जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने विधानसभा फर्जी नियुक्ति घोटाले में आरोपियों की ओर से की गई एफआईआर रद्द किए जाने की मांग नामंजूर कर दी। कोर्ट ने इस मामले के आरोपियों को भोपाल के जहांगीराबाद थाने में अपने पासपोर्ट जमा कराने के निर्देश दिए हैं।
इस मामले में बुधवार को जिन याचिकाओं पर सुनवाई हुई उनमें दिग्विजय सिंह और श्रीनिवास तिवारी की याचिकाएं शामिल नहीं थीं लेकिन हाईकोर्ट ने 8 आरोपियों के संबंध में जो कड़े निर्देश दिए हैं वे कमोवेश सभी 18 आरोपियों पर समान रूप से लागू होंगे। चूंकि दिग्विजय और श्रीनिवास भी 18 आरोपियों में शामिल हैं। इसलिए उन्हें भी थाने में हाजिरी देनी होगी और पासपोर्ट जमा करने होंगे।
बुधवार को प्रशासनिक न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन व जस्टिस मूलचंद गर्ग की डिवीजन बेंच में मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता यज्ञनारायण शर्मा, राजेश द्विवेदी, देवेन्द्र तिवारी, प्रदीप मिश्रा, बीपी तिवारी और एके मिश्रा सहित अन्य की ओर से पक्ष रखा गया। कोर्ट से मांग की गई कि जस्टिस शचीन्द्र द्विवेदी की रिपोर्ट विवादास्पद है अतः उसकी सिफारिश के आधार पर दर्ज एफआईआर रद्द कर दी जाए।
क्या है मामला- विधानसभा सचिवालय के उपसचिव एमएम मैथिल की शिकायत पर भोपाल स्थित जहांगीराबाद पुलिस ने 27 फरवरी 2015 को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी सहित 18 के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी॥ उन पर 1993 से 2003 के बीच अवैधानिक नियुक्तियों का दोषारोपण किया गया है।
आरोपियों को मिली-जुली राहत
जबलपुर। विधानसभा नियुक्ति घोटाले के आरोपी याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सिद्घार्थ राधेलाल गुप्ता व प्रकाश उपाध्याय ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट ने याचिकाओं का अंतिम निराकरण करते हुए आरोपियों को मिली-जुली राहत दी है। इसके तहत एक सप्ताह के अग्रिम नोटिस के बगैर उनकी गिरफ्तारी पर सशर्त रोक लगा दी गई है। इस बीच पुलिस को एफआईआर के तहत अनुसंधान जारी रखने स्वतंत्र कर दिया गया है।

