इंदौर। राज्य सरकार घोटालेबाज सहकारी गृह निर्माण संस्थाओं की जांच एसटीएफ को सौंपने की तैयारी कर रही है। सहकारिता आयुक्त ने ऐसी संस्थाओं की सूची मांगी है। इंदौर में ऐसी 56 संस्थाओं की पहचान की गई है जिनमें गंभीर अनियमितताएं हुई हैं।
संयुक्त आयुक्त और उपायुक्त कार्यालय में ऐसी अन्य हाउसिंग संस्थाओं को भी खंगाला जा रहा है, जिन्होंने जमीन को लेकर गंभीर गड़बड़ियां की हैं। देखा जा रहा है कि इन अनियमितताओं के कारण कहां सदस्यों का हक मारा गया और भूखंड आवंटन व सदस्यता सूची में हेराफेरी की गई। सहकारिता मंत्रालय ने तय किया है कि विभाग के अधिकारियों को एक और मौका दिया जाएगा कि वे इन संस्थाओं की अटकी हुई जांच और कार्रवाई पूरी कर दें। इसके बावजूद कोई हल नहीं निकला तो ऐसी संस्थाओं की जांच एसटीएफ को दे दी जाएगी।
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इन हाउसिंग संस्थाओं की हुई पहचान
देवी अहिल्या श्रमिक कामगार, नवभारत, मां सरस्वती, गांधी नगर, हरियाणा हाउसिंग, विकास अपार्टमेंट, सर्वानंद, जागृति, आकाश, जनकल्याण, कष्ट निवारक, श्रीराम, न्याय विभाग, वेदमाता गायत्री, डाकतार कर्मचारी, श्रीयंत्र, मजदूर पंचायत, कर्मचारीगण, संवाद नगर, मयूर, शांति नगर, नवलखा श्रमिक, सुविधा, कविता, टेलीकॉम, गजानंद, महात्मा गांधी, वीर सावरकर, विक्रय कर अल्प आय कर्मचारी चतुर्थ श्रेणी, कर्मचारी एवं मित्र बंधु, ग्रीनपार्क, सविता, शुभलक्ष्मी, उमंग, बिहार, प्रशांत, मां पीताम्बरा हाउसिंग सोसायटी, शिक्षक नगर, सुकल्या ग्राम, शीतलेश्वर, विजयश्री, गीतानगर, कालिंदी, कसेरा, दि सिंध, शर्मदा, लक्ष्मण नगर, मालवीय नगर पर्यावरण सुधार, वैभवनगर, संगीता गृह निर्माण, कमला नेहरू, नंदानगर, तिरुपति अपार्टमेंट, इंदौर विकास, बसंत विहार और अमृता हाउसिंग को-ऑपरेटिव सोसायटी।
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कैसे-कैसे मामले
कई संस्थाओं में भूखंडों की धांधली के बाद उनका रिकॉर्ड ही नहीं मिल रहा है। संस्था के कर्ताधर्ता पदाधिकारियों ने या तो रिकॉर्ड गायब कर दिया या जला दिया।
कुछ संस्थाओं में पुराने और पात्र सदस्यों को गुपचुप तरीके से हटाकर नए और फर्जी सदस्य बनाकर प्लॉट बेच दिए गए।
कई संस्थाओं में एक ही परिवार के एक से अधिक सदस्यों को प्लॉट बांट दिए। इनमें पिता, पुत्र, पत्नी, मां आदि शामिल हैं।
एक सोसायटी ने दूसरी को जमीन बेच दी और इससे मिली राशि का कोई हिसाब नहीं दिया। पदाधिकारी इस राशि का गबन कर गए।
