इंदौर। पहली से आठवीं तक के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की परीक्षा लेने का विरोध शुरू हो गया है। शिक्षकों और शिक्षक संगठनों ने कमिश्नर ऑफिस के बाहर धरना दिया और नारेबाजी की। परीक्षा लेने को शिक्षकों को अपमान बताया। शिक्षकों ने परीक्षा के बहिष्कार करने का निर्णय लिया।
मध्यप्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संगठन के प्रांताध्यक्ष हरीश बोयत ने कहा संगठन ने परीक्षा के बहिष्कार का निर्णय लिया है। राज्य आदर्श शिक्षक मंच के संयोजक भगवती प्रसाद पंडित ने भी शिक्षकों की परीक्षा लेने का विरोध किया।
दरअसल जिले में 25 प्रतिशत उत्कृष्ट प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल चिह्नित किए गए है। इनमें छात्र-छात्राओं के टेस्ट लिए गए थे। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार मूल्यांकन में यह निकलकर आया कि बच्चे पढ़ाई में कमजोर है। परीक्षा परिणाम बिगडऩे का एक कारण शिक्षकों में अध्यापन के प्रति अरुचि, अध्यापन के विषय की दक्षता और कौशल की भी कमी रही। इसके बाद शिक्षा विभाग ने आठवीं तक के सभी स्कूल के शिक्षकों के लिए एक आत्मावलोकन परीक्षण कार्यक्रम का निर्णय लिया है। इसके पहले चरण में 12 जनवरी को 800 स्कूल (450 उत्कृष्ट और 350 अन्य स्कूल) के 3700 शिक्षकों का परीक्षण कार्यक्रम होगा। दूसरा चरण 19 जनवरी को होगा।
खुद को आईना दिखाने के लिए है
आत्मावलोकन परीक्षण कार्यक्रम एक तरह से खुद को आईना दिखाने के लिए है कि हम (शिक्षक) कहां है। यदि अच्छे हैं तो अच्छी बात है लेकिन यदि कमी है तो कहां है और उसे कैसे सुधारा जाए, इस पर चिंतन करना होगा। इस परीक्षण का उद्देश्य पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारना है। इसमें पास-फेल वाला कोई मामला नहीं है।
संजय गोयल
जिला शिक्षाधिकारी