बैगा आवास घोटाला: गांव में पहुंचा जांच दल, खुलने लगीं हैं परतें

Updesh Awasthee
आनंद ताम्रकार/बालाघाट। बालाघाट जिले की बैहर तहसील में बैगा विकास प्राधिकरण के अंतर्गत बैगा आवास मामले में हुये लाखों रूपये की घोटाले की जांच करने के लिये कल शनिवार को सीआईडी का एक विशेष जांच दल बैहर तहसील के बैगा गांव पहुंचा ओर सबंधित गांव के बैगा आदिवासियों के बयान दर्ज किये। जांच ज्यो ज्यो आगे बढ़ती जा रही है फर्जीवाडे की फेहरिस्त परत दर परत खुलते ही जा रही है।

यह उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर में दायर एक जनहित याचिका में माननीय उच्च न्यायालय के निर्देश पर इस मामले की जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा गोपनीय जांच करवाई गई थी। जांच में यह तथ्य पाये गये थे की प्रकरण में उजागर हुये तथ्यों के आधार पर संलिप्त आरोपियों के विरूद्ध साधारण आरोप लगाकर कार्यवाही की गई है जिस पर पुलिस अधीक्षक बालाघाट को पुन निर्देश दिया गया था कि संलिप्त व्यक्तियों के विरूद्ध उनके द्वारा किये गये आपराधिक कृत्यों को देखते हुये प्रकरण में गंभीरता पूर्वक कार्यवाही की जाये।

इस प्रकरण में संलिप्त प्रमुख आरोपियों में तत्कालीन परियोजना प्रशासक भोपाल में पदस्थ है तो एक अन्य परियोजना प्रशासक रिटायर हो चुके है एक अन्य संलिप्त आरोपी ने इस मामले के कारण मानसिक दवाब के चलते आत्महत्या कर ली इन विसंगतियों चलते सालों से यह जांच अब तक पूरी नही हो पायी।

पुलिस सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस मामले की जांच करने के लिये डीएसपी सीआईडी डी पी सिंग, निरीक्षक ए के दाहीया ने 3 दिन पहले बैहर आकर इस मामले से जुडे सभी पहलु की जांच कर रहे है उन्होनें अवगत कराया की इस प्रकरण में 233 हितग्राहीयों के पृथक पृथक बयान लिये जायेगे।

अब तक धनेगांव,खापा, बैहर, धनवार और कलेगांव के हितग्राही के बयान दर्ज किये जा चुके है। जांच दल सभी हितग्राहीयों के घरों तक पहुचकर बैगा आदिवासीयों की मौजूद हालातों का जायजा लिया जा रहा है।

बैगा विकास प्रधिकरण के बैहर स्थित परियोजना प्रशासक द्वारा वर्ष 2009-10 में 233 बैगा आदिवासीयों के स्थानीय सहकारी बैक में खोले गये थे इन खातों मंे प्रति आवास के दर से प्रत्येक हितग्राही के खाते में 35-35 हजार रूपये जमा करवा दिये गये थे इसके बाद संलिप्त विभागीय अधिकारीयों तथा कर्मचारियों ने बैंक के भूगतान पत्रक में संबधित हितग्राहीयों का अंगूठा लगाकर समूची राशि का आहरण कर लिया था।

इस राशि का आहरण करने के बाद उन्होने ने हितग्राही को नाम मात्र के लिये 5-7 हजार रूपये की राशि दे दी थी जिसे लेकर हितग्राही आदिवासी बैगाओं ने पुराने मकान को तोडकर नया मकान बनना प्रांरभ कर दिया था लेकिन इसके बाद उन्हें कोई राशि प्रदान ही नही की गई।इस मामले मंे संलिप्त तत्कालीन परियोजना प्रशासक जे पी सरर्वटे  परियोजना अधिकारी एस एस सिवनकर, कार्यालय के लिपिक, सेवा सहाकरी समिति उकवा के तत्कालीन प्रबंधक चित्रसेन बिसेन, लेखापाल तथा जनपद पंचायत बैहर की ग्राम पंचायत खापा के सरपंच का नाम जांच में उजागर हुआ था जिनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करते हुये बैहर पुलिस ने धारा 409,467,468,471,120 बी एससी-एसटी के तहत अपराध दर्ज किया था जे पी सरर्वटे आदिवासी विकास विभाग भोपाल में पदस्थ है परियोजना अधिकारी शिवनकर गतवर्ष सेवा निवृत्त हो चुका है वही सेवा सहाकरी समितिके तत्कालीन प्रबंधक चित्रसेन बिसेन ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

जांच अधिकरी डी पी सिंग, डीएसपी सीआईडी ने अवगत कराया कि इस मामले की शुरू से जांच की जा रही है अब तक 5 गांव के पिडित आदिवासी बैगाओें के बयान दर्ज किये जा चुके है सभी 233 हितग्राही के बयान दर्ज किये जायेगे। उसे बाद जाच रिपोर्ट एडीजी भोपाल को सोंपी जायेगी।

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