भोपाल। पंचायती राज विभाग अंतर्गत बैकवर्ड रीजन ग्रांड फंड स्कीम (बीआरजीएफ) में कार्यरत एक हजार संविदा कर्मचारियों की सेवा समाप्त करने का निर्णय राज्य सरकार द्वारा लिया गया है जिसके लिये पंचायती राज आयुक्त रघुवीर श्रीवास्तव द्वारा 30 मई को एक महीने का नोटिस जारी किया गया है। जिसमें उल्लेख है कि 30 जून से बीआरजीएफ योजना में काम करने वाले संविदा कर्मचारी अधिकारी अपनी सेवा समाप्त माने।
इस सेवा समाप्ति के नोटिस से बीआरजीएफ परियोजना में दस वर्षो से कार्य कर रहे एक हजार संविदा कर्मचारियों सहित् प्रदेश के विभिन्न परियोजनाओं में कार्य करने वाले दो लाख संविदा कर्मचारियों में गुस्से की लहर फैल गई है। सेवा समाप्ति के विरोध में बीआरजीएफ के प्रदेश भर से आए संविदा कर्मचारियों ने बीआरजीएफ कार्यालय के तिलहन संघ भवन स्थित पंचायती राज मुख्यालय में म.प्र. संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर के नेतृत्व में घास,फूस और पत्ते खाकर जोरदार प्रदर्शन कर नारे बाजी कर आयुक्त रघुवीर श्रीवास्तव को संविदा कर्मचारियों को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अन्य परियोजनाओं में संविलयन किये जाने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।
इस अवसर पर महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं के साथ मजाक कर रही है दस साल नौकरी कराने के बाद जब संविदा कर्मचारी अधिकारी ओवर ऐज हो चुके हैं, शासकीय कार्य में दिन - रात मेहनत करके पंचायत विभाग को सबकुछ अर्पण कर चुके हैं, अपनी मेहनत और पसीने से पंचायत ग्रामीण विकास विभाग को अनेकों पुरूस्कार दिला चुके हैं उसके बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव अरूणा शर्मा कहती हैं कि आपकी सेवाएं समाप्त की जाती है, संविदा कर्मचारियों के जीवन में इससे हास्याप्रद मजाक कोई और नहीं हो सकता । दूसरी तरफ पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री गोपाल भार्गव कहते हैं कि उनको इस सबंध में जानकारी नहीं है। इस निर्णय पर मेरी सहमति नहीं है । प्रदर्शनकारी संविदा कर्मचारियों ने नारे बाजी कर कहा कि मोदी जी हमारे हीरो थे, हम सबने मिलकर उनको प्रधानमंत्री बनाया और जब वो प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने अच्छे दिन दिखाने की बजाए परियोजना ही समाप्त करके संविदा कर्मचारियों को बुरे दिन दिखा दिये । इससे तो हमारे मौनी बाबा मनमोहन सिंह ही ठीक थे, उन्होंने रोजगार दिया और मोदी जी उसको छीन रहे हैं । ऐसे अच्छे दिन का ख्वाब दिखाने वाली सरकार से तो मनमोहन सिंह की सरकार ही ठीक थी । मोदी सरकार ख्वाब दिखाती है अच्छे दिनों की और देते हैं बुरे दिन ।
दस वर्षो से कार्यरत संविदा कर्मचारियों की सेवा समाप्त होने से निम्न समस्याएं पैदा हो जायेंगी
(1) संविदा कर्मचारी ओवर एज हो गये हैं, कहीं दूसरी जगह सरकारी नौकरी के लिए आवेदन नहीं कर सकते हैं ।
(2) शासकीय संविदा की नौकरी में सभी लोगों की शादी हो गई हैं, परिवार बन गया है वृद्व माता - पिता हैं । बच्चों के स्कूल की फीस, माता - पिता की दवा-दारू, परिवार के खाने - पीने के लाले पड़ जायेंगें ।
(3) परिवार में कई लोगों के भाई - बहन शादी ब्याह के योग्य हो चलें उनकी शादी ब्याह की चिंता कि अब उनके हाथ पीले कैसे होंगें ।
समस्या का हल क्या है -
(1) बी.आर.जी.एफ. योजना में पांच सौ करोड़ रूपये जिलों की बैंकों में रखा हुआ है उसके ब्याज से ही इन एक हजार लोगों का वेतन भुगतान किया जा सकता है ।
(2) पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग एवं उनकी अनेक परियोजनाओं में ही हजारों पद खाली पड़े हैं, उन पदों पर संविलयन किया जा सकता है ।
(3) केन्द्र सरकार ने कहा है कि राज्य सरकार चाहे तो इस योजना को संचालित कर सकती है । राज्य सरकार इस योजना को चलाये और कर्मचारी यथावत् कार्य करते रहेगें ।
म.प्र. संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ ने सरकार को चेतावनी देते हुये कहा कि बी.आर.जी.एफ. के संविदा कर्मचारियों का संविलियन यदि अन्य विभागों में नहीं किया जाता है और 20 जून तक सरकार इस सबंध में आदेश जारी नहीं करती है तो सरकार को उग्र आंदोलन का सामना करना पड़ेगा और 20 जून से राजधानी भोपाल में अनिश्चिित कालीन धरना प्रारंभ कर दिया जायेगा जिसमें प्रदेश के सभी विभागों और उनकी परियोजनाओं कार्यरत दो लाख संविदा कर्मचारी हड़ताल पर चले जायेंगें ।

