विधायिकी नहीं छोड़ेंगी, महापौरी भी करेंगी मालिनी

Updesh Awasthee
इंदौर। नवनिर्वाचित महापौर मालिनी गौड़ विधायकी नहीं छोड़ेंगी। वे महापौर और विधायक दोनों दायित्व संभालेंगी। संगठन से आश्वासन लेने के बाद ही उन्होंने महापौर पद की उम्मीदवारी के लिए हामी भरी थी। उधर, विधानसभा-4 की कुर्सी खाली होने की बाट जोह रहे 4 नेता केंद्रीय पदाधिकारियों को 'एक व्यक्ति, एक पद के भाजपाई सिद्धांत का हवाला देने में जुटे हैं।

इंदौर में महापौर का पद महिला के लिए आरक्षित होने के बाद ही उम्मीदवार की खोज शुरू हो गई थी। आरंभिक चर्चा में ही मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने मालिनी गौड़ का नाम आगे बढ़ा दिया था। गौड़ विरोधियों ने तब पूरी ताकत लगाई थी कि उनका टिकट कट जाए, लेकिन शिवराज, मेनन और नंदकुमारसिंह चौहान की तिकड़ी के समक्ष उनकी नहीं चली। संगठन ने फैसला बदलने से इंकार किया तो विजयवर्गीय-मेंदोला खेमे ने पूजा पाटीदार का नाम आगे बढ़ाया, लेकिन उस नाम पर और किसी की रजामंदी नहीं बनी।

विधायकी के साथ जो चाहे जिम्मेदारी दो
सूत्रों के अनुसार, संगठन ने जब गौड़ से इस विषय पर चर्चा की थी तभी उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि वे विधायक पद छोड़कर महापौर बनने की इच्छुक नहीं हैं। संगठन चाहे तो विधायक पद के साथ उन्हें यह जिम्मेदारी दे दे। उम्मीदवारी तय होने के पहले गौड़ खेमे ने मुख्यमंत्री से इस बात पर मुहर लगवाई कि उनकी विधायकी पर खतरा नहीं होगा।

विजयवर्गीय का कार्यकाल बना उदाहरण
गौड़ खेमे ने दोनों जिम्मेदारी एक साथ संभालने के लिए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का उदाहरण संगठन के समक्ष रखा था। विजयवर्गीय भी वर्ष 1999 से 2004 तक विधायक रहते हुए इंदौर के महापौर थे। बाद में उमा भारती की सरकार में मंत्री बनने के बाद भी उन्होंने महापौर पद की जिम्मेदारी नहीं छोड़ी थी।

तो एक पद के लाभ छोड़ना होंगे
विधि विशेषज्ञों के अनुसार, संविधान में स्पष्ट है कि एक व्यक्ति लाभ के दो पदों पर एक साथ नहीं रह सकता, यदि रहना चाहता है तो उसे एक पद के सभी लाभ (वेतन, भत्ते और अन्य सुविधाएं) छोड़ने होंगे। भाजपा में भी 'एक व्यक्ति, एक पद का नियम लागू है, लेकिन यहां भी विशेष परिस्थितियों में इसकी अनुमति मिल जाती है।

दावेदारों के अरमानों पर पानी


पिछले दिनों भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमारसिंह चौहान ने इंदौर में स्पष्ट कर दिया था कि संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं कि विधायक महापौर नहीं बन सकता। बाद में उन्होंने इसका फैसला संगठन स्तर पर लेने की बात कही थी। गौड़ की उम्मीदवारी महापौर के लिए तय होते ही निवृत्तमान महापौर कृष्णमुरारी मोघे, नगर अध्यक्ष कैलाश शर्मा, आईडीए सीईओ शंकर लालवानी, विजय मालानी आदि नेता 'अयोध्या के सपने देखने लग गए थे। सबके अरमानों पर पानी फिरेगा।


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