अनिल माधव दवे की तिरंगा यात्रा के अर्थ अनेक

Updesh Awasthee
विश्वास सारंग ने थामा दवे का दिव्य तिरंगा
भोपाल। तिरंगा यात्रा के नाम पर भाजपा में राजनीति के रंग बदलने की कोशिश शुरू हो गई है। अनिल माधव दवे भले ही केंद्रीय पर्यावरण एवं वन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बन गए हैं परंतु उनका टारगेट श्यामला हिल्स ही है। अब तक पर्दे के पीछे रहकर रणनीतिया बनाने वाले चाणक्य अब चंद्रगुप्त बनना चाहते हैं। तिरंगा यात्रा इसी टारगेट का एक आयोजन माना जा रहा है। मजेदार यह रहा कि हाल ही में मंत्री बनकर आए विश्वास सारंग बड़े उत्साह के साथ दवे के दिव्य आयोजन का हिस्सा बने। 

जताया 'मैं ईमानदार हूं'
इन दिनों शिवराज सिंह पर बेईमानी और वादाखिलाफी के आरोप लग रहे हैं। उनके रिश्तेदारों की धमचक के चर्चे भी काफी हैं। इधर अनिल माधव दवे ने खुद को इन विकृतियों से दूर रहने वाला नेता प्रमाणित किया। पहली बार भोपाल में पार्टी द्वारा दवे का सम्मान समारोह किया गया। इसमें दवे ने मंत्री बनने के बाद का एक घटनाक्रम सुनाते हुए कहा, ‘मैं अपने विभाग में गया तो उन्हें स्पष्ट कर दिया कि मैं हूं और मेरा सेक्रेटरी हैं। ये जब फोन करें तो काम करना। इसमें भी जो सही हो, उसे ही करना। इसके अतिरिक्त मेरा कोई रिश्तेदार नहीं है। कोई फोन करें तो मुझे बताएं। यदि इसके बाद भी कोई काम करेगा तो वह खुद जिम्मेदार होगा।’ दवे ने यह घटनाक्रम सुनाकर साफ कर दिया है कि वे कामकाज में किसी भी तरह की सिफारिश या अवरोध पसंद नहीं करेंगे। 

प्रभात झा ने डाला घी
शिवराज सिंह की एक चाल से जमींदोज हुए प्रभात झा उस दर्द को कभी भुला नहीं पाएंगे। वो गाहे बगाहे शिवराज सिंह के खिलाफ उठने वाली आग में घी डालने से नहीं चूकते। इस कार्यक्रम में भी उन्होंने कुछ ऐसा ही किया। प्रभात झा ने कहा कि दवे जनसंघ के प्रदेश में प्रथम अध्यक्ष के पोते है। यह उनका नहीं, बल्कि उनके कृतित्व, देश की नदियों, जनसंघ परिवार की यात्रा और संगठन के कार्यकर्ताओं का सम्मान है। 
कुल मिलाकर प्रभात झा ने यह बताया कि अनिल माधव दवे, भाजपा में शिवराज सिंह से कहीं ज्यादा जमीनी कार्यकर्ता हैं और सरल व ईमानदार स्वभाव के व्यक्ति हैं। इनका परिवार पीढ़ियों से संघ की सेवा करता आया है। 
इशारा तो दवे ने भी कर दिया
दवे ने मुख्यमंत्री की प्रशंसा करते हुए कहा कि मेरा व उनका घनिष्ठ संबंध है। उन्हें चुनाव लड़ने और जीतने का शौक है और मुझे चुनाव लड़ाने और विजय हासिल करने में रूचि है। बेटी को सुयोग्य दामाद, बेटे को सुयोग्य कन्या और अच्छे नेता को कार्यकर्ता मिलना सौभाग्य की बात है और वह भाजपा में सुलभ है। 
बताते चलें कि इन दिनों भाजपा का 'सुयोग्य' कार्यकर्ता इन दिनों शिवराज सिंह से नाराज है। दवे ने जता दिया कि वो अब किसके साथ है। दवे की इस तिरंगा यात्रा का एक सबसे चटख रंग यह रहा कि उन्होंने पहली बार सबके सामने स्पष्ट कर दिया कि वो ही मध्यप्रदेश का भविष्य हैं। पंडितों का अनुमान है कि अगला चुनाव शिवराज सिंह के नेतृत्व में नहीं लड़ा जाएगा। यदि लड़ा भी गया तो मुख्यमंत्री अंतिम समय में बदल दिया जाएगा। 

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