भोपाल। मप्र में सरकार ने लकड़ी माफिया की सहूलियत के लिए कानून ही बदल डाला। मप्र में धार्मिक महत्व के फलदार पेड़ों को काटने की अनुमति नहीं थी परंतु अब सरकार ने ऐसे 53 तरह के पेड़ों को काटने की अनुमति प्रदान कर दी। इसके लिए अधिसूचना भी जारी कर दी गई।
पौराणिक आस्था से जुड़े बरगद, पीपल जैसे वृक्ष तथा आम, अमरूद जैसे 53 तरह के फलदार पेड़ों को काटना प्रतिबंधित था। सरकार ने इन्हे परिवहन अनुज्ञा (टीपी) से मुक्त कर दिया है। अब लोग खुलेआम इन पेड़ों को काट सकेंगे और इनका व्यापार कर सकेंगे।
बताने की जरूरत नहीं कि माफिया एक्टिव हो चुका है कि गांव गांव में लगे ऐसे पेड़ों का साफाया कर दिया जाएगा। बरगद को देश में राष्ट्रीय पेड़ का दर्जा है लेकिन मप्र में इसे भी कत्ल कर देने की छूट दे दी गई है।
इस निर्णय में लकड़ी माफिया की दिलचस्पी थी। आलम यह था कि जुलाई में इस प्रस्ताव का मसौदा खंडवा, इंदौर, बैतूल, देवास आदि जिलों में पहुंच गया था और अधांधुध कटाई शुरू हो गई थी, वन विभाग के पीसीसीएफ से लेकर सचिव तक कहते रहे कि विधि विभाग को प्रस्ताव भेजने के साथ ही फील्ड अफसरों से भी सुझाव के लिए यह मसौदा भेजा गया था, जिसे आदेश समझा गया।
इन पेड़ों को किया गया टीपी मुक्त
यूकेलिप्टस, केजुरिना, पोपलर, सुबबूल, इजरायली बबूल, विलायती बबूल, आस्ट्रेलियन बबूल, बबूल, खमेर, कटंग बांस, महारूख, कदम, कैसिला सिमोआ, गुलमोहर, जेकरंडा, सिल्वर ऑक, पाम, बेर, शहतूत, कटहल, अमरूद, नींबू-संतरा-मौसंबी, मुनगा, मोलश्री, अशोक, पुत्रजीवा, इमली,जामून, आम, सप्तपर्नी, केथा, जंगली जलेबी, पेल्टाफोरम, नीम, बेकेन, सिसू, करंज, पलाश, सफेद सिरस, पीपल, बरगद, गुलर, रबर, सेमल, कपोक, चिरोल, ग्लेरिसीडिया, रिन्झा, मीठी नीम, गुड़हल, शंकुधारी प्रजातियां (चीड़, कैल,देवदार व पाइन प्रजातियां), आयातित-विलायती काठ व बांस।
इसलिए किया मुक्त
हमने पेड़ काटने की अनुमति नहीं दी है। वन विभाग ऐसे मामलों में लोगों को असुविधा से बचाने के लिए इन प्रजातियों को टीपी से मुक्त कर रहा है।
नरेंद्र कुमार, पीसीसीएफ मप्र
कोर्ट में जाएंगे
प्रदेश में वन क्षेत्र कम हो रहा है, लोगों में पेड़ लगाने की प्रवृत्ति घट रही है। ऐसे में ये निर्णय हरियाली का सफाया करेगा। धार्मिक महत्व के पेड़ों पर भी कुल्हाड़ी चलेंगी। सरकार इस पर पुनर्विचार करे, अन्यथा हम कोर्ट की शरण लेंगे।
पंकज चतुर्वेदी
पर्यावरण चिंतक व अध्यक्ष एनडी सेंटर फॉर सोशल डेवलपमेंट एंड रिसर्च

