ममता के अति उत्साह पर कोर्ट का हथौड़ा

Updesh Awasthee
राकेश दुबे@प्रतिदिन। कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले के बाद फिर ममता बनर्जी ने अपना रुख पलटा है, अब त्यौहार शांति पूर्वक हो इसे अपना मुख्य उद्देश्य बता रही हैं। पहले उन्हें यह नहीं सूझा था। हाईकोर्ट ने विजयादशमी पर प्रतिमा विसर्जन से जुड़े मामले में पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार के फैसले को पूरी तरह पलटते हुए उसे बड़ा झटका दिया है। इस बार 30 सितंबर को विजयादशमी और 1 अक्टूबर को मोहर्रम पड़ रहा है। कानून-व्यवस्था पर संभावित खतरे की बात कहते हुए ममता सरकार ने 30 सितंबर यानी दशमी को रात 10 बजे के बाद और एक अक्टूबर को पूरी तरह प्रतिमा विसर्जन पर रोक लगा दी थी। सरकार के इसी फैसले के खिलाफ दायर तीन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने मोहर्रम समेत हर दिन दोपहर 12 बजे तक प्रतिमा विसर्जन की इजाजत तो दी ही, साथ में सरकार को कड़ी फटकार भी लगाई। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि सरकार के पास अधिकार है, इसका मतलब यह नहीं कि वह अधिकारों का बेजा इस्तेमाल कर सकती है। बिना किसी ठोस वजह के नागरिकों के अधिकार नहीं छीने जा सकते।

भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में पर्व-त्योहारों का एक-दूसरे से टकराना कोई नई बात नहीं है। आम आबादी एक-दूसरे की परंपराओं और रीति-रिवाजों का सम्मान करते हुए जीने की आदी है। इसमें आने वाली छोटी-मोटी अड़चनें जिला प्रशासन के स्तर पर ही हल होती रही हैं। अमूमन तो जिला प्रशासन को भी हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं होती लेकिन किसी तरह के तनाव की आशंका होने पर स्थानीय पुलिस दोनों समुदायों के प्रमुख लोगों के बीच बैठक और बातचीत करवा कर ऐसा रास्ता निकाल लेती है जो सबको मंजूर होता है। यह मानने का कोई कारण नहीं कि मोहर्रम के जुलूस और मूर्ति विसर्जन के रूट तथा समय को लेकर ऐसी कोई व्यवस्था नहीं हो सकती थी। इसका प्रयास किए बगैर सीधे सरकार के स्तर पर प्रतिमा विसर्जन पर रोक लगा दी थी। 

इससे सरकार ने इस धारणा को जड़ जमाने का मौका दिया कि ममता बनर्जी मुस्लिम वोट बैंक के तुष्टीकरण का खेल खेल रही हैं। इससे एक धार्मिक और सांस्कृतिक मामले में बेवजह गंदी राजनीति शुरू हो गई। अच्छा हुआ कि हाईकोर्ट के सख्त रुख से यह मामला और बिगड़ने से बच गया। उम्मीद करें कि हमारी सरकारें आगे से ऐसे मामलों में व्यर्थ की सक्रियता नहीं दिखाएंगी। ममता सरकार  के साथ यह उन सरकारों के लिए भी सबक है, जो अति उत्साह में आकर ऐसे निर्णय लेती है, जिससे किसी एक वर्ग का तुष्टिकरण होता है।
श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।
संपर्क  9425022703        
rakeshdubeyrsa@gmail.com
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