गंगवार को मिला 5 आईएएस, 5 लाख कर्मचारियों का साथ

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भोपाल। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की तारीख करने वाले बड़वानी कलेक्टर अजय गंगवार को हटाए जाने का विरोध तेज होता चला जा रहा है। इसे अभिव्यक्ति की आजादी का हनन बताया जा रहा है। शिवराज सरकार की अ​सहिष्णुता निरूपित किया जा रहा है। अब तो यहां तक कह दिया गया है कि यदि कंडक्ट रूल, अभिव्यक्ति की आजादी के आड़े आते हैं तो उन्हे बदल दिया जाना चाहिए। अब तक 5 आईएएस अफसर और 5 लाख कर्मचारियों वाले संगठन तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ का समर्थन गंगवार को मिल चुका है। 

नेहरु-गांधी की तारीफ करने वाले आईएएस अफसर अजय गंगवार के पक्ष में राजेश बहुगुणा के बाद एक और आईएएस लक्ष्मीकांत द्विवेदी व आईएफएस अफसर आजाद सिंह डबास भी खड़े हो गए हैं। द्विवेदी ने कहा है कि गंगवार ईमानदार और अफसर हैं। ऐसे अफसर राज्य सरकार की संपत्ति है। यदि सभी ऐसे ही हो जाएं, खासकर आईएएस अफसर तो राज्य की प्रगति दो गुना हो जाएगी।

गृह विभाग में उप सचिव द्विवेदी वही अफसर हैं, जिन्होंने लोकायुक्त पीपी नावलेकर के खिलाफ मोर्चा खोला था। वे कटनी के एक मामले में चल रही जांच को लेकर आधा दर्जन से अधिक आईएएस अफसरों के खिलाफ राज्य सरकार को शपथ पत्र भी दे चुके हैं। इससे पहले कमर्शियल टैक्स डिपार्टमेंट में एडिशनल सेक्रेट्री राजेश बहुगुणा फेसबुक पर गंगवार की ओर से की गई पोस्ट की तारीफ कर चुके हैं। साथ ही इसे हिम्मत का काम बताते हुए ‘सेल्यूट’ भी किया है।

एसोसिएशन बोले- कंडक्ट रूल सबके लिए
आईएफएस एसोसिएशन के अध्यक्ष एलएम बेलवाल ने कहा कि चाहे अधिकारी राज्य का हो या केंद्र का, शासकीय सेवकों के लिए कंडक्ट रूल बने हुए हैं। उसका उल्लंघन किसी को नहीं करना चाहिए। उसके अंदर रहकर ही काम करना चाहिए। 

नियम आड़े आएं तो संशोधन पर बहस हो
अपने निलंबन के खिलाफ ट्रिब्यूनल से जीत कर आए आईएफएस अधिकारी आजाद सिंह डबास ने कहा कि व्यक्तिगत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होनी चाहिए। अधिकारी अपनी बात कहां रखेंगे। गंगवार पर राज्य सरकार का कार्रवाई करना गलत है। यदि कंडक्ट रूल कहीं आड़े आते हैं तो उसके संशोधन पर डिबेट हो।

सोशल मीडिया पर सक्रिय रहना जरूरी
निलंबित आईएएस अफसर शशि कर्णावत ने कहा कलेक्टर को बिना राजनीतिक दबाव के काम करने की छूट मिलना चाहिए। कलेक्टरों पर नवाचार की जिम्मेदारी है। इसके लिए सोशल मीडिया पर सक्रिय रहना जरुरी है और विचार लोगों से जुड़ने और अभिव्यक्ति से आते हैं।

चर्चा में रिटायर्ड आईएएस अफसर की फेसबुक पोस्ट
मौजूदा अफसरों की सोशल मीडिया पर सक्रियता कम हो गई है लेकिन एक रिटायर्ड आईएएस अफसर की फेसबुक पोस्ट इन दिनों काफी चर्चा का विषय बनी हुई है-

नेहरू तेरी पुण्यतिथि, नहीं मनाते आज, 
गंगवार ही की तरह, गिर न जाए गाज।
गिर न जाए गाज, व्यथित नौकर सरकारी,
दिल में तुम हो बसे, मगर बाहर लाचारी।
कहें "अखिल’ कविराय, कंस, रावण सा शासन,
दुर्योधन सा दर्प, कहां लगता दुस्साशन?
अखिलेंदु अरजरिया, पूर्व आईएएस

कर्मचारी संघ ने दी हड़ताल की चेतावनी
गंगवार का मध्यप्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ ने समर्थन किया है। संघ के प्रांताध्यक्ष अरूण द्विवेदी का कहना है कि यदि राज्य सरकार ने गंगवार के विरुद्ध कोई कार्रवाई की तो प्रदेश के पांच लाख अधिकारी-कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। सरकार अभिव्यक्ति की आजादी का दमन कर रही है।

गंगवार का फेसबुक अकाउंट बंद
सोशल मीडिया विवाद के तूल पकड़ने के बाद गंगवार ने फेसबुक एकाउंट को बंद कर दिया। वे सोमवार को मंत्रालय में ज्वाइनिंग दे सकते हैं। गंगवार को नोटिस देने संबंधी फाइल मुख्यमंत्री को भेज दी गई है। माना जा रहा है कि इस पर भी सोमवार को निर्णय हो जाएगा। सिबि चक्रवर्ती ने अभी अपना पक्ष शासन को नहीं भेजा गया है।

अजाक्स को आवेदन का इंतजार
अजय गंगवार को हटाए जाने की कार्रवाई को दलित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई भी निरूपित किया गया था परंतु दलित कर्मचारियों की संस्था अजाक्स इस मामले में चुप है। अजाक्स के अध्यक्ष जेएन कंसोटिया को कलेक्टर के आवेदन का इंतजार है। यदि गंगवार आकर निवेदन करेंगे तभी अजाक्स अगला कदम बढ़ोगी। पढ़िए क्या कहा है अजाक्स के अध्यक्ष महोदय ने: मैं फेसबुक पर नहीं हूं। इसलिए मुझे नहीं पता कि अजय गंगवार ने क्या लिखा है। उन्होंने एसोसिएशन में भी संपर्क नहीं किया है।
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