झुकी सरकार, मांनी मांगे, बढ़ाया मानदेय, दी लालबत्ती

Updesh Awasthee
भोपाल। पंचायत प्रतिनिधियों की प्रस्तावित हड़ताल से पहले ही सरकार झुक गई। सरकार ने उनकी मांगे मान लीं हैंं अब उन्हें लालबत्ती लगाने का अधिकार भी दे दिया गया है और मानदेय भी बढ़ा दिया गया है।

मंगलवार रात में हुई मीटिंग में जिला पंचायत अध्यक्षों को वाहन में लालबत्ती लगाने की पात्रता, राज्यमंत्री का दर्जा देने पर आम राय बनी। पंचायत प्रतिनिधियों का मानदेय बढ़ाने पर सैद्धांतिक सहमति तो हो गई, लेकिन अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के जापान दौरे से लौटने के बाद होगा।

सोमवार आधी रात तक पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव और महामंत्री अरविंद भदौरिया के साथ कोर कमेटी के सदस्यों की वार्ता हुई, पर रास्ता नहीं निकल सका था। मंगलवार को महापंचायत की तैयारियां दिनभर चलती रही। कोर कमेटी के सदस्य राजधानी के टीटी नगर स्थित दशहरा मैदान भी गए और मंच आदि व्यवस्थाओं पर जायजा लिया।

इस बीच देर शाम बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के 74 बंगले स्थित घर पर पंचायत मंत्री गोपाल भार्गव, संसदीय कार्यमंत्री डॉ.नरोत्तम मिश्रा, संगठन महामंत्री अरविंद मेनन, अरविंद भदौरिया, रीवा जिला पंचायत अध्यक्ष अभय मिश्रा, कोर कमेटी के संयोजक डीपी धाकड़ सहित अन्य नेताओं की बैठक हुई।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री ने बताया कि लाल-पीली बत्ती, मंत्री दर्जा, राजस्व संबंधी अधिकार, प्रोटोकाल सहित अन्य मांगों के लिए गृह, सामान्य प्रशासन और राजस्व विभाग को अनुशंसा की जाएगी। मानदेय भी बढ़ाया जाएगा पर इसके लिए पहले मुख्यमंत्री से चर्चा की जाएगी। दरअसल, पंचायत प्रतिनिधियों को जो मानदेय दिया जाता है, उसका भार राज्य पर पड़ता है। हालांकि, बैठक में दोनों मांगों पर सहमति बन गई।

सभी मांगें मानी
बीजेपी अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान ने बताया कि सभी मांगें मान ली गई हैं। मानदेय के मामले में मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद अंतिम निर्णय होगा पर सैद्धांतिक तौर पर सहमति है। उध्ार, आंदोलन के संयोजक डीपी ध्ााकड़ ने बताया कि 95 प्रतिशत मांगों पर सहमति बन जाने के कारण महा-पंचायत स्थगित कर दी गई है।

  • ये मुख्य मांगें मान गई सरकार
  • जिला पंचायत अध्यक्ष को लालबत्ती और उपाध्यक्ष को पीली बत्ती लगाने की मिलेगी पात्रता। गनमैन भी मिलेंगे।
  • प्रोटोकॉल में महापौर के समकक्ष होगा दर्जा।
  • ई टाइप मकान की रहेगी पात्रता।
  • ग्राम पंचायत को मिलेंगे नामांतरण और भूमि बंटवारे के अध्ािकार।
  • जिला पंचायत को परफार्मेंंस ग्रांट के बदले सालाना दो करोड़ रुपए मिलेंगे।
  • जनपद पंचायत को परफार्मेंंस ग्रांट के बदले प्रतिवर्ष 50 लाख मिलेंगे।
  • नस्तियां अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के पास तक आएंगी।

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