भारत में महिलाओं की सैलरी में बड़ा भेदभाव

Updesh Awasthee
नयी दिल्ली। प्राइवेट कंपनियों में महिला कर्मचारियों को कई ऐसी परेशानियों से गुजरना पड़ता है जिसका कई बार वो जिक्र तक नहीं कर पातीं। पुरुषों की तुलना में कुछ अतिरिक्त तनाव के साथ नौकरी कर रहीं महिला कर्मचारियों को कंपनियां सैलेरी भी कम देतीं हैं। यह एक प्रकार का आर्थिक शोषण जिसकी शिकायत सिर्फ महिला कर्मचारी हैं। 

भारत में पुरुषों का औसत सकल वेतन 288.68 रुपये प्रति घंटा है जबकि महिलाओं की आय 207.85 रुपये प्रति घंटा तक है।

ऑनलाइन करियर और नियुक्ति समाधान प्रदाता मान्स्टर इंडिया के ताजा मान्स्टर वेतन सूचकांक के मुताबिक सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में औसतन सबसे अधिक 337.3 रुपये प्रति घंटा वेतन मिलता है। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में स्त्री-पुरूषों कर्मचारियों के वेतन में फासला सबसे अधिक 34 प्रतिशत है। सूचना प्रौद्योगिक सेवाओं में पुरूषों 360.9 रुपये प्रति घंटा कमाते हैं जबकि महिलाओं की आय 239.6 रुपये प्रति घंटा है। अलग अलग क्षेत्रों के विश्लेषण से स्पष्ट है कि स्त्री-पुरूषों वेतन में सबसे ज्यादा अंतर विनिर्माण क्षेत्र में 34.9 प्रतिशत है और सबसे कम बैंक, फाइनेंस और बीमा क्षेत्र में हैं। परिवहन, लाजिस्टिक्स, संचार में यह फासला समान रूप से 17.7 प्रतिशत है।

रपट के मुताबिक वेतन में फर्क की वजहों में एक यह हो सकती है कि महिला कर्मचारियों के मकाबले पुरूषों को ज्यादा तरजीह दी जाती है। इसके अलावा निगरानी वाले पदों के लिए पुरूषों कर्मचारियों को प्रोन्नति में तरजीह मिलती है। दूसरी तरफ बच्चों के पालन-पोषण की वजह से महिलाओं द्वारा नौकरी से अवकाश लेना और अन्य सामाजिक एवं सांस्कृतिक कारकों की भूमिका हो सकती है।

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