भोपाल। रेल विभाग ने स्टेशन पर यात्रियों के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए, नतीजा यह निकला कि यात्री रेल के बजाए बस और टैक्सियों से उज्जैन जा रहे हैं। हालात यह बन गए कि यात्रियों की संख्या सामान्य से भी 11 प्रतिशत कम हो गई।
रेल अधिकारियों की मनमानी पर यात्रियों का यह करारा तमाचा है। अधिकारी अपनी नाकामी छिपाने के लिए भले ही कोई बहाने बना लें परंतु हकीकत यह है कि 22 अप्रैल से अब तक ट्रेनों की टिकट में 11 प्रतिशत की गिरावट आई है।
यात्रियों ने सड़क मार्ग चुन लिया
रेलवे से जुड़े जानकारों के मुताबिक भोपाल से उज्जैन के लिए जो ट्रेन चलाई जा रही है, उसमें पैसेंजर संख्या कम है। इसके अलावा भोपाल से उज्जैन जाने वालों में अधिकांश लोग सड़क के रास्ते यहां पहुंच रहे हैं। ट्रैफिक प्लान और अन्य सुविधाओं को देखते हुए पैसेंजर ट्रेन की बजाए चार पहिया वाहन से ज्यादा बेहतर मान रहे हैं। इसके बाद रेलवे द्वारा जबलपुर से उज्जैन तक चलाने वाली स्पेशल ट्रेन की उम्मीद भी टूट गई है।
क्यों नकारी रेल
भोपाल स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 6 पर शेड तक नहीं बना।
रेलों के आने जाने का कोई वक्त ही पता नहीं चलता।
प्लेटफार्म नंबर 6 पर पेयजल का प्रबंध तक नहीं है।
स्पेशल ट्रेनों का किराया एसी टैक्सी से भी ज्यादा है।
पहले शाही स्नान के समय ट्रेनों ने उज्जैन से 15 किलोमीटर पहले ही उतार दिया था।
टैक्सी हर 15 मिनट पर मिल जाती है।
ट्रेन से कम समय में टैक्सी पहुंचा देती है।
