम भेजी। इसे फायर फाइटिंग टीम कहा जा रहा है।

कौन हैं कांग्रेस की टीम में?
इस टीम में चार नेताओं को शामिल किया गया है। ये हैं गुलाम नबी आजाद, मुकुल वासनिक, तरुण गोगोई और बीके. हरिप्रसाद। राज्यसभा सांसद आजाद को अहमदाबाद, असम के पूर्व सीएम गोगोई को उत्तर गुजरात, पूर्व केंद्रीय मंत्री मुकुल वासनिक को सौराष्ट्र और बीके. हरिप्रसाद को दक्षिण गुजरात की जिम्मेदारी दी गई है।

राजपूत कांग्रेस छोड़ चुके हैं, अब मुस्लिम भी नाराज
पाटीदारों को खुश करने में लगी कांग्रेस के लिए उसके ही एक मुस्लिम नेता ने भी परेशानी खड़ी कर दी है। गुजरात कांग्रेस के सेक्रेटरी फिरोज मलिक ने कहा- पार्टी हाईकमान ने हमें भरोसा दिलाया था कि मुस्लिमों को भी बराबरी से टिकट दिए जाएंगे। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। धनसुख राजपूत और ज्योति सोजित्रा पहले ही पार्टी छोड़ चुके हैं। ये दोनों कांग्रेस के बड़े नेताओं में गिने जाते हैं। इनके साथ कई कार्यकर्ता भी पार्टी के रवैये से नाराज बताए गए हैं।

सूरत से कांग्रेस को उम्मीद
सूरत गुजरात के कपड़ा कारोबारियों का गढ़ है। यहां राजपूत और पाटीदार काफी हैं। जीएसटी को लेकर यहां के कारोबारियों में बीजेपी के खिलाफ नाराजगी देखी गई है। कांग्रेस इसे कैश करना चाहती है। लेकिन, अब यहां जिस तरह के हालात कांग्रेस के सामने हैं, उन्हें देखकर वो परेशान है। 

सूरत कितना अहम है
इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ दिन पहले अमित शाह यहां दो दिन रुके थे और यहां के तमाम कारोबारियों और लोकल लीडर्स से बातचीत की थी। शाह ने उन्हें कारोबारी दिक्कतें दूर करने का भरोसा भी दिलाया था।

उत्तर भारतीयों को टिकट क्यों नहीं दिए?
धनसुख राजपूत को कांग्रेस के बड़े नेताओं में गिना जाता है और अब वो पार्टी छोड़ चुके हैं। उन्होंने कहा- गुजरात में करीब 15 लाख उत्तर भारतीय हैं। लेकिन, कांग्रेस ने इनके किसी भी नेता को टिकट नहीं दिया। 

पाटीदार नेताओं को कांग्रेस ने टिकट दिए हैं लेकिन हार्दिक पटेल ने कहा था कि उन्होंने कांग्रेस से किसी टिकट की डिमांड नहीं की। बता दें कि गुजरात में 9 और 14 दिसंबर को वोटिंग होनी है। नतीजे हिमाचल प्रदेश के साथ ही 18 दिसंबर को आएंगे।

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