मंदसौर में किसानों ने हिंसा नहीं की लेकिन पुलिस ने जिन्हे मारा वो किसान थे: शिवराज सिंह

Friday, June 30, 2017

भोपाल। सीएम शिवराज सिंह ने आज जारी बयान में कहा है कि मंदसौर में जो हिंसा हुई उसमें किसान शामिल नहीं थे। वो हिंसा अफीम तस्करों ने की लेकिन पुलिस की गोलियों से जो मारे गए वो किसान थे। जो मुआवजा दिया गया वो भी सही था। उन्होंने यह भी कहा कि किसान आंदोलन पूरे प्रदेश में नहीं था। केवल कुछ इलाकों में था। सवाल यह है कि जब किसान हिंसा कर ही नहीं रहे थे तो पुलिस ने गोलियां क्यों चलाईं और यदि सीएम यह मानते हैं कि पुलिस ने निर्दोष किसानों पर गोलियां चलाईं हैं तो अब तक गोली चलाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ 302 का मामला दर्ज क्यों नहीं किया गया। 

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज एक प्रायोजित इंटरव्यू में कहा कि जिन लोगों ने आंदोलन की आड़ में हिंसा, पथराव और तोड़फोड़ की हम उन्हें बेनकाब करेंगे। उन्होंनें कहा कि यह आंदोलन रीवा, सागर, ग्वालियर, शहडोल कहीं नहीं था। इंदौर, भोपाल में भी कुछ ही घटनाएं हुईं। इसलिए इसे पूरे प्रदेश का आंदोलन नहीं कह सकते। मंदसौर की परिस्थिति अलग है। वहां का किसान परिश्रमी है। लेकिन वहां पर अफीम का उत्पादन भी होता है। इस कारण कुछ साल पहले तक डोडा चूरा 120 रु. किलो बिकता था। इसे खेत में जलाने के निर्देश दिए गए। इसे नशे के काम में लगे कुछ तत्वों को परेशानी हुई और वे किसानों के पीछे एक्टिव हो गए। इन्हीं ने आंदोलन को हिंसक रूप दे दिया।

निर्दोष किसान मारे गए, मुआवजा सही 
मुख्यमंत्री ने एक सवाल के जवाब में कहा कि एक करोड़ रुपए का मुआवजा देना सही फैसला था। उस दिन मैं बहुत ही व्यथित था। सुरक्षाबलों की गोली से अगर निर्दोषों की जान चली गई तो उन्हें उस समय सहारा देना जरूरी था।

प्रायोजित इंटरव्यू में ये सवाल नहीं हुआ
सीएम के प्रायोजित इंटरव्यु में यह सवाल नहीं किया गया कि यदि किसान हिंसा नहीं कर रहे थे तो फिर पुलिस ने मंदसौर में गोलियां क्यों चलाईं। यदि किसान उपद्रव कर रहे थे तो मुआवजा क्यों दिया और यदि किसान निर्दोष थे तो मौके पर मौजूद बंदूकधारी पुलिसकर्मी और अफसरों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज क्यों नहीं किया गया। तबादले और निलंबन कोई सजा नहीं होती।  यह कानूनी कार्रवाई भी नहीं होती। तीसरा सवाल यह है कि यदि किसान आंदोलन पूरे प्रदेश में नहीं था तो किसान नेताओं की गिरफ्तारियां क्यों करवाईं। सबसे बड़ा सवाल यह कि क्या अफीम माफिया को शांति का पाठ पढ़ाने के लिए सीएम उपवास पर बैठे थे ? 

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