अपनी आदत के अनुसार पलटी है भाजपा

Updesh Awasthee
राकेश दुबे@प्रतिदिन। चुनाव घोषणापत्र में भाजपा ने कहा कि वह सत्ता में आई तो किराना कारोबार में एफडीआइ की अनुमति नहीं देगी लेकिन पहला साल बीतते-बीतते उसने पलटी मार ली। वैसे यह पहला मौका नहीं है राममन्दिर पर पिछली एनडीए सरकार में भी उसने ऐसा ही किया था| इस मामले में कहा जा रहा है कि इस मसले पर अंतिम निर्णय होना अभी बाकी है, पर सरकार क्या चाहती है इसके संकेत तो उसने दे ही दिए हैं। 

उसके बदले हुए रुख के पीछे क्या वजह होगी इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। वह सोचती होगी कि इक्यावन फीसद खुदरा एफडीआइ की पहले की अनुमति को खारिज करने की घोषणा से विदेशी निवेश की बाबत प्रतिकूल संदेश जाएगा, बाहरी निवेशक हतोेत्साहित होंगे। अगर उसकी यही चिंता हो तो विपक्ष में रहते हुए भी उसका यही रुख होना चाहिए था। यह अकेला मामला नहीं है जिसमें भाजपा ने ‘यू-टर्न’ लिया है। जीएम बीजों के जमीनी परीक्षण की इजाजत देने और भूमि अधिग्रहण से लेकर भारत-बांग्लादेश सीमा समझौते तक, ऐसे अनेक मसले गिनाए जा सकते हैं जिनमें भाजपा का रुख विपक्ष में उसकी भूमिका से एकदम उलट है। अपने घोषणापत्र में उसने कहा था कि जब तक जीएम बीजों की बाबत पूरी तरह वैज्ञानिक अध्ययन नहीं हो जाता, और आशंकाएं दूर नहीं हो जातीं, इनके जमीनी परीक्षण की इजाजत नहीं दी जाएगी। पर उसने बिना वैसा कोई अध्ययन कराए, अनुमति दे दी।

लेकिन पिछली सरकार के समय खुदरा कारोबार में एफडीआइ का रास्ता साफ करने का प्रस्ताव आया, तो भारतीय जनता पार्टी ने जोर-शोर से उसका विरोध किया था। तब सुषमा स्वराज ने मनमोहन सिंह सरकार के इस कदम को छोटे दुकानदारों और कारोबारियों के लिए मौत की घंटी करार दिया था। आज के वित्तमंत्री अरुण जेटली ने भी तब संसदीय बहसों में भागीदारी करते समय और लेख लिख कर भी खुदरा क्षेत्र में एफडीआइ के खतरे गिनाए थे। भाजपा नेताओं की दलील होती थी कि किराना क्षेत्र के दरवाजे एफडीआइ के लिए खोल देने से इस कारोबार में लगे करोड़ों लोग अपनी आजीविका से वंचित हो जाएंगे, लघु उद्योगों पर भी बुरा असर पड़ेगा। लेकिन लगता है केंद्र की सत्ता में आने के बाद अब भाजपा अपने ही तर्कों को भूल गई है। 

श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।
संपर्क  9425022703
rakeshdubeyrsa@gmail.com

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