भोपाल। यूं तो लोकायुक्त घूसखोरी के खिलाफ कार्रवाई करने वाली संस्था का नाम है परंतु लोकायुक्त में ही घूसखोरी का मामला सामने आ गया है। अब शिकायत कहां करें। मामला ग्वालियर लोकायुक्त का है। यहां एक घूसखोर को रंगेहाथों पकड़वाया था, लेकिन लोकायुक्त पुलिस ने केस में खातमा लगा दिया।
पशु आहार की सप्लाई करने वाले पराग ट्रेडर्स के संचालक नरेश आडवानी ने 24 जून 2015 को लोकायुक्त में गौशाला प्रभारी राकेश मित्तल की शिकायत की थी। उसने अपनी शिकायत में बताया था कि वर्ष 2015-16 के लिए गौशाला में पशु चारा आपूर्ति का ठेका स्वीकृत किया गया था। चारे की सप्लाई का 5 लाख 84 हजार रुपए का भुगतान नगर निगम को करना है, लेकिन राकेश मित्तल इस रकम का 3 प्रतिशत हिस्सा रिश्वत के रूप में मांग रहे हैं।
शिकायत की पुष्टि के लिए लोकायुक्त ने नरेश आडवानी को टेप रिकॉर्डर दिया, जिसमें रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। राकेश व नरेश के बीच 25 जून को रुपए लेना तय हुआ। इसके बाद लोकायुक्त ने राकेश मित्तल को ट्रेप करने के लिए जाल बिछाया। फरियादी की ओर से 18 हजार रुपए लिफाफे में बंद करके दिए गए। राकेश मित्तल के पैसे लेते ही लोकायुक्त ने उसे गिरफ्तार कर लिया। लोकायुक्त ने नोटों से भरा लिफाफा बरामद कर लिया। साथ ही उसका कैमिकल में हाथ धुलाने पर लाल रंग निकला। लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया। इस केस की जांच शैलेन्द्र गाविल को दी गई। जांच में उन्होंने क्लीन चिट दे दी।
आरटीओ हेडकांस्टेबल मामले में भी खात्मा
परिवहन विभाग के प्रधान आरक्षक रवीन्द्र जैन पर 300 गुना अधिक संपत्ति बताकर लोकायुक्त ने छापामार कार्रवाई की थी। जांच के बाद कोर्ट में खात्मा पेश किया था, जिसमें रवीन्द्र जैन को क्लीन चिट दी गई। जब कोर्ट ने इस खात्मा रिपोर्ट का अध्ययन किया तो पाया कि लोकायुक्त ने तथ्यों को छिपाकर रिपोर्ट तैयार की है। कोर्ट ने खात्मा रिपोर्ट को लौटा दिया था और फिर से जांच के आदेश दिए हैं।
बड़वानी कांड भी क्लोज
बड़वानी जिले के कृषि विस्तार अधिकारी की भी खात्मा रिपोर्ट लगाई गई है। उन पर आय से अधिक संपत्ति का मामला नहीं बताया है, जबकि 125 गुना अधिक संपत्ति बताकर छापा मारा था। अभी कोर्ट में इस रिपोर्ट पर फैसला बाकी है।
