हरिहर निवास शर्मा। शासकीय नौकरी के लिए लिखित परिक्षा का औचित्य क्या ? क्या उनकी शैक्षणिक योग्यता व्यर्थ है ? चयन परीक्षा तो महज भ्रष्टाचार का मार्ग ही प्रशस्त करती है | क्या यह उचित नहीं होगा कि पीईटी व पीएमटी जैसी परीक्षाओं के स्थान पर केवल उनकी शारीरिक व मानसिक दक्षता की परीक्षा भर ली जाए ? पीईटी व पीएमटी जैसी खर्चीली प्रणालियों के चलते आर्थिक रूप से निर्धन लोग तो आवेदन ही नहीं कर पाते | न नौ मन तेल होगा न राधा नाचेगी | न गरीब लोग प्रवेश परीक्षाओं के लिए अपने बच्चों को महंगी कोचिंग करवा पायेंगे, न वे उस दौड़ में शामिल ही हो पाएंगे ?
सरकारी नौकरी के लिए परीक्षा का क्या औचित्य ?
5/20/2015 01:38:00 PM
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