सच में, देश की जवानी का उपयोग हो

Updesh Awasthee
राकेश दुबे@प्रतिदिन। देश की सामाजिक-आर्थिक समस्याओं के समाधान में युवाओं की रचनात्मक क्षमता का उपयोग करना सरकार चाहती है| इस कार्यक्रम को नाम दिया गया है “ एक साल –देश के नाम” सरकार चाहती है  कि स्कूलों में बढ़ते ड्रॉप आउट, खराब सैनिटेशन, बढ़ती मातृ और शिशु मृत्यु दर तथा कृषि संबंधी संकटों के हल के लिए युवा प्रशासन की मदद करें।

20  से 29  साल के कुछ ग्रैजुएट या नॉन ग्रैजुएट युवाओं का चयन एक साल के लिए किया जाएगा। उनके चयन के लिए अखिल भारतीय स्तर पर एक परीक्षा हिंदी या अंग्रेजी में आयोजित की जाएगी, जिसमें सफल उम्मीदवारों को एक इंटरव्यू से गुजरना होगा। परीक्षा में भाग लेने के लिए युवाओं का नाम किसी शैक्षिक संस्थान या युवाओं के बीच सक्रिय सामाजिक संगठन द्वारा प्रस्तावित होना चाहिए। पहले साल अंतिम रूप से ३५० युवा चुने जाएंगे, जिन्हें दो महीने की ट्रेनिंग दी जाएगी। प्रशिक्षण अवधि में १०  दिन उन्हें किसी दूर-दराज के इलाके में या सीमावर्ती क्षेत्र में बिताने होंगे। फिर इन्हें किसी तहसील में भेजा जाएगा, जहां वे क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं का अध्ययन करेंगे और एक साल के अंदर उनके समाधान पर अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे।इन्हें साल भर हर महीने २५  से ३०  हजार का भत्ता दिया जाएगा। साल के अंत में श्रीपेरंबदूर स्थित राजीव गांधी नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ यूथ डिवेलपमेंट उन्हें एक सर्टिफिकेट देगा। नेहरू युवा केंद्र जल्दी ही इस योजना की घोषणा कर सकता है।

अगर इस योजना को इसकी भावना के साथ ग्रहण किया गया तो निश्चय ही देश की कुछ लाइलाज समस्याओं का रचनात्मक समाधान सामने आ सकता है। सरकारी ढांचे से आजाद रहकर ये नौजवान दबावमुक्त और तटस्थ होकर समस्याओं का अध्ययन कर सकेंगे।इससे उन्हें सामाजिक यथार्थ को नजदीक से समझने और आम आदमी से संवाद करने का अवसर मिलेगा। यह अनुभव आगे चलकर जीवन की बड़ी जिम्मेदारियां निभाने में भी उनके लिए मददगार साबित होगा। अगर भविष्य में ये प्रशासनिक सेवा में गए तो निश्चय ही औरों से बेहतर प्रशासक साबित होंगे। ये स्कूली दुनिया से निकले मैनेजरों की तुलना में बेहतर प्रबंधक भी साबित हो सकते हैं क्योंकि इनके पास समस्या और समाधान की जमीनी समझ होगी।बस दर एक ही बात का है मनरेगा का उदाहरण हमारे सामने है। देखना होगा कि कहीं यह भी कुछ लोगों को रोजी-रोटी उपलब्ध कराने का उपक्रम बनकर न रह जाए

श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।
संपर्क  9425022703
rakeshdubeyrsa@gmail.com


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