MCU भर्ती घोटाला: नेताप्रतिपक्ष ने सबूत ही पेश नहीं किए

Updesh Awasthee
भोपाल। मीडिया में शिवराज सरकार का तीखा विरोध करते हुए नेताप्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय में फर्जी नियुक्तियों के आरोप लगाए थे। लोकायुक्त में शिकायत भी की और हाईकोर्ट में याचिका भी लगाई परंतु सबकुछ बस जनता को दिखाने के लिए। नेताप्रतिपक्ष ने शिकायत के समर्थन में ना तो लोकायुक्त को कोई सबूत पेश किए और ना ही हाईकोर्ट में। मामला खारिज कर दिया गया। एक बार फिर संदेह पुख्ता हुआ कि सारी राजनीति बस एक दूसरे पर दवाब बनाने के लिए ​की जा रही है। जनहित से इसका काई वास्ता नहीं।

श्री कटारे ने राजधानी भोपाल के माखन लाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा प्रो.अशोक कुमार टंडन, सौरभ मालवीय, राघवेन्द्र सिंह, देवेश किशोर, रंजीत त्रिपाठी, नंदकिशोर त्रिखा, आशीष जोशी व अमिताभ भटनागर की अवैध नियुक्तियां पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा व राघवजी की सिफारिश पर कराए जाने का आरोप लगाया था।

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति आलोक आराधे की एकलपीठ ने मंगलवार को दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद सुरक्षित किया गया फैसला बुधवार को सुनाया। जिसमें साफ किया गया कि लोकायुक्त ने याचिकाकर्ता कटारे को अपने आरोप साबित करने के संबंध में पुख्ता सबूत पेश करने कहा गया था लेकिन वे ऐसा नहीं कर सके। लिहाजा, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल में साल 2010 में प्राध्यापकों की संविदा आधारित नियुक्तियों को अवैध मानते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित अन्य के खिलाफ लोकायुक्त को एफआईआर दर्ज करने निर्देशित करने का सवाल ही नहीं उठता।

लोकायुक्त में शिकायत के बाद आए हाईकोर्ट
इस मामले की सुनवाई के दौरान लोकायुक्त का पक्ष अधिवक्ता पंकज दुबे ने रखा। उन्होंने साफ किया कि नेता प्रतिपक्ष कटारे ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व पूर्व मंत्रियों राघवजी और लक्ष्मीकांत शर्मा के खिलाफ लोकायुक्त में शिकायत तो की लेकिन वे पुख्ता दस्तावेजों के बिना। दरअसल, इसीलिए लोकायुक्त विशेष स्थापना पुलिस एफआईआर दर्ज करने की स्थिति में नहीं थी। इसीलिए याचिका में की गई मांग मंजूर किए जाने योग्य नहीं है।

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