भोपाल। दिनांक 5 जुलाई को प्रमुख सचिव एवं अध्यापक संविदा शिक्षक संघ के बीच तय हुआ निर्णय अप्लाई करते हुए शासन ने राज्य शिक्षा सेवा का गठन कर दिया है। इस हेतु मध्यप्रदेश के राजपत्र में सूचना का प्रकाशन भी कर दिया गया।
राज्य शिक्षा सेवा का गठन तत्काल प्रभाव से किया गया है एवं स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से इसका प्रकाशन किया गया। तात्पर्य यह कि संविलियन का वादा तो शिवराज सरकार ने निभा दिया।
अध्यापक संविदा शिक्षक संघ के प्रवक्ता राकेश पाण्डेय ने भोपालसमाचार.कॉम को बताया कि इस मीटिंग में निम्नांकित बिन्दुओं पर सहमति बनी थी:-
राज्य शिक्षा सेवा का गठन किया जाएगा जिसके अंतर्गत मध्यप्रदेश के सभी 3 लाख संविदा शिक्षक व अध्यापक कार्य करेंगे।
राज्य शिक्षा सेवा ही संविदा शिक्षकों व अध्यापकों की मानीटरिंग, पोस्टिंग, निलंबन, बहाली व प्रमोशन के काम देखेगा व जांच ऐजेन्सी होगी। अत: आदिम जाति कल्याण विभाग, नगर निगम या पंचायतों के अधिकारी अध्यापकों के कामों का निरीक्षण नहीं कर सकेंगे।
पदोन्नति नियमों में बदलाव होगा एवं वर्ग 1 के वरिष्ठ अध्यापक अब हाईस्कूल व हायर सेकेण्ड्री स्कूलों में प्रंसीपल के पद पर पदोन्नत हो सकेंगे।
पदोन्नति में दो प्रकार की प्रक्रिया अपनाइ जाएगी। विभागीय परीक्षाओं के माध्यम से योग्य संविदा शिक्षकों एवं अध्यापकों को 50 प्रतिशत सीटों पर पदोन्नति का अवसर मिलेगा जबकि शेष 50 प्रतिशत पदोन्नतियां वरिष्ठता के अनुसार होंगी।
