भोपाल। एक तरफ सरकार चाहती है की हमे संविदा में प्रशिक्षित शिक्षक मिलें और जब प्रशिक्षित शिक्षक मिलते है तो सरकार उन्हें कह देती है की तुम्हे प्रशिक्षित नहीं माना जा सकता।
मामला संविदा शाला शिक्षक 3 का है सरकार कहती है की संविदा शाला शिक्षक 3 में जो अभ्यर्थी डीएड है वे ही प्रशिक्षित माने जायेंगे और हजारो की संख्या में बीएड करके बैठे अभ्यर्थियों को सरकार अप्रशिक्षित मान रही है और सरकार का मानना है की डीएड प्रशिक्षित या अप्रशिक्षित शिक्षक ह़ी प्राथमिक कक्षाओं को पढ़ा सकते है। बीएड वालों को पढ़ाना नहीं आता जो डिप्लोमा पाठ्यक्रम है उन्हें आता है और जो बेचलर डिग्री है उन्हें नहीं आता।
कहने का मतलब साफ स्पष्ट है की सरकार ने डिग्री की वेल्यु कम कर दी है लेकिन बेचलर डिग्री वाले तो डिप्लोमा वालो को भी पढ़ा सकते है तो प्राथमिक शाला में क्यों नहीं?
बीएड वालों के साथ सरकार छलावा कर रही है? सरकार को बेरोजगारों के साथ ऐसा नहीं करना चाहिए और संविदा शाला शिक्षक 3 में अप्रशिक्षित के स्थान पर बीएड वाले अभ्यर्थियों को पात्रता दी जानी चाहिए क्योंकि डीएड की डिग्री छोटी है और बीएड की डिग्री बड़ी है किन्तु अप्रशिक्षित शिक्षक से तो ठीक है ना। सरकार चाहे तो इन्हें छः माह का विशेष कोर्स कराके प्राथमिक शिक्षक की योग्यता इनमे ला सकती है और कम समय में सभी ट्रेंड शिक्षक इन्हे मिल जायेंगे जबकि सरकार अप्रशिक्षित को भर्ती करती तो उन्हें दो साल का पाठ्यक्रम पूरा करना होगा तब बे ट्रेंड होंगे हैं। अत संविदा शाला शिक्षक 3 भर्ती में बीएड पास अभ्यर्थियों को मौका मिलना चाहिए।
कैलाश कुमार विश्वकर्मा
बीएड) संविदा शाला 3 पास