शिवराज सिंह, सिंधिया के मुकाबले अटेर में ढेर, हारे हुए भदौरिया फिर हार गए | ARVIND BHADORIYA

Thursday, April 13, 2017

उपदेश अवस्थी/भोपाल। 6 महीने की तैयारियां और पूरी ताकत लगाने के बावजूद शिवराज सिंह चौहान अटेर में ढेर हो गए। यहां उनका मुकाबला कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया से था। सन् 2013 के चुनाव में हार चुके अरविंद भदौरिया बड़ी मेहनत से भाजपा का टिकट लेकर आए थे लेकिन फिर हार गए। अटेर विधानसभा पर पूर्व नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे के पुत्र हेमंत कटारे ने 800 से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज कराई है। 

अटेर का उपचुनाव की शुरूआत भी रोचक थी और अंत भी रोमांचकारी रहा। जैसे वर्ल्डकप में भारत पाकिस्तान के मैच के दौरान लोग टीवी के सामने टकटकी लगाए रहते हैं, ठीक वैसे ही मप्र में राजनीति में रुचि रखने वाले तमाम लोग दिनभर टीवी के सामने बैठे रहे। सोशल मीडिया पर जीत के दावों से शुरू हुई भाजपाईयों की सुबह, शाम को सफाई और दलीलों के सम्पन्न हुई। वोटों की गिनती ने भी लोगों का रोमांच कम नहीं किया। शुरूआत में भाजपा को बढ़त मिली तो बाद में कांग्रेस आगे निकलती चली गई लेकिन अचानक भाजपा ने ऊंची जम्प लगाई। 19वें राउंड में दिलों की धड़कनें थम गईं थीं। 

भाजपा ने इस सीट से अरविंद भदौरिया को बतौर प्रत्याशी उतारने का मन 6 महीने पहले ही बना लिया था। उनकी जीत में कोई बाधा ना आए इसलिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने हर संभव तैयारी की थी। भाजपा में भितरघात ना हो, इसलिए किसी को लालबत्ती तो किसी को सुनहरे भविष्य का लालच दिया गया। आचार संहिता लागू होने से पहले ही मंत्रियों की फौज अटेर भेज दी गई थी। जातिवाद का समीकरण कहीं खेल ना बिगाड़ दे इसलिए मंत्रियों को तैनात किया गया था कि वो अपनी अपनी जाति के लोगों से मिलें और अरविंद भदौरिया की जीत सुनिश्चित करें। 

उपचुनाव के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने यहां कोई कसर नहीं छोड़ी। यहां तक कि अपनी पहचान को तोड़ते हुए कुछ इस तरह के विवादित बयान भी दिए जिन्होंने शिवराज सिंह की ब्रांड इमेज को नुक्सान पहुंचाया। बसपा ने यहां से अपना प्रत्याशी ना उतारते हुए कांग्रेस को समर्थन दिया था परंतु दलितों का वोट भाजपा में लाने के लिए बसपा नेताओं को भाजपा में शामिल करवाया गया। बार बार यह प्रचारित करवाया गया कि शिवराज सिंह सरकार ही दलितों का हित कर सकती है। 

हेमंत कटारे की मां मीरा कटारे का तूफानी दौरा भी जनता पर प्रभाव छोड़ता गया। इधर चुनावी पर्यटन पर गए भाजपा नेताओं ने रिकॉर्ड जीत का भ्रम पैदा किया। सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा भविष्यवाणियां भाजपा नेताओं की आ रहीं थीं। इधर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अटेर डेरा जमा लिया था। उन्होंने जनता के बीच जाकर बातचीत की। दलितों के घर रात्रि विश्राम किया। खाना बनाया। इस कारण यह चुनाव सीधे सीधे शिवराज सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच हो गया था। 

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