
बता दें कि मंदसौर में किसान आंदोलन के दौरान 6 जून को किसान एवं पुलिस आमने सामने आ गए थे। किसानों का कहना है कि पुलिस ने किसानों को निशाना बनाते हुए फायरिंग कर दी जिसमें 6 किसानों की मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे प्रदेश में किसान आंदोलन उग्र हो गया था और कई स्थानों पर किसानों ने शासकीय एवं प्राइवेट संपत्तियों में आग लगाई। इस दौरान 13 बसें एवं 150 से ज्यादा ट्रक जलाए गए। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 100 से ज्यादा किसान नेताओं को गिरफ्तार कर लिया।
मंदसौर फायरिंग के तत्काल बाद गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह ने दावा किया था कि यह गोलियां पुलिस ने नहीं चलाईं। कलेकटर स्वतंत्र कुमार ने भी कहा था कि उन्होंने फायरिंग का कोई आदेश नहीं दिया। बाद में पीएम रिपोर्ट के दौरान पाया गया कि किसानों के शरीर में धंसी गोलियां पुलिस की सरकारी बंदूकों से ही निकलीं थीं। जांच के बिन्दुओं में इस बात का जिक्र ही नहीं किया गया कि क्या फायरिंग से पहले डीएम की अनुमति ली गई थी।