भोपाल। व्यक्ति विशेष की पसंद के चलते जमीनी कार्यकर्ताओं के विरोध के बावजूद जिलाध्यक्ष बनाए गए भाजपा कई नेताओं के लिए अब बुरी खबर आ रही है। बताया जा रहा है कि जल्द ही उन्हें बदल दिया जाएगा। प्रदेश कार्यकारिणी के ऐलान के बाद प्रदेश संगठन जिलों के सक्रिय एवं कर्मठ कार्यकर्ताओं को आगे लाएगी।
मई दिवस से प्रदेश भाजपा के नवनियुक्त संगठन महामंत्री सुहास कुमार भगत से परिचय के लिए सभी संभागों में बैठकें आयोजित होंगी। इसके लिए प्रदेश प्रभारी डॉ. विनय सहस्रबुद्धे, प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान एवं पूर्व संगठन महामंत्री अरविंद मेनन भी संभागीय मुख्यालयों में होने वाली इन बैठकों में मौजूद रहेंगे। इसके बाद अगला चरण संगठन को सशक्त बनाने के लिए जिलों में सर्वस्वीकार्य नेताओं को कमान सौंपी जाएगी।
बुंदेलखंड, विंध्य एवं मालवा के करीब आधा दर्जन जिले ऐसे हैं जहां जिलाध्यक्षों के चुनाव में व्यक्ति विशेष की पसंद के आगे पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं की राय और नजर अंदाज कर दिया गया। इसलिए ऐसे जिलों को निशाने पर रखा जाएगा।
दूर की जाएगी गुटबाजी
जिलाध्यक्ष चुनाव में करीब आधा दर्जन जिले ऐसे हैं, जहां विरोध के स्वर मुखर हो चुके हैं। ऐसे जिलों में पार्टी स्पष्ट रूप से गुटबाजी की शिकार है, आने वाले दिनों में इसका खामिया संगठन को उठाना पड़ सकता है। इसलिए समय रहते सर्जरी की तैयारी है।
बुंदेलखंड में संभागीय मुख्यालय सागर जिलाध्यक्ष पद पर राजा दुबे की नियुक्ति के तुरंत बाद ही क्षेत्र के ज्यादातर नेताओं व कार्यकर्ताओं ने पार्टी के सामने आपत्ति जता दी थी। पन्ना में सदानंद गौतम की ताजपोशी होते ही सारंगधाम में जिले के वरिष्ठ नेताओं ने बाकायदा मुखर होकर बैठक बुलाकर अपनी नाखुशी जता दी। इनमें कई मौजूदा एवं पूर्व पदाधिकारी भी थे।
बुंदेलखंड पर फोकस
छतरपुर जिलाध्यक्ष पुष्पेन्द्र प्रताप सिंह के मामले में भी कमोवेश यही स्थिति सामने आई। बुंदेलखंड में पदस्थ रहे एक संगठन मंत्री की पुष्पेन्द्र से नजदीकियां सभी जानते हैं, लेकिन इसके बावजूद इस चुनाव को लेकर भी सवाल उठे। नगर पंचायत ओरछा का प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव हारने के बाद भी टीकमगढ़ में अभय प्रताप सिंह को कमान सौंपने पर सवाल उठाए गए थे, लेकिन तब कोई सुनवाई नहीं हुई।
उधर संभागीय मुख्यालय शहडोल में भी जिलाध्यक्ष अनुपम अनुराग अवस्थी को लेकर जिले के कार्यकर्ताओं में असंतोष जता चुके हैं। इसके अलावा उज्जैन नगर के इकबाल सिंह गांधी की ताजपोशी के बाद भी क्षेत्र के वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी आलाकमान के सामने अपनी नाखुशी प्रकट की थी। संभागीय बैठकों के दौरान जिलों में मौजूद संगठन की ऐसी खामियों पर भी विचार विमर्श की तैयारी की गई है।
