अनिल नेमा। एक सफल शुरूवात को सुफल अन्त में तब्दील करने के लिये आवश्यक है कि प्रदेश के समस्त अघ्यापक,संविदा शिक्षक,गुरूजी,नियमित शिक्षक से लेकर समस्त कर्मचारी संगठन एक मंच पर एकत्र होकर संयुक्त मोर्चा का गठन कर एक कोर कमेटी के माध्यम से प्रदेश स्तर से कार्यक्रम का संचालन करें। इस बात में कंही संदेह नही है कि अघ्यापक की एकता के सामने प्रदेश की ब्यूरोकेसी से लेकर नेतागिरी सब नगण्य हैं। शर्ते ये है कि अध्यापक गण बिना किसी स्वार्थ के अध्यापक हित के लिये एकजुट हो जावें।
दरअसल आंदोलन संगठित सत्ता तंत्र या व्यवस्था द्वारा शोषण और अन्याय किए जाने के बोध से उसके खिलाफ पैदा हुआ संगठित और सुनियोजित अथवा स्वतःस्फूर्त सामूहिक संघर्ष है। इसका उद्देश्य सत्ता या व्यवस्था में सुधार या परिवर्तन होता है। पिछले एक सप्ताह से आजाद अध्यापक संद्य के माध्यम से जो जंगी प्रदर्शन भोपाल में हुआ उसके लिये आजाद अध्यापक संघ के समस्त पदाधिकारी सहित, जावेद भाई, भारत पटेल, दिनेश जी, सुबोध भाई, शिवान बहन सहित अनगिनत नाम बधाई के पात्र है परन्तु परिणाम की प्रत्याशा में किये गये आंदोलन में उग्रता के साथ कुटनीति व रणनीति की भी आवश्यकता होती है।
आजाद अध्यापक संद्य के इस आन्दोलन में नाम के अनुरूप उग्रता तो दिखी परन्तु कुटनीति और रणनीति के अभाव में जो आंदोलन माह भर चलना था वह सात दिनों तक ही सिमट कर रहा गया । कई जिलों में तो आंदोलन जोरो पर रहा परन्तु संवाद के अभाव में कई जिलों मेें आंदोलन आरंभ तक नही हो पाया । किन्तु सुखद पहुलू यह है कि इस आंदोलन से प्रदेश के समस्त अध्यापक आन्दोलन की चिंगारी से भभक गये, शोषित, पीडि़त अध्यापक के मन की आग अब अंजाम को पाने के लिये आतुर है।
परन्तु प्रदेश के 51 जिलों के चार लाख से भी अधिक अध्यापकों को किसी एक संगठन या एक व्यक्ति के माध्यम से संचालित नही किया जा सकता । इसके लिये आवश्यक है एक कुशल रणनीति के तहत आंदोलन का संचालन और वह कुशल नेतृव्व किसी व्यक्ति विशेष का न होकर एक सामूहिक नेतृव्य हो जिसे " संयुक्त मोर्चा '' का नाम दिया जायें जिसमें राज्य अध्यापक संघ,म.प्र.शासकीय अध्यापक संद्य,संविदा शाला शिक्षक संद्य,आजाद अध्यापक संद्य के साथ अन्य सारे अध्यापक संविदा शिक्षकों के संगठन का एक -एक प्रतिनिधि लेकर एक 5 सदस्यीय अध्यापक कोर कमेटी का गठन प्रदेश स्तर पर किया जावें जिसके मागदर्शन में अध्यापकों का आंदोलन विकासखंड स्तर से लेकर राज्य स्तर और फिर राष्ट्रीय स्तर पर हो। अध्यापक कोर कमेटी में दस प्रवक्ताओं (मीडिया प्रभारी)की नियुक्ति की जावें जिन्हे संचार माध्यम के द्वारा संदेशों के आदान प्रदान के लिये अधिकृत किया जावें। सोशल मीडिया में एक आफिशियल पेज बनाकर सूचनाओं को प्रदेश के समस्त अध्यापकों तक प्रेषित की जावें ताकि आंदोलन को लेकर किसी भी प्रकार का भ्रम की स्थिति निर्मित न हो ।
उम्मीद है कि समस्त अध्यापक संगठन के नेतागण मेरी बात पर ध्यान देगें ।
अनिल नेमा

