कैसे करें श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की पूजा, पूरी विधि यहां पढ़िए

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पुराणों के मुताबिक भगवान श्री कृष्ण ने भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अवतार लिया था। इसके बाद से इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाने लगा। हिंदू संप्रदाय के लोग कृष्ण जन्माष्टमी इस बार 14 अगस्त मनाएंगे। भारत सहित पूरे विश्व में भगवान श्री कृष्ण के जन्म के उपलक्ष्य में यह त्योहार मनाया जाता है।हिन्दुओं का सबसे प्रसिद्ध त्योहार जन्माष्टमी को लेकर भक्त बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, लड्डू गोपाल का जन्म भाद्र पद कृष्ण पक्ष अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र वृष राशि मे अर्ध रात्रि को हुआ था. इस त्योहार को भारत में हीं नहीं बल्कि विदेश में भी हिंदू संप्रदाय के लोग पूरी आस्था के साथ मनाते हैं।

इस साल अर्ध रात्रि व्यापिनी अष्टमी तिथि 14 अगस्त 2017 को होगा, सोमवार को 5 बजकर 40 मिनट पर शुरू होगी और 15 अगस्त 2017 3 बजकर 26 मिनट तक होगी। व्यापिनी अष्टमी तिथि 14 अगस्त को होगी, इसी रात को जन्मोत्सव का त्योहार भी बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा। बता दें कि इस वर्ष अष्टमी तिथि में रोहिणी नक्षत्र का अभाव है।

जन्माष्टमी के दिन पूजा के लिए भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति को भी स्थापित किया जाता है। इस दिन उनके बाल रूप के चित्र को स्थापित करने की मान्यता है। जन्माष्टमी के दिन बालगोपाल को झूला झुलाया जाता है। मान्यता है कि जन्माष्टमी के दिन बाल श्रीकृष्ण को स्तनपान कराती देवकी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करना शुभ होता है। जन्माष्टमी के दिन सभी मंदिर रात बारह बजे तक खुले होते हैं। बारह बजे के बाद कृष्ण जन्म होता है और इसी के साथ सब भक्त चरणामृत लेकर अपना व्रत खोलते हैं।

कृष्ण जन्माष्टमी के पूरा दिन भक्त निर्जल उपवास रखते हैं। ऐसे में जरूरी है कि आप कुछ खास बातों का ध्यान रखें। अपनी सेहत के लिए जरूरी है कि एक दिन पहले खूब लि‍क्व‍िड लें और जन्माष्टमी से पिछली रात को हल्का भोजन करें।

जन्माष्टमी के दिन अगर आप व्रत रखने वाले हैं या नहीं भी रखने वाले, तो सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। मन में ईश्वर के नाम का जाप करें। व्रत रखने के बाद पूरे दिन ईश्वर का नाम लेते हुए निर्जल व्रत का पालन करें। रात के समय सूर्य, सोम, यम, काल, ब्रह्मादि को प्रणाम करते हुए पूजा को शुरू करने की मान्यता है।

यह पृष्ठ कृष्ण जन्माष्टमी के समय की जाने वाली श्री कृष्ण पूजा के सभी चरणों का वर्णन करता है। इस पृष्ठ पर दी गयी पूजा में षोडशोपचार पूजा के सभी १६ चरणों का समावेश किया गया है और सभी चरणों का वर्णन वैदिक मन्त्रों के साथ दिया गया है। जन्माष्टमी के दौरान की जाने वाली श्री कृष्ण पूजा में यदि षोडशोपचार पूजा के सोलह (१६) चरणों का समावेश हो तो उसे षोडशोपचार जन्माष्टमी पूजा विधि के रूप में जाना जाता है।
भगवान श्री कृष्ण का ध्यान पहले से अपने सम्मुख प्रतिष्ठित श्रीकृष्ण की नवीन प्रतिमा में करें।

भगवान श्री कृष्ण का ध्यान करने के बाद, श्रीकृष्ण की प्रतिमा के सम्मुख आवाहन-मुद्रा दिखाकर, उनका आवाहन करें। भगवान श्री कृष्ण का आवाहन करने के बाद, उन्हें आसन के लिये पाँच पुष्प अञ्जलि में लेकर अपने सामने छोड़े। भगवान श्री कृष्ण को आसन प्रदान करने के बाद, चरण धोने हेतु जल समर्पित करें। पाद्य समर्पण के बाद, भगवान श्री कृष्ण को अर्घ्य (शिर के अभिषेक हेतु जल) समर्पित करें। आचमन के लिए श्रीकृष्ण को जल समर्पित करें। आचमन समर्पण के बाद, श्रीकृष्ण को जल से स्नान कराएँ। स्नान कराने के बाद, श्रीकृष्ण को मोली के रूप में वस्त्र समर्पित करें। वस्त्र समर्पण के बाद, श्रीकृष्ण को यज्ञोपवीत समर्पित करें।

श्रीकृष्ण को सुगन्धित द्रव्य समर्पित करें।
श्रीकृष्ण के श्रृंगार के लिये आभूषण समर्पित करें।
श्रीकृष्ण को विविध प्रकार के सुगन्धित द्रव्य समर्पित करें।
श्रीकृष्ण को पुष्प समर्पित करें।
बाएँ हाथ में चावल, पुष्प व चन्दन लेकर दाहिने हाथ से श्री कृष्ण की मूर्ति के पास छोड़ें।
श्रीकृष्ण को धूप समर्पित करें।
श्रीकृष्ण को दीप समर्पित करें।
श्रीकृष्ण को नैवेद्य समर्पित करें।
श्रीकृष्ण को ताम्बूल (पान, सुपारी के साथ) समर्पित करें।
श्रीकृष्ण को दक्षिणा समर्पित करें।
श्रीकृष्ण को निराजन (आरती) समर्पित करें।
श्रीकृष्ण को फूल समर्पित करें।
श्रीकृष्ण को नमस्कार करें।
पूजा के दौरान हुई किसी ज्ञात-अज्ञात भूल के लिए श्रीकृष्ण से क्षमा-प्रार्थना करें।
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