नोटबंदी के बाद सहकारी बैंकों में मंत्री-नौकरशाहों ने जमा कराये 3.50 सौ करोड़: कांग्रेस

भोपाल। प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता केके मिश्रा ने देश में नोटबंदी के बाद विभिन्न सहकारी बैंकों में एक बड़े षड्यंत्र के बाद करीब 3.50 सौ करोड़ रूपये जमा कराये जाने का सनसनीखेज आरोप लगाते हुए इन बैंकों में जमा की गई बड़ी राशि की जांच कर उससे जुड़े जमाकर्ताओं के नामों/ गुप्त नामों को भी सार्वजनिक किये जाने की मांग की है। 

उनका आरोप है कि इतना बड़ी धनराशि प्रदेश सरकार में काबिज सत्तासीन मंत्रियों और बड़े नौकरशाहों की ही है। श्री मिश्रा ने आयकर छापों की जद में आये बस कंडक्टर रहे,  आरएसएस, भाजपा से संबद्ध करोड़ों रूपयों की संपत्ति के मालिक सुशील वासवानी के राजधानी भोपाल स्थित ‘‘महानगर सहकारी बैंक’’ के संचालक और प्रदेश के राजस्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता पर भी आरोप लगाया है कि उन्होंने वर्ष 2013 में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव के दौरान जिला निर्वाचन अधिकारी को 7 नवम्बर, 2013 को प्रस्तुत सत्यापित अपने शपथ पत्र में इस बैंक के संचालक होने की जानकारी छुपाकर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 33 (बी) का उल्लंघन किया है, जिसमें एक वर्ष या उससे अधिक कारावास से दंडादिष्ट किये जाने का प्रावधान है। लिहाजा, श्री गुप्ता मंत्री पद से इस्तीफा दें। 

आज यहां जारी अपने बयान में श्री मिश्रा ने कहा कि नोटबंदी के बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा सहकारी बैंकों में पुराने नोटों के लेन-देन बंद किये जाने के आदेश के बाद मप्र में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने लेन-देन प्रारंभ कराये जाने को लेकर पहले वित्त मंत्री अरूण जेटली को पत्र लिखे जाने की बात प्रचारित करवायी, जब उन्हें तकनीकि जानकारी दी गई तब उन्होंने यह पत्र जारी नहीं किया। बाद में सरकार ने सहकारी बैंकों के अधिकारियों और कर्मचारियों से अरेरा हिल्स स्थित आरबीआई मुख्यालय के समक्ष इस विषयक विरोध प्रदर्शन करवाया, जिसकी जबावदारी बाकायदा दो आईएएस व सहकारिता विभाग में पदस्थ एक वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी गई, तत्पश्चात माननीय उच्च न्यायालय, जबलपुर, म.प्र. में एक याचिका प्रस्तुत करवायी गई। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा आरबीआई को एक नोटिस के माध्यम से 15 दिवस में जबाव देने हेतु आदेश पारित किया गया, इस पारित आदेश के बाद सहकारी बैंकों में लगभग 3.50 सौ करोड़ रूपये जमा कराये गये हैं, जो प्रदेश काबीना के मंत्रियों व नौकरशाहों का कालाधन है। 

श्री मिश्रा ने आयकर विभाग से आग्रह किया है कि वह प्रदेश के सहकारी बैंकों में इस अवधि में हुए सभी प्रकार के लेनदेनों की उच्चस्तरीय जांच कर जमाकर्ताओं के नाम सार्वजनिक करें, ताकि भ्रष्टाचार के खिलाफ बहुप्रचारित मुहिम के सार्थक परिणामों से प्रदेश की जनता रूबरू हो सके?
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