राकेश दुबे@प्रतिदिन। आडवानी जी ने सही कहा है की उनने इससे पहले ऐसा चुनाव प्रचार नहीं देखा| आडवानी जी से 20—30 साल छोटे लोगों की आँखे भी इस चुनाव प्रचार को देखकर नीची हो गई है|
सबसे ज्यादा आश्चर्य की बात यह है कि इस वस्त्रविहीन प्रचार की शुरुआत “जहाँ नारी की पूजा होती है, वहां देवता बसते हैं”, का जप करने वाली भारतीय जनता पार्टी से हुई है | कांग्रेस इस होड़ में पीछे कैसे रह सकती थी| बस खेल शुरू हो गया है, आगाज़ कामुक है तो अंजाम .......!
भारतीय राजनीति में प्रचार का यह तरीका, कहीं से भी शोभनीय नहीं है| नरेंद्र मोदी के लिए मेघना पटेल और राहुल के तनिषा सिंह के वस्त्र विहीन चित्र क्या संदेश देते हैं ? यही न कि हमारे देश में नारी की पूजा शक्ति के रूप में होने की बात गलत है और इस चुनाव में हम नारी के सौन्दर्य का प्रयोग वोट के बाज़ार के रूप में कर रहे हैं |
दोनों ही पार्टियों में बड़े-बड़े सलाहकार और चुनावी लडाके पड़े है | दोनों ने ही अपने चुनाव प्रचार के लिए भारी-भरकम राशि के साथ विदेशी सलाहकारों को नियुक्त किया है | पश्चिम में नारी उपभोग की वस्तु है ,भारत में नहीं | अपने को भावी प्रधानमंत्री के रूप में प्रस्तुत करने वालों को यह जरुर देखना चाहिए यह वस्त्रविहीन प्रचार आपकी छवि को किसी ब्लू फिल्म के नायक सरीखा तो नहीं बना रहा है |
लेखक श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।
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rakeshdubeyrsa@gmail.com
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