इंदौर। सरकारी अस्पतालों में 10 फीसदी ऐसे डॉक्टर, नर्स और वर्कर काम कर रहे थे, जो इलाज करने लायक ही नहीं थे। उन्हें डॉक्टरी पेशे की छोटी-छोटी बातों का भी ज्ञान नहीं था। इनकी योग्यता का खुलासा हाल ही में हुई परीक्षा से हुआ है। इसमें वे सरकारी मानदंडों पर खरा नहीं उतरे।
हाल ही में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने संविदा पर काम कर रहे संभाग के 5400 डॉक्टर, नर्स, फार्मासिस्ट, एएनएम, आशा वर्कर की समयावधि बढ़ाने के लिए परीक्षा ली थी। इनमें जिले के करीब 550 लोग शामिल थे। 31 मार्च 2016 को इनका कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो चुका है। इसे आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने परीक्षा ली थी। डॉक्टर, नर्स और एएनएम से ब्लड प्रेशर नापना, हीमोग्लोबिन, वैक्सिनेशन आदि सवाल पूछे गए थे। हाल ही में संभाग के सभी जिलों का रिजल्ट घोषित हुआ तो दस फीसदी कर्मचारी अयोग्य साबित हुए। सरकारी पैमाने के मुताबिक उन्हें 65 फीसदी अंक लाना जरूरी थे, लेकिन 6 फीसदी 55 से 65 और 4 फीसदी को 55 फीसदी से भी कम अंक मिले।
