Advertisement

BJP सिंधिया से घबराई, 'चम्बल गौरव यात्रा' बीच में ही बंद कराई



भोपाल। मप्र में कांग्रेस के फेमस लीडर ज्योतिरादित्य सिंधिया को घेरने के उद्देश्य से शुरू की गई चम्बल गौरव यात्रा फ्लॉप हो गई है। यह यात्रा अपने मुकाम पर पहुंचने से पहले ही दम तोड़ गई। इसे बंद कर दिया गया है। बता दें कि अटेर चुनाव के दौरान सीएम शिवराज सिंह ने कहा कि था कि 'सिंधिया ने चंबल के लोगों पर बहुत जुल्म ढाए हैं।' माना जा रहा था कि 'चम्बल गौरव यात्रा' के दौरान उन जुल्मों का विस्तार से वर्णन किया जाएगा और इस तरह 1857 के इतिहास को कुरेदकर ज्योतिरादित्य सिंधिया को नुक्सान पहुंचाया जाएगा परंतु ऐसा कुछ हुआ नहीं। उल्टा सीएम शिवराज सिंह, मंत्री नरोत्तम मिश्रा और उपाध्यक्ष प्रभात झा जैसे नेताओं ने इसकी तरफ देखा तक नहीं। 

दरअसल, 2018 के विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की तरफ से सिंधिया को प्रदेश का चेहरा माना जा रहा है। इस खबर ने बीजेपी सरकार की नींद उड़ा दी है। बेदाग छवि के ज्योतिरादित्य सिंधिया को जब घेरने का कोई मौका नहीं मिला तो बीजेपी ने इतिहास के सहारे सिंधिया पर अटैक करने की कोशिश की। 

झांसी की रानी लक्ष्मीबाई को ढाल बनाया गया। रानी लक्ष्मीबाई के संघर्ष को याद करते हुए और सिंधिया घराने द्वारा अंग्रेजों का साथ देने का इतिहास दुहराकर सिंधिया की घेराबंदी करने की कोशिश की गई। भिंड-दतिया लोकसभा सांसद भगीरथ प्रसाद ने उस रास्ते पर पैदल चलकर यात्रा निकालने की योजना तैयार की, जिन रास्तों पर से झांसी की रानी लक्ष्मीबाई गुजरी थीं। 

दिग्गजों ने काटा किनारा
सात दिन की इस यात्रा का नाम चम्बल गौरव यात्रा रखा गया। ये यात्रा 26 मई को भिंड के गोपालपुरा से शुरू होकर एक जून को ग्वालियर में लक्ष्मीबाई की समाधि पर जाकर सम्पन्न होनी थी। चम्बल गौरव यात्रा की घोषणा के साथ ये भी बताया गया कि केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी इस यात्रा में शामिल होंगे लेकिन यात्रा की शुरुआत के साथ ही बीजेपी बैकफुट पर आ गई और दिग्गजों ने इस यात्रा से किनारा कर लिया। 

गौरव यात्रा में इनका दबाव
सूत्र बतातें है कि जिस सिंधिया घराने को निशाना बनाने के लिए इस यात्रा का आयोजन किया गया था उस सिंधिया घराने के लोग बीजेपी में अपना अच्छा खासा रसूख रखते है। बात चाहे मध्यप्रदेश की मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया की हो या फिर माया सिंह की, या फिर बात हो राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा जी की। एक ही घराने के लोग अपने परिवार पर आंच आने भी देते ये कैसे संभव है। लिहाजा बीजेपी पर इतना दबाव बढ़ा कि ग्वालियर तो दूर की बात रही, चम्बल गौरव यात्रा को भिंड की सीमा में ही समाप्त करना पड़ गया।

बीजेपी की अच्छी खासी किरकिरी 
इस पूरे ड्रामे से बीजेपी की अच्छी खासी किरकिरी हो गई। सांसद जी के पास तो इस यात्रा के समापन को लेकर कोई माकूल जवाब तक नहीं है। इस यात्रा से जुड़ा हर यात्री अब सवाल पूछने पर बंगले झांक रहा है। इतनी बुरी हालत तो बीजेपी की कभी नहीं हुई। इस पूरे वाकये से एक बात तो साफ हो गई है कि सिंधिया के रसूख के सामने बीजेपी आज भी कमजोर ही है। बीजेपी की इस फ्लॉप हो चुकी चम्बल गौरव यात्रा पर एक कहावत पूरी तरह सटीक बैठती है कि-कौआ चला हंस की चाल और अपनी चाल भी भूल गया।