सुधीर ताम्रकार/बालाघाट। मध्यप्रदेश राज्य विपणन संघ द्वारा वर्ष 2015.16 में किसानों से समर्थन मूल्य पर करोडों रूपये मुल्य का लाखों क्विंटल धान खरीदी की गई है, उचित रखरखाव और सुरक्षा के अपर्याप्त इंतजाम तथा विभागीय लापरवाही के चलते बरबादी के कगार पर पहुंचाई जा रही है यह सिलसिला पिछले 5 वर्षों से चल रहा है जो मार्कफेड के अधिकारियों की सांठगांठ और नियोजित साजिश का परिणाम है जिसके चलते खराब और अनुपयोगी धान को औने पौने दामों पर राईस मिलर्स के हवाले कर दिया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि जिले के किसानों से समर्थन मुल्य पर खरीदा गया धान उपार्जन केन्द्रों से परिवहन कर जिले के गर्रा (बालाघाट), खापा (वारासिवनी), चिकमारा (कटंगी), डोंगरिया (परसवाडा) एवं लांजी मे करोडों रूपयों मुल्य की लागत से बनाये गये ओपन केप में खुले आसमान के नीचे स्टेग लगाये गये हैं जिनके ठंकने के लिये घटिया त्रिपाल का ईस्तेमाल किया गया है जो हवा के थपेडों से टुकडे टुकडे होकर जमीदोज हो गई है जिससे समय बेसमय होने वाली आंधी तुफान और बारीश और ओलों की मार से धान खराब हो रही है धान के बोरे भींग गयें हैं और उनमे अंकुरण तक फुट चुके है तथा अंकुरित हुई धान बरबाद हो चुकी है।
28 मार्च को गर्रा स्थित ओपन कैप जाकर जब मुआयना किया गया तो धान के रखरखाव के बदइंतजामी की कहानी खुद बयां हो रही है। ओपन केप में रखे आधे से ज्यादा धान के स्टेग के बोरों मे अंकुरण दिखाई दे रहा है ऐसी ही हालात जिले के अन्य ओपन केप की हैं, रखरखाव में लापरवाही और धान को बरबादी की कगार पर पहुंचाने की कारगुजारी यहीं तक सीमित नही है करोडों की धान के सुरक्षा के कोई पर्याप्त इंतजाम नही है और केप के चारों तरफ घेरा भी नही है तथा बिजली के इंतजाम नही है अंधेरा भी छाया रहता है जिसके कारण धान के बोरों की चोरी होती रहती है पर्याप्त सुरक्षा ना होने से आसानी से बोरो को पार कर दिया जाते है इन विसंगतियों के चलते अधिकारियों की संलिप्तता के कारण पर्याप्त रखरखाव के अभाव मे पानी और धूप से बरबाद हुई धान को उपयोग के काबिल ना होना बताकर उसको औने पौने दामों पर राईस मिलर्स के हवाले कर दिया जाता है और उसे अनुपयोगी धान से बनाये गये चांवल को नागरिक आपूर्ति निगम को प्रदाय किया जा रहा है जिसे निगम द्वारा इसी घटिया और खाने के अयोग्य चांवल को उचित मुल्य की दुकानो, आंगनबाडी केन्द्रो एवं मध्यान्ह भोजन के लिये सप्लाई किया जा रहा है जिसे यहां के भारतीय खादय निगम और स्टेट वेयर हाउस के गोदामों मे देखा जा सकता है।