नईदिल्ली। दिल्ली पुलिस ने दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज की है। दिल्ली पुलिस का आरोप है कि स्वाति ने 14 साल की रेप पीड़िता की पहचान सार्वजनिक कर दी जबकि स्वाति का आरोप है कि उन्होंने दिल्ली पुलिस को नोटिस देकर जवाब तलब किया तो उसने उल्टा उन्हीं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली।
मालीवाल ने लिखा है कि दिल्ली महिला आयोग ने 14 साल की रेप पीड़िता के मामले में बुराड़ी पुलिस को नोटिस भेजा था। 2 दिन बाद पुलिस ने मुझ पर ही एफआईआर दर्ज कर दी। मेरी गलती बस ये थी की मैंने महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा के मामले में दिल्ली पुलिस की नाकामी पर सवाल खड़े किए।
स्वाति ने ट्वीट में लिखा 'मैं और मुद्दे उठाऊंगी। मैंने निर्भया के लिए लाठी खाई है, मेरा हर पल और कोई निर्भया न हो ये सुनिश्चित करने में लगता है। मैं आंदोलनकारी हूं। किसी FIR से नहीं डरती।'
Swati Maliwal (@SwatiJaiHind) July 26, 2016
स्वाति ने आरोपों को किया खारिज
दिल्ली पुलिस के एफआईआर के जवाब में स्वाति का कहना है कि 'मैंने पीड़िता का नाम उजागर नहीं किया है। जबकि पुलिस खुद दिल्ली महिला आयोग के नोटिस के बाद हरकत में आई और आरोपी को गिरफ्तार किया।
रेप पीड़िता के नाम पर पहले भी छिड़ चुकी है बहस
स्वाति ने रेप पीड़िता के नाम छुपाने पर भी सवाल उठाए, रेप पीड़ित को अपनी पहचान क्यों छिपानी चाहिए? क्या ऐसा नहीं होना चाहिए कि एक रेपिस्ट खुद को छिपाए? क्या पीड़ित को इस बात से शर्मिंदा होना चाहिए की वो यातनाओं का शिकार हुई है? स्वाति मालीवाल का ये बयान एक बार फिर विवाद को जन्म दे सकता है। दरअसल निर्भया केस के दौरान भी रेप पीड़िता का नाम उजागर होना चाहिए या नहीं, इस मुद्दे पर बहस छिड़ चुकी है।
