कमलनाथ। यदि मेरी तरह आपको भी पिछले सप्ताह ऐसा लगा हो कि हाल ही के राज्य चुनावों में भाजपा को विजय मिली है और कांग्रेस को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है तो नीचे दिए गये तथ्य में न केवल उपयोगी रूप में सुधार करेंगे, बल्कि यह तथ्य इस बात के भी प्रमाण है कि शुरू में हमें मिली प्रेस कवरेज कितनी अधूरी और संभवतः भ्रामक रही।
सर्वप्रथम असम, निःसंदेह विजय भाजपा के लिए एक उपलब्धि है, किंतु यदि आप 2014 से 2016 में पार्टी के प्रदर्शन की तुलना करें तो कुछ और ही स्पष्ट होता है। इसके द्वारा जीते गये विधानसभा क्षेत्र 69 से घटकर 60 हो गये हैं और इसका वोट सिकुड़कर 37 से 30 प्रतिशत हो गया है। दूसरी ओर हारने के बाद भी कांग्रेस का वोट बैंक भाजपा से अधिक है। (29.5 प्रतिशत की तुलना में 31 प्रतिशत) यद्यपि, ऐसा इसलिए है कि इसने अधिक सीटों पर चुनाव लड़ा था। अतः बावजूद इसके कि भाजपा को विजय मिली, उसे 2014 की तुलना में सीटों और वोट शेयर की दृष्टि से गिरावट देखनी पड़ी।
अगला बंगाल, 2014 में भाजपा का वोट शेयर 17 प्रतिशत था और यह 24 विधानसभा क्षेत्रों में आगे थी। दो वर्ष बाद वोट शेयर घटकर 10 प्रतिशत और विधानसभा क्षेत्र घटकर सिर्फ 3 रह गये। इस आलोक में देखा जाए तो बंगाल में सिर्फ निराशा ही नहीं, बल्कि बहुत बड़ा झटका लगा।
तीसरे केवल, यहां भाजपा इस बात पर गर्व कर रही है कि इसने पहली बार एक सीट जीतकर खाता खोला है। निःसंदेह यह एक महत्वपूर्ण और विश्वसनीय उपलब्धि है। हांलाकि 2014 में पार्टी 4 विधानसभा क्षेत्रों में आगे थी। 2016 में इसने केवल एक सीट जीती है। दूसरे, यद्यपि इसका वोट शेयर 2011 की तुलना में बढ़ा है, यह 2014 की तुलना में 11 प्रतिशत पर बनी हुई है। तीसरे, जब भाजपा प्रवक्ता केरल में 15 प्रतिशत वोट शेयर के बारे में बोलते हैं तो वे बड़ी चतुराई से, पर चुपचाप अपने सहयोगियों का वोट शेयर अपने में जोड़ लेते हैं। वास्तविक ध्यानपूर्वक गढ़ी गई तस्वीर से भिन्न है।
अंत में तमिलनाडु, यहां 2014 का 6 प्रतिशत वोट शेयर आधा होकर इस वर्ष 3 प्रतिशत रह गया। परिणामस्वरूप दो वर्ष पूर्व भाजपा 7 विधानसभा क्षेत्रों में आगे थी और 2016 में पूर्णतया उसका सफाया हो गया। इसे एक भी सीट नहीं मिली।
अब हम अलग-अलग राज्यों की तस्वीरों से हटकर एक समग्र तस्वीर देखते हैं। असम की आश्चर्यजनक विजय के अलावा, 4 राज्यों-पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल में में कांग्रेस जीती है। इसकी तुलना में कांग्रेस ने 100 सीटें जीती हैं। एक बार पुनः इन राज्यों में भाजपा का कुल वोट शेयर 2014 में 17 प्रतिशत था जो कि 2016 में घटकर 13 प्रतिशत रह गया है। कांग्रेस का वोट शेयर फिसल कर 19 से 18 पर आ गया है।
एक अंतिम तथ्य जो कि थोड़ा सा जटिल है, वह इन राज्यों में इन दोनों बड़ी पार्टियों के मध्य तुलनात्मक तस्वीर प्रस्तुत करता है। 2014 में भाजपा ने 590 विधानसभा क्षेत्रों पर चुनाव लड़ा था और 104 में आगे थी। 2016 में इसने 661 विधानसभा क्षेत्रों पर चुनाव लड़ा और केवल 64 में आगे थी। कांग्रेस ने 2014 में 749 विधान सभा क्षेत्रों पर चुनाव लड़ा और 110 जीती। दो वर्ष पश्चात् इसने केवल 344 क्षेत्रों पर चुनाव लड़ा, किंतु फिर भी 100 पर जीती।
मेरा निष्कर्ष सीधा है, भाजपा ने अपने प्रदर्शन को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया और एक शानदार विजय की तस्वीर प्रस्तुत की, जबकि सच्चाई बहुत अलग है और साथ ही कम चमकदार भी।
भारतीय जनता पार्टी को इस कार्यक्षमता से निराशा ही मिलेगी और कांग्रेस कार्यकर्ता को एक नई ऊर्जा मिलेगी।
- लेखक श्री कमलनाथ वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं छिंदवाड़ा से लोकसभा सदस्य हैं।
